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EXPLAINER: ब्रिक्स से महंगाई पर लगेगी लगाम या सिर्फ बनेगा प्लान, जानिए कैसे आम आदमी की जेब पर पड़ता है नीतियों का असर?

BRICS समिट के लिए मेहमान जुटने लगे हैं. इस दौरान सदस्य देश वैश्विक चुनौतियों के बीच अपनी इकोनॉमी की मजबूती के लिए कमाई बढ़ाने और व्यापार घाटा कम करने पर भी चर्चा करेंगे. अब बड़ा सवाल ये है कि क्या महंगाई कम करने को लेकर ब्रिक्स से कोई रास्ता निकलेगा?

Written By Shwetank Ratnamber
Published: Sep 11, 2026, 08:27 AM IST | Updated: Sep 11, 2026, 11:06 AM IST
Image Credit: ब्रिक्स समिट से पहले आज बिजनेस फोरम की बैठक होगी.
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भारत 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. ये चौथा मौका है जब हमें इस समूह की कमान मिली है. 20 साल पहले चार देशों- ब्राजील, रूस, भारत और चीन के सहयोग से शुरू हुआ ब्रिक्स आज चार महाद्वीपों को कवर कर रहा है. जब इसका जन्म हुआ था, तब परिस्थितियां और चुनौतियां अलग थीं, आज और उस समय के हालात में जमीन-आसमान का अंतर है. चीन, रूस और ब्राजील से इतर हम ये जानने की कोशिश करते हैं कि क्या ब्रिक्स के महामंथन से भारत में महंगाई कम होगी?

चीन, 2010 से दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी है. उसका मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अमेरिका से लेकर सातों महाद्वीपों के एक बड़े हिस्से की जरूरतों को पूरा करता है. यूं तो दुनियादारी पैसे से ही चलती है. इसलिए इकोनॉमी का मजबूत होना बहुत जरूरी है.

ब्रिक्स : 2006 से 2026 का भारत 

दिल्ली में आयोजित समिट में खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश जैसे मुद्दे प्रमुख एजेंडे में हैं. भारत इससे जुड़ी कई बैठकें कर चुका है. ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्री 14-15 मई 2026 को दिल्ली में और वित्त मंत्री और और केंद्रीय बैंक गवर्नर दो दिन पहले 9 और 10 सितंबर 2026 को मुंबई में भविष्य का रोडमैप बना चुके हैं. समिट से पहले 11 सितंबर यानी शुक्रवार की शाम पांच बजे बिजनेस फोरम की बैठक होगी. 

ऐसे में माना जा रहा है कि अपनी अध्यक्षता में हो रही ब्रिक्स समिट-2026 में भारत अपने व्यापार घाटे को कम करने की पहल कर सकता है.

ब्रिक्स में भारत के कारोबार को कितना घाटा?

भारत ब्रिक्स देशों से सालाना 321 अरब डॉलर का आयात करता है. जबकि सबसे ज्यादा कारोबारी घाटा हमें चीन से है. चीन से भारत सालाना 130 अरब डालर तो रूस से 55 अरब डालर का आयात करता है. मौजूदा वित्तीय साल 2026-27 में चीन में भारत का निर्यात बढ़ रहा है, लेकिन वो अभी उस लेवल तक नहीं पहुंचा, जिसकी अपेक्षा की जाती है.

Global Trade Research Initiative की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिक्स देशों के साथ अकेले भारत का व्यापार घाटा 2026 में आते-आते तीन गुना होकर 226.1 अरब डॉलर यानी करीब 19 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है.

व्यापार घाटा कम हो जाए और सप्लाई चेन बाधित न हो यानी ब्रिक्स के महामंथन से जो फाइनल रोडमैप निकले, उस पर सही से अमल हो जाए तो महंगाई पर काबू पाने में कुछ मदद जरूर मिल सकती है.  

व्यापार घाटा कम होगा तो डॉलर की मांग भी घटेगी. भारत का रुपया मजबूत होगा. रुपया मजबूत होगा तो बाहर से तेल-गैस और खाद्य तेल समेत अन्य जरूरी सामान मंगाने का बजट बढ़ेगा. रुपया मजबूत होने से कई चीजों का आयात सस्ता पड़ेगा. चीज सस्ती आएगी तो आपको भी सस्ती मिलेगी. यानी महंगाई से ऑटोमेटिक राहत मिलने लगेगी. हालांकि ये इतना आसान नहीं है को असंभव भी नहीं है.

सारा खेल इकोनॉमी का है तो आपको फायदा कब होगा?

इकोनॉमी, मैन्युफेक्चरिंग और कॉमर्स सेक्टर के जानकारों का मानना है कि ब्रिक्स का महंगाई पर पड़ने वाला असर अप्रत्यक्ष और मध्यम अवधि का होगा. अगर इस मंच से फूड सप्लाई, यूरिया, ऊर्जा संकट का समाधान निकालकर सस्ते तेल-गैस का इंतजाम करके कारोबार में अपनी-अपनी करेंसी में भुगतान  व्यवस्था में वास्तविक सहयोग लागू कर पाता है, तो महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है. 

इकोनॉमी मजबूत होती है अच्छे बिजनेस से, जिसमें कारोबारी घाटा कम से कम हो. इससे नई-नई नौकरियों के अवसर बनते हैं. इसके साथ ही अगर लोगों की परचेजिंग पावर यानी लोगों की खरीदारी की क्षमता बढ़ जाए तो सोने पर सुहागा हो जाता है.

जाहिर है सदस्य देश इस दौरान महंगाई पर भी काबू पाने की दिशा में कोई कदम उठाते हुए रोडमैप बना सकते हैं. हालांकि ये कोई चिराग घिसकर जिन्न निकालने जैसा नहीं होगा कि ब्रिक्स समिट-2026 से निकले डिक्लेरेशन से तत्काल भारत में तेल-गैस यानी पेट्रोल-डीजल के दाम घट जाएंगे, सप्लाई चेन मजबूत हो जाएगी और राशन, फल और सब्जियों समेत रोजमर्रा की चीजों के दाम कम हो जाएंगे. 

यानी भारत में महंगाई से राहत के लिए फिलहाल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति, मोदी सरकार की टैक्स और सब्सिडी पॉलिसी समेत, घरेलू उत्पादन और वैश्विक तेल की कीमतें ही आखिर में अपना रोल निभाएंगी.

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About the Author

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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