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जेल नेटवर्क, पाक फंडिंग और महिलाओं की भर्ती... बांदीपोरा पुलिस ने ध्वस्त किया खतरनाक अलगाववादी मॉड्यूल

बांदीपोरा पुलिस ने पाकिस्तान से फंडेड एक खतरनाक अलगाववादी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है. यह नेटवर्क जेल से संचालित हो रहा था और महिलाओं की भर्ती में शामिल था. जानें पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई का पूरा विवरण.

Written ByKhalid Hussain
Published: Oct 24, 2026, 05:01 PM IST|Updated: Oct 24, 2026, 05:12 PM IST
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जेल नेटवर्क, पाक फंडिंग और महिलाओं की भर्ती... बांदीपोरा पुलिस ने ध्वस्त किया खतरनाक अलगाववादी मॉड्यूल
Image Credit: AI Generated Image- कश्मीर में महिला नेटवर्क का पर्दाफाश: पाकिस्तान से कनेक्शन और जेल से चल रहा था खेल, 4 महिलाओं समेत 6 गिरफ्तार

About the Author

    Khalid Hussain

    Khalid Hussain

    सैयद खालिद हुसैन जम्मू-कश्मीर के एक पुरस्कार विजेता पत्रकार हैं, जिन्हें 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. साल 2014 से 'ज़ी न्यूज़' में चीफ  स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम कर रहे हैं.जी मीडिया से पहले हुसैन ने न्यूज़ 18 में नौ साल तक सीनियर कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम किया. हुसैन ने अपने करियर की शुरुआत डीडी न्यूज से की थी. हुसैन ने अपनी तालीम श्रीनगर के पब्लिक स्कूल और डीएवी हाई स्कूल से हासिल की. फिर ग्रेजुएशन तक का सफ़र एस.पी हायर सेकेंडरी स्कूल और अमर सिंह कॉलेज से पूरा किया. उसके बाद मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली के सर अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पूरी की. इसके अलावा हुसैन लेखक फ़िल्म/ वीडियो कैमरा का स्पेशल कोर्स एफटीआई पुणे से कर चुके हैं.  मुंबई और दिल्ली में कई साल काम करने के बाद 2004 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काम करना शुरू किया. डीडी न्यूज़, डीडी कश्मीर, BAG फ़िल्म्स में फ्रीलांस काम किया. हुसैन पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों को बेहतरीन तरीके से कवर कर रहे हैं. लद्दाख से लेकर मुंबई तक हुसैन भारत के कई शहरों से रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
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    जम्मू-कश्मीर के उत्तरी जिले बांदीपोरा में सुरक्षा बलों और पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. पुलिस ने एक ऐसे गुप्त मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है जो महिलाओं को आगे करके प्रतिबंधित संगठन 'इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन' का प्रोपेगैंडा फैलाने की साजिश रच रहा था. इस मामले में चार महिलाओं समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के तार पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और जेल के अंदर से चल रहे संपर्कों से जुड़े हुए हैं.

    इस पूरे मामले की शुरुआत कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा इलाके से हुई. जांचकर्ताओं के अनुसार, हंदवाड़ा के कचलु काजीपोरा के रहने वाले वहीद अहमद भट से पूछताछ के दौरान इस बड़े नेटवर्क का राज खुला. आपको बता दें कि वहीद अहमद भट को पहले भी कुपवाड़ा में UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) से जुड़े एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है.

    पाकिस्तान में बैठे हैंडलर के इशारे पर काम कर रहा गिरोह

    जब पुलिस ने उससे कड़ाई से पूछताछ की, तो बांदीपोरा के दाचीगाम की रहने वाली मुबीना बानो और उसके कई अन्य साथियों के नाम सामने आए. पुलिस और जांच एजेंसियों का दावा है कि यह पूरा मॉड्यूल पाकिस्तान में बैठे किसी हैंडलर के इशारे पर काम कर रहा था. इसका मुख्य काम अलगाववादी विचारधारा का प्रचार करना, चुपचाप गुप्त बैठकें करना और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन को अंजाम देना था.

    इस मामले में बांदीपोरा पुलिस स्टेशन में UAPA की धारा 10 और 13 के तहत एफआईआर नंबर 168/2026 दर्ज कर ली गई है.

    गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों के नाम

    • पुलिस द्वारा पकड़े गए सभी आरोपियों की सूची इस प्रकार है-
    • मुबीना बानो - पुत्री गुलाम अहमद डार, निवासी दाचीगाम, बांदीपोरा.
    • वहीद अहमद भट - पुत्र मोहम्मद मकबूल भट, निवासी भट मोहल्ला कचलु काजीपोरा, हंदवाड़ा, कुपवाड़ा.
    • खुशबू जान - पुत्री अब्दुल रशीद शेख, निवासी चेक पंजिगाम, बांदीपोरा.
    • महक जान - पुत्री मोहम्मद सुल्तान शेख, निवासी चेक पंजिगाम, बांदीपोरा.
    • आलिया जान - पुत्री अब्दुल रशीद शेख, निवासी चेक पंजिगाम, बांदीपोरा.
    • इरफान अहमद रेशी उर्फ रईस - पुत्र गुलाम नबी रेशी, निवासी अननवान, हंदवाड़ा.

    महिलाओं को आगे रखने की थी खास रणनीति

    जांच में यह बात सामने आई है कि यह मॉड्यूल मुख्य रूप से महिलाओं को अपने प्रचार-प्रसार यानी प्रोपेगैंडा से जोड़ने पर फोकस कर रहा था. चूंकि एक ही इलाके से कई महिलाओं के शामिल होने की बात सामने आई है, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह एक सोची-समझी रणनीति थी.

    किसी को शक न हो इसलिए महिलाओं को दी कमान

    अलगाववादी संदेशों को फैलाने और लॉजिस्टिक (रसद या अन्य जरूरी मदद) सहायता जुटाने के लिए महिलाओं को इसलिए आगे किया जा रहा था ताकि किसी को शक न हो और यह नेटवर्क आसानी से सुरक्षा बलों की नजरों से बचकर काम कर सके. इसके अलावा, ये लोग अपने निजी रिश्तों और जेल के अंदर बंद अपने संपर्कों का इस्तेमाल करके आपस में बातचीत और गतिविधियों के रास्ते खुले रखे हुए थे.

    यह भी पढ़ेंः 'जम्मू-कश्मीर हमारा था, है और रहेगा...' OIC के प्रस्ताव पर भारत का पलटवार, पाक को दिखाया आईना!

    सीमा पार से फंडिंग और जेल नेटवर्क की जांच

    अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले के कई पहलू बेहद गंभीर हैं. जांच में पाकिस्तान से मिलने वाली संदिग्ध फंडिंग (पैसों के स्रोत), जेल के अंदर बैठे लोगों के साथ तालमेल और पहले की गई कार्रवाई के बाद भी इस नेटवर्क को दोबारा जिंदा करने की कोशिशों के पुख्ता सबूत मिले हैं. सुरक्षा बल अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस मॉड्यूल का दायरा आखिर कहां-कहां तक फैला हुआ है. इसके साथ ही, फंड कहां से आ रहा था और निर्देश किस तरह दिए जा रहे थे, इसकी भी गहराई से जांच की जा रही है.

    सुरक्षा एजेंसियों का अगला कदम

    इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में सुरक्षा बलों ने अपनी चौकसी और कार्रवाई दोनों तेज कर दी हैं. खुफिया इनपुट के आधार पर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और उन सभी 'ओवरग्राउंड' (खुले तौर पर सक्रिय) व 'अंडरग्राउंड' (छिपे हुए) नेटवर्क्स पर पैनी नजर रखी जा रही है जो इस तरह की गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं. पुलिस का कहना है कि इस तरह के छोटे दिखने वाले मॉड्यूल भी समाज के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं, क्योंकि ये अक्सर पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों का गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं और जेलों को अपने संपर्क का केंद्र बनाते हैं.

    हालिया गिरफ्तारियां इस बात का साफ संदेश देती हैं कि सुरक्षा एजेंसियां प्रतिबंधित संगठनों को सिर उठाने से रोकने और युवाओं या महिलाओं को गलत विचारधारा का शिकार बनने से बचाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं. मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से जारी है.

    यह भी पढ़ेंः जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क पर सुरक्षाबलों का प्रहार, तुर्किये की पिस्तौल और IED संग 2 संदिग्ध गिरफ्तार
     

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    Jammu Kashmir News