खड़गे के बयान पर अब डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस! गहलोत बोले- 'दादी याद दिलाना' या 'बाप की जागीर' तो मुहावरा है...
मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर मचे सियासी घमासान के बाद कांग्रेस अब डैमेज कंट्रोल में जुट गई है अशोक गहलोत ने बचाव करते हुए कहा है कि 'बाप की जागीर' और 'दादी याद दिलाना' केवल मुहावरे हैं, जिन्हें गलत तरीके से पेश किया जा रहा है.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी के हालिया बयान को लेकर जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) हंगामा मचा रही है, वह मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की एक राजनीतिक कोशिश नजर आती है. खड़गे जी देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं और वे प्रधानमंत्री पद की गरिमा और मर्यादा को भली-भांति समझते हैं. उनका उद्देश्य कभी किसी का व्यक्तिगत अपमान करना नहीं रहा है.
भारतीय समाज और राजनीति में 'दादी याद दिलाना' या 'बाप की जागीर समझना' जैसे मुहावरे सदियों से आम बातचीत का हिस्सा रहे हैं. इनका इस्तेमाल किसी पर व्यक्तिगत हमला करने के लिए नहीं, बल्कि एक खास भाव और लहजे को व्यक्त करने के लिए किया जाता है. ठीक इसी तरह, 2025 में संसद में भाषण देते हुए गृह मंत्री अमित शाह जी ने भी "साला" शब्द का प्रयोग किया था, जो बोलचाल के अंदाज का हिस्सा था. मल्लिकार्जुन खड़गे जी का कल का बयान भी इसी आम बोलचाल की शैली में था. इसलिए, भाजपा का इस बात पर इतना बवाल खड़ा करना समझ से परे है.
कांग्रेस का आरोपी, बीजेपी का दोहरा रवैया
आज बीजेपी शिष्टाचार और भाषा की मर्यादा की बात कर रही है, लेकिन जब 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने पूर्व प्रधानमंत्री और देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीद राजीव गांधी जी पर अभद्र टिप्पणी की थी, तब बीजेपी नेताओं की मर्यादा कहां चली गई थी? जब सवाल अपनी पार्टी की भाषा पर आता है तो चुप्पी साध ली जाती है और जब विपक्ष बोले तो हंगामा खड़ा कर दिया जाता है. यह दोहरा रवैया बीजेपी की राजनीति को साफ उजागर करता है.
सच्चे मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश
बीजेपी हर मुद्दे का राजनीतिकरण करके जनता से जुड़े असल सवालों से भाग रही है. उत्तराखंड के हल्द्वानी में खड़गे जी की जनसभा के बाद जिस तरह आरएसएस-भाजपा से जुड़े लोगों ने मंच का 'पवित्रिकरण' या शुद्धि अनुष्ठान किया, उसने एक गंभीर सवाल खड़ा किया है: आखिर बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा में दलित समाज के प्रति इतनी नफरत क्यों है?
यह भी पढ़ेंः 'रावण', 'जहरीला सांप' से लेकर मोदी के बाप तक... मल्लिकार्जुन खरगे के वे 5 विवादित बयान, जिन पर मच गया सियासी भूचाल
बीजेपी ने कहा था मामले की जांच करवाएंगे
जब कांग्रेस ने इस संवेदनशील मुद्दे को संसद में उठाया था, तब बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा जी ने आश्वासन दिया था कि इस मामले की जांच कराई जाएगी. लेकिन आज देश यह जानना चाहता है कि उस जांच का क्या हुआ? जांच के नतीजे जनता के सामने क्यों नहीं लाए गए? इससे साफ जाहिर होता है कि बीजेपी के कथनी और करनी में कितना बड़ा अंतर है.
लोकतंत्र और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल
आज देश के सामने सबसे बड़ा सवाल लोकतंत्र की रक्षा, वोट चोरी के आरोप और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता का है. देश का युवा, कांग्रेस और पूरा विपक्ष मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर काफी समय से सवाल उठा रहा है. लेकिन इन गंभीर विषयों पर गृह मंत्री अमित शाह जी ने कभी वैसी गंभीरता नहीं दिखाई जैसी वे जुबानी विवादों पर दिखाते हैं.
जवाब देने की बजाए देशभक्ति पर सवाल खड़े करने लगती है
जब भी विपक्ष और देश के युवा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाते हैं, तो बीजेपी उनका जवाब देने के बजाय उन पर विदेशी ताकतों से जुड़े होने का आरोप लगा देती है और उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाने लगती है. BJP को बयानबाजी पर राजनीति करने के बजाय देश के सामने खड़े इन गंभीर और असली सवालों का जवाब देना चाहिए.
यह भी पढ़ेंः सारी मर्यादाएं तार-तार कर दीं... खरगे के 'बाप' वाले बयान पर पटना से दिल्ली तक बवाल; क्या बोले अमित शाह?