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जर्मनी से लेकर दिल्ली तक उस वक्त हड़कंप मच गया था, जब बुधवार (14 अक्टूबर) को एअर इंडिया की फ्रैंकफर्ट-दिल्ली फ्लाइट से अचानक विमान हाईजैक होने का संकेत देने वाला कोड 7500 (Squawk Code 7500) प्रसारित हो गया. विमान के पायलट ने इस तरह के संदेश भेजने से साफ इनकार किया. इसके बावजूद सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत फ्लाइट को तुरंत जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतारा गया और पूरे विमान की तलाशी ली गई. अब इस घटना की जांच रिपोर्ट भी सामने आ गई है. जांच में ATC सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी से इस तरह का मैसेज प्रसारित होने की बात सामने आई है.
अफवाह से मच गया था हड़कंप
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्लाइट AI 2030 के दोनों पायलटों ने हाइजैक की सूचना देने वाला कोड '7500' (Squawk Code 7500) को दर्ज करने से साफ इनकार किया है. मुंबई ATC को जब यह संदेश मिला था, तो उन्होंने तुरंत पायलट से संपर्क किया था. उस वक्त भी पायलट ने इस तरह का कोड फीड करने से इनकार कर दिया था. उन्होंने साफ कहा था कि विमान में सुरक्षा से संबंधित कोई भी दिक्कत नहीं है. इसके बाद भी मुंबई ATC ने फ्लाइट को जयपुर डायवर्ट कर दिया था. जहां पर उसकी सघन जांच की गई थी. इस दौरान विमान में सवार यात्रियों को काफी इंतजार करना पड़ा था. चेकिंग के बाद विमान को दिल्ली रवाना कर दिया गया था.
गलत चेतावनी क्यों मिली, इसकी जांच अब एविएशन और सिक्योरिटी एजेंसियां कर रही हैं. उधर, बोइंग 787 पायलटों के अनुसार विमान हाइजैक का संदेश देने वाला कोड (7500) दर्ज होने की संभावनाएं 10 खरब में से एक होती है. उन्होंने बताया कि यह कोड हाथ से उसी तरह से फीड किया जाता है, जैसे कीपैड वाले मोबाइल पर नंबर डायल किया जाता है. इस तरह से इसमें गलती की संभावना काफी कम होती है. सूत्रों के मुताबिक, ATC सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी के चलते विमान से इस तरह का मैसेज प्रसारित हो गया था.
क्या है ATC सॉफ्टवेयर?
आसमान में विमानों को कंट्रोल करने के लिए इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है. इस सॉफ्टवेयर की मदद से ही जहाजों को आवाजाही को मॉनिटर और नियंत्रित किया जाता है. ये सिस्टम रडार डेटा, संचार और स्वचालन को संयोजित करता है, जिससे कि सुचारू और सुरक्षित हवाई क्षेत्र प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके. एक तरह से आसमान में यह ट्रैफिक पुलिस की भूमिका निभाता है. इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके विमानों के रूट की पूरी जानकारी रखी जाती है. किस रूट पर कितने विमान हैं और उनमें कितनी दूरी है, इसे भी देखा जा सकता है. इस सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से ही पूरा एयर ट्रैफिक कंट्रोल किया जाता है.
ATC सॉफ्टवेयर कैसे करता है काम?
जानकारी के मुताबिक, कोई भी विमान अपनी उड़ान शुरू करने से पहले ATC (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) के पास अपना पूरा रूट और टाइम टेबल भेजता है. स्थानीय ATC स्टेशन से उड़ान भरने की इजाजत मिलने के बाद विमान रनवे पर आता है और उड़ान भरता है. टेकऑफ के लिए भी उसे इजाजत लेनी पड़ती है. विमान की मूवमेंट को भी एटीसी स्टेशन ही संभालता है और उसके टेक ऑफ लैंडिंग की मंजूरी देता है. रडार और रेडियो के जरिए विमान की हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है और इस तरह से दो विमानों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखी जाती है.