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हिमाचल के 177 सरकारी स्कूल बिना अपने भवन के, कहीं विश्राम गृह तो कहीं पंचायत भवन में लग रही कक्षाएं?

हिमाचल प्रदेश में 177 सरकारी स्कूल अभी भी अपने भवन के बिना चल रहे हैं. छात्र कहीं विश्राम गृह, सामुदायिक केंद्र, पंचायत भवन तो कहीं निजी परिसरों में पढ़ने को मजबूर हैं. वहीं पिछले तीन वर्षों में राज्य के 1,526 स्कूल बंद किए गए हैं. जानिए शिक्षा विभाग के आंकड़ों में क्या सामने आया?

Written By Gaurav Pandey
Published: Sep 04, 2026, 11:14 PM IST | Updated: Sep 04, 2026, 11:17 PM IST
Image Credit: हिमाचल के 177 स्कूलों के पास अपना भवन क्यों नहीं?
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हिमाचल प्रदेश में 177 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास वर्तमान में अपना भवन नहीं है. इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कक्षाएं वैकल्पिक स्थानों पर संचालित की जा रही हैं. कहीं दूसरे सरकारी स्कूलों की इमारत का इस्तेमाल हो रहा है, तो कहीं विश्राम गृह, सामुदायिक केंद्र, महिला मंडल भवन, पंचायत भवन और निजी परिसरों में पढ़ाई कराई जा रही है.

यह जानकारी राज्य के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में दी. उन्होंने यह आंकड़े भाजपा विधायक इंद्र दत्त लखनपाल के सवाल के जवाब में साझा किए. यह जानकारी विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन सामने आई.

छात्र आखिर कहां पढ़ रहे हैं?

बिना अपने भवन वाले स्कूलों को चलाने के लिए शिक्षा विभाग अलग-अलग वैकल्पिक परिसरों का इस्तेमाल कर रहा है. इनमें अन्य सरकारी स्कूलों की इमारतें, निजी भवन, विश्राम गृह, सामुदायिक केंद्र, महिला मंडल भवन और पंचायत भवन शामिल हैं.

शिक्षा मंत्री के अनुसार, इनमें से 12 स्कूलों को प्राकृतिक आपदाओं के बाद असुरक्षित घोषित किया गया था. ऐसे स्कूलों को विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ा.

चंबा का स्कूल किस हालत में है?

इस स्थिति का एक उदाहरण चंबा जिले के कुनरा स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का है. आपदा के बाद स्कूल के मूल भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया गया था. इसके बाद विद्यालय को लोक निर्माण विभाग के एक विश्राम गृह में स्थानांतरित करना पड़ा.

फिलहाल स्कूल इसी विश्राम गृह के चार कमरों से संचालित हो रहा है और यहां 99 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं. सरकार ने नए भवन के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. हालांकि, नए भवन का निर्माण कब तक पूरा होगा, इसकी कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है.

नए स्कूल भवनों में देरी क्यों हो रही है?

सरकार के अनुसार, राज्य में 28 स्कूल भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि 14 अन्य भवनों के लिए धनराशि जारी की जा चुकी है. इसके बावजूद कई स्कूल भवनों का काम आगे नहीं बढ़ पाया है.

इसका सबसे बड़ा कारण जमीन की उपलब्धता और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया बताई गई है. कई स्कूलों के लिए उपयुक्त जमीन मिलना ही बड़ी चुनौती बन गया है. पहाड़ी राज्य होने के कारण जमीन की भौगोलिक स्थिति, उपलब्धता और अधिग्रहण की प्रक्रिया स्कूल भवन निर्माण को प्रभावित कर सकती है.

तीन साल में कितने स्कूल बंद हुए?

विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के दौरान 1,526 स्कूल बंद किए गए. इनमें से 1,473 बंद स्कूलों के भवन शिक्षा विभाग के स्वामित्व में हैं.

शिक्षा मंत्री ने बताया कि इन भवनों में से 577 भवनों को अन्य विभागों या सामुदायिक संस्थाओं को सौंप दिया गया है. इसका उद्देश्य बंद पड़े सरकारी भवनों का दूसरे सार्वजनिक कार्यों के लिए इस्तेमाल करना है.

बंद स्कूलों के भवनों का क्या हुआ?

बंद किए गए स्कूलों के भवनों का इस्तेमाल अब अलग-अलग सार्वजनिक सेवाओं के लिए किया जा रहा है. इनका उपयोग पंचायती राज संस्थाओं, महिला मंडलों, युवक मंडलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य सेवाओं, आयुष सेवाओं, पशुपालन विभाग, पर्यावरण संबंधी गतिविधियों और मंदिर समितियों के लिए किया जा रहा है.

इससे यह सामने आता है कि स्कूल बंद होने के बाद उनके भवन पूरी तरह बेकार नहीं पड़े हैं. कई इमारतों को स्थानीय प्रशासन और समुदाय की जरूरतों के अनुसार दूसरी सार्वजनिक सेवाओं से जोड़ा गया है.

53 स्कूलों का भवन कहां है?

आंकड़ों के मुताबिक, बंद किए गए स्कूलों में से 53 स्कूल पहले निजी या किराये के परिसरों में संचालित होते थे. इसलिए इन स्कूलों से संबंधित कोई सरकारी भवन शिक्षा विभाग के पास नहीं है.

यह स्थिति स्कूलों के भवनों से जुड़े आंकड़ों को समझने में महत्वपूर्ण है, क्योंकि सभी बंद स्कूलों के पास सरकारी स्वामित्व वाली इमारत होना जरूरी नहीं है.

असली चुनौती क्या सामने आती है?

हिमाचल प्रदेश के ये आंकड़े शिक्षा व्यवस्था के सामने दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाते हैं. एक ओर पिछले तीन वर्षों में बंद हुए स्कूलों के 1,473 सरकारी भवनों में से कई का दूसरे सार्वजनिक कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. दूसरी ओर राज्य में 177 स्कूल अभी भी अपने स्थायी भवन की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

इस स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण सवाल केवल स्कूलों की संख्या या भवनों की उपलब्धता का नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और स्थायी शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने का है. खासकर प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में नए भवनों का समय पर निर्माण और उपयुक्त भूमि की उपलब्धता शिक्षा के बुनियादी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है.

 

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About the Author

Gaurav is a multimedia journalist writing across a wide range of subjects, including politics, sports, cinema, explainers, opinion and Delhi Haryana civic issues. With analysis, he regularly covers social issues and public policy through in-depth. With around nine years of experience, he has worked with India Today, Hindustan Times, and Network18, producing stories with a strong focus on facts and ground reality. He studied journalism at IIMC Delhi.
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