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तमिलनाडु की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया. द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोयामोझी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. यह कार्रवाई निजी स्कूलों की मान्यता और प्रशासनिक मंजूरियों के बदले लगभग 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के सिलसिले में की गई है.
अदालत से झटका मिलने के तुरंत बाद ही महेश की गिरफ्तारी हुई. मद्रास उच्च न्यायालय ने इस मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके कुछ ही समय बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. इस मामले को लेकर तमिलनाडु के गृह मंत्री ने भी कड़ाई बरतते हुए कहा, 'कानून से ऊपर कोई नहीं है.'
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने सोमवार को एक जज के 17 वर्षीय बेटे से जुड़ी मर्सिडीज-बेंज की जानलेवा दुर्घटना के मामले में कड़ी कार्रवाई करने का संकल्प लिया. उन्होंने कहा कि 'कानून से ऊपर कोई नहीं है' और चेतावनी दी कि न तो उस नाबालिग को और न ही उसके पिता को कोई विशेष रियायत दी जाएगी.
अनबिल महेश को ग्रेटर चेन्नई पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने गिरफ्तार किया है. सीसीबी इस बात की जांच कर रही है कि क्या निजी स्कूल प्रबंधनों से स्थाई मान्यता और अन्य जरूरी प्रशासनिक कागजात जारी करने के बदले अवैध तरीके से पैसे वसूले गए थे. जांच एजेंसी का मानना है कि इस पूरे मामले में व्यवस्थित तरीके से लेनदेन हुआ था, जिसके तार सीधे शिक्षा मंत्रालय के कुछ फैसलों से जुड़े हो सकते हैं.
मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, अनबिल महेश पर आरोप है कि उन्होंने 2021 से 2026 तक स्कूल शिक्षा मंत्री के पद पर रहते हुए 1,000 से भी अधिक निजी स्कूलों के प्रबंधकों से पैसे लिए. दावा किया जा रहा है कि यह रकम 'पार्टी फंड' के नाम पर एकत्र की गई थी. इसके बदले में निजी शैक्षणिक संस्थानों को स्थाई मान्यता (Permanent Recognition) और अन्य वैधानिक क्लीयरेंस आसानी से दिए गए. चेन्नई पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है. फिलहाल एजेंसी इन सभी आरोपों की गहराई से पड़ताल कर रही है.
मामले की गंभीरता और बड़े वित्तीय लेन-देन को देखते हुए अब केंद्रीय एजेंसी की भी इसमें एंट्री हो चुकी है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत एक अलग मामला दर्ज कर लिया है. ईडी की टीम मुख्य रूप से उस पैसों के लेनदेन की जांच करेगी, जो निजी स्कूलों से कथित तौर पर वसूले गए थे. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घोटाले की रकम को कहां और किस तरह ठिकाने लगाया गया या इन्वेस्ट किया गया.
यह पूरा विवाद तमिलनाडु के निजी स्कूलों को मान्यता देने और उनसे जुड़े प्रशासनिक नियमों में हुए कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है. जब मद्रास उच्च न्यायालय ने महेश को गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार कर दिया, तो उनके पास कानूनी विकल्प सीमित हो गए और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की. इस गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति में गरमा-गर्मी बढ़ गई है. जहां जांच एजेंसियां सबूत जुटाने और पैसों के सही आंकड़े का पता लगाने में जुटी हैं, वहीं आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी कई और परतें खुलने की संभावना जताई जा रही है.