हवाई अड्डों की सुरक्षा होगी और मजबूत: CISF जवानों को मिली 'साइबर अटैक' से निपटने की एडवांस्ड ट्रेनिंग
सीआईएसएफ के 40 जवानों ने एनएफएसयू (NFSU) दिल्ली से 12 सप्ताह की विशेष साइबर ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है. जानें इस एडवांस कोर्स में जवानों ने डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर अटैक से बचाव और एआई-आधारित साइबर खतरों से निपटने के कौन-कौन से गुण सीखे.
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों के लिए "साइबर सुरक्षा और इंसिडेंट रिस्पॉन्स" विषय पर आयोजित 12 सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आज संपन्न हो गया. इस ट्रेनिंग का आयोजन एलएनजेएन-एनआईसीएफएस (LNJN-NICFS), राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) के दिल्ली कैंपस, सेक्टर-3, रोहिणी में किया गया.
प्रशिक्षण के समापन पर आयोजित विदाई समारोह (Valedictory Ceremony) दोपहर 12:00 बजे से 1:00 बजे तक चला. इस अवसर पर एनएफएसयू दिल्ली कैंपस की उप-निदेशक प्रो. (डॉ.) मीनाक्षी सिन्हा, प्रो. (कर्नल) निधीश भटनागर, सीआईएसएफ मुख्यालय से एआईजी/एपी-एनजेड श्री सुब्रत झा, और कई प्रतिष्ठित संकाय सदस्य (फैकल्टी मेंबर्स) व अधिकारी उपस्थित रहे.
40 जवानों को मिला विशेष प्रशिक्षण
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 13 जुलाई 2026 से 08 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया गया. इसमें देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर तैनात सीआईएसएफ के 'एयरपोर्ट सिक्योरिटी ग्रुप' (ASG) के 40 जवानों ने हिस्सा लिया. इस कोर्स के दौरान जवानों को साइबर सुरक्षा के सबसे अहम पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया गया.
साइबर हमले में तुरंत कार्रवाई की जरूरत
इसमें साइबर दुनिया के नए खतरों, नेटवर्क और सिस्टम की सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक (साइबर अपराधों की वैज्ञानिक जांच), और साइबर हमले की स्थिति में तुरंत और प्रभावी जवाबी कार्रवाई (Incident Response) पर विशेष जोर दिया गया. इसका मुख्य उद्देश्य जवानों को उभरते हुए साइबर खतरों से निपटने के लिए व्यावहारिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना था.
साइबर सुरक्षा की जमीनी हकीकत से रूबरू हुए जवान
प्रशिक्षण को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए, जवानों को जमीनी अनुभव (Practical Exposure) भी दिया गया. इसके लिए उन्हें आईएफएसओ (IFSO), सीएफएसएल (CFSL), पावरग्रिड, दिल्ली मेट्रो (DMRC) और यूआईडीएआई (UIDAI) जैसे महत्वपूर्ण संगठनों और विशेष केंद्रों का दौरा कराया गया.
कैसे काम करता है ये सिस्टम?
इन दौरों से जवानों ने करीब से देखा कि देश के सबसे संवेदनशील और क्रिटिकल सेक्टर्स में आधुनिक साइबर सुरक्षा तकनीकें, डिजिटल फोरेंसिक और साइबर हमलों से निपटने के सिस्टम असल में कैसे काम करते हैं.
विशेष टीम ने साझा किए अपने अनुभव
यह पूरा कार्यक्रम उप-निदेशक (प्रशिक्षण), एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसरों और विषय विशेषज्ञों (Subject-Matter Experts) की एक विशेष टीम के मार्गदर्शन में चला. उनके गहरे ज्ञान और व्यावहारिक अनुभवों ने जवानों के सीखने के अनुभव को और भी बेहतर बनाया.
सीआईएसएफ की साइबर क्षमताओं को मिलेगी नई धार
समापन समारोह को संबोधित करते हुए सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी ने साइबर क्षमताओं को लगातार अपग्रेड करने और साइबर हमलों से निपटने की तैयारियों को और मजबूत करने पर जोर दिया. उन्होंने जवानों से कहा कि वे इस ट्रेनिंग में सीखे गए ज्ञान और हुनर का इस्तेमाल अपने रोजमर्रा के ऑपरेशन्स में करें.
साइबर खतरों का करेंगे मजबूती से सामना
यह प्रशिक्षण सीआईएसएफ कर्मियों को तकनीकी रूप से और अधिक चुस्त बनाएगा, जिससे वे अति-संवेदनशील सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर मंडराने वाले नए साइबर खतरों का मजबूती से सामना कर सकेंगे. 12 सप्ताह के इस कार्यक्रम का सफलतापूर्वक पूरा होना, विशेष संस्थानों के साथ तालमेल, उन्नत ट्रेनिंग और व्यावहारिक ज्ञान के जरिए सीआईएसएफ के भीतर साइबर क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है.
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