सर्दियों में होगा डबल अटैक! प्रदूषण से खांसी-जुकाम के बीच बढ़ा फ्लू का खतरा, US में तेजी से बढ़ रहे H1N1 के मामले
अमेरिका में फ्लू के बढ़ते मामलों और H1N1 वायरस में नए म्यूटेशन ने चिंता बढ़ाई है. भारत में सर्दियों के दौरान फ्लू के साथ प्रदूषण भी सांस संबंधी परेशानियां बढ़ा सकता है. हालांकि, नए स्ट्रेन के भारत में फैलने की पुष्टि नहीं हुई है.
भारत में जैसे-जैसे सर्दी का मौसम नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे फ्लू का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. यह खतरा इसलिए ज्यादा बढ़ गया है, क्योंकि विदेशों से इन्फ्लुएंजा के नए म्यूटेशन की खबरें तेजी के साथ आ रही हैं. सर्दियों के मौसम में भारत के अंदर सांस से जुड़ा संक्रमण फैलने की आशंका रहती है, ऐसे में किसी भी देश में नया स्ट्रेन फैलने पर उसकी निगरानी, वैक्सीन, असर और उपायों को समझना जरूरी है.
अमेरिका में 2026-27 का फ्लू सीजन सामान्य से अधिक दिखाई दे रहा है. वहां के पश्चिमी तटीय इलाकों में फ्लू के मामले बढ़ने लगे हैं. अमेरिकी स्वास्थ्य अफसरों के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्टों के मुताबिक, इस बार H1N1 फ्लू वायरस प्रमुखता से सामने आया है. यह वही वायरस है जो 2009 में महामारी साबित हुआ था.
अमेरिका में कितना है असर?
अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) को रिपोर्ट किए गए 300 फ्लू वायरस सैंपल में से 242 H1N1 के थे. 10 अक्टूबर 2026 तक फ्लू की जांच कराने वाले लोगों में पॉजिटिव पाए गए सैंपलों की दर 9.65% थी. पिछले दो सीजन में इसी अवधि के दौरान यह दर 1 फीसद से कुछ ज्यादा थी. इसके अलावा यूटा में 11 अक्टूबर तक वहां इन्फ्लुएंजा A के 242 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल इसी समय 10 मामले थे.
वैसे तो H1N1 वही इन्फ्लुएंजा है, जो 2009 में स्वाइन फ्लू महामारी की प्रमुख वजह बना था. अमेरिका के अंदर H1N1 वायरस में G155E नाम का म्यूटेशन देखा गया है. यह पिछले वेरिएंट के हिसाब से नया है. इसमें आए बदलाव को लेकर वैज्ञानिकों को चिंता है कि कहीं लोगों के शरीर में पहले से बनी प्रतिरक्षा का असर को तो नहीं हो रहा है. खास तौर पर किशोरों और युवाओं में इस बदलाव का असर समझने के लिए और रिसर्च की जरूरत है.
नए वेरिएंट के लिए रिसर्च क्यों हो जरूरी
रिसर्च इसलिए जरूरी है, क्योंकि यह भी देखना होगा कि अभी जो वैक्सीन मौजूद हैं, क्या वो इसके खिलाफ काम कर पाएंगी? रॉयटर्स के मुताबिक फ्लू सीजन के लिए तैयार वैक्सीन में H1N1, H3N2 और इन्फ्लुएंजा B के एक स्ट्रेन को शामिल किया गया है. वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि वैक्सीन में शामिल वायरस के स्वरूप और वास्तविक रूप से फैल रहे वायरस में कितना अंतर है.
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अमेरिका में विशेषज्ञों ने कहा है कि वैक्सीन के दो घटक वहां फैल रहे वायरस से अच्छी तरह मेल खाते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, H1N1 में सामने आए नए म्यूटेशन का प्रतिरक्षा पर क्या असर पड़ेगा, इस पर अध्ययन जारी है. इसलिए केवल म्यूटेशन सामने आने से यह नतीजा नहीं निकालना चाहिए कि फ्लू की वैक्सीन बेअसर हो गई है. बुजुर्ग, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को फ्लू वैक्सीन के बारे में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
भारत में कैसे फैल सकता है फ्लू
अब अगर बात करें कि भारत में यह वायरस कैसे फैल सकता है? तो इसका एक और चर्चित वजह है विदेशी दौरे. अगर विदेश से कोई संक्रमित व्यक्ति भारत आता है, तो उसके जरिए वायरस की एंट्री भारत में हो सकती है. हालांकि, अभी तक इस तरह के वायरस की कोई जिक्र करने लायक खबर सामने नहीं आई है. फिलहाल भारत को इस वायरस के मामलों की निगरानी करते रहनी चाहिए.
फ्लू से बचने के लिए क्या करें?
- लगातार हाथ धोएं और खांसते या छींकते समय मुंह ढकें.
- बीमार होने पर घर पर रहें और दूसरों के संपर्क में कम आएं.
- फ्लू वैक्सीन के बारे में डॉक्टर से सलाह लें.
- प्रदूषण बढ़ने पर बाहर की गतिविधियां सीमित करें.
- सांस लेने में परेशानी, सीने में लगातार दर्द या हालत बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें.
- बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवाएं न लें.