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Gurugram Traffic Jam: गुरुग्राम में बारिश का मतलब सिर्फ सुहावना मौसम नहीं है. थोड़ी देर की तेज़ बारिश से भी शहर की सड़कों पर पानी भर जाता है और ट्रैफिक जाम लग जाता है. शुक्रवार को भी ऐसी ही हालत देखने को मिली. गुरुग्राम में एक घंटे में 36 mm बारिश हुई, जिससे कई इलाकों में पानी भर गया. शाम तक दिल्ली और गुरुग्राम के बीच करीब 12 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया. ऐसे में समस्या से निटपने की बजाय JE मनोज ड्यूटी से नदारद हो गए. फोन भी बंद कर दिया. इसकी सूचना मिलते ही निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने जेई को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। हल्की बारिश के बाद गुरुग्राम में क्यों लग जाता है लंबा जाम? समझें 5 बड़े कारण
गुरुग्राम में लगा 12KM लंबा जाम
हरियाणा में गुरुग्राम और अंबाला समेत छह ज़िलों में बारिश हुई. गुरुग्राम में शाम 4 बजे से 5 बजे के बीच एक घंटे में 36 mm बारिश रिकॉर्ड की गई. इतने कम समय में हुई तेज बारिश से शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया. सेक्टर 15, सेक्टर 22, सेक्टर 31 और मानेसर सेक्टर 5 में सड़कों पर पानी जमा हो गया. गुरुग्राम से सटे यशोभूमि मेट्रो स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर भी बारिश का पानी आ गया.
बारिश के बाद ट्रैफिक की हालत भी खराब हो गई. शाम करीब 7 बजे तक दिल्ली के महिपालपुर से गुरुग्राम के राजीव चौक तक NH-48 पर करीब 12 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया. गाड़ियां रेंगती हुई दिखाई दी. हालात को देखते हुए पुलिस को रूट डायवर्ट करना पड़ा.
बारिश के बाद गुरुग्राम में लंबा ट्रैफिक जाम क्यों लग जाता है?
1. कम समय में भारी बारिश से सड़कें 'तालाब' बन जाती हैं
गुरुग्राम में समस्या सिर्फ बारिश की मात्रा नहीं है, बल्कि कम समय में बहुत ज्यादा बारिश भी है. जब कम समय में बहुत ज्यादा पानी गिरता है तो इससे सड़कों और ड्रेनेज सिस्टम पर अचानक दबाव बढ़ जाता है. अगर पानी तुरंत नहीं निकलता (पानी की निकासी) है तो सड़क पर पानी भर जाता है. इससे गाड़ियों की स्पीड धीमी हो जाती है और कुछ जगहों पर इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है.
2. पानी भरने से सड़क की कैपेसिटी कम हो जाती है
जिन सड़कों पर आमतौर पर कई लेन में आसानी से चलती हैं, वहां पानी भरने से ड्राइवर धीरे गाड़ी चलाते हैं. कई लोग पानी से बचने के लिए दूसरी लेन में चले जाते हैं. इससे गाड़ियों की दूरी और लेन डिसिप्लिन पर असर पड़ता है. नतीजतन, थोड़ी दूरी से शुरू होने वाला ट्रैफिक जाम धीरे-धीरे कई किलोमीटर तक फैल जाता है.
3. एक इलाके में पानी भरने से पूरे रास्ते पर असर पड़ता है
गुरुग्राम की कई मुख्य सड़कें और हाईवे आपस में जुड़े हुए हैं. एक इलाके में पानी भरने या धीमा ट्रैफिक पीछे चल रही गाड़ियों पर भी असर डाल सकता है. इसीलिए एक सेक्टर या सर्विस रोड पर शुरू होने वाली समस्या तेज़ी से मेन रोड और हाईवे तक फैल सकती है.
4. बारिश के दौरान ड्राइवर अचानक रास्ता बदल लेते हैं
जब बारिश तेज हो जाती है तो कई ड्राइवर पानी से भरी सड़क से बचने के लिए अचानक दूसरी सड़क या लेन पर मुड़ जाते हैं. इससे पहले से ही बिजी सड़कों पर ट्रैफिक जाम और बढ़ जाता है. इसके अलावा, कई जगहों पर गाड़ियां धीमी हो जाती हैं या रुक जाती हैं, जिससे पीछे चल रही गाड़ियों की लाइन और लंबी हो जाती है.
5. जब बारिश और पीक आवर्स एक साथ हो तो समस्या और भी बढ़ जाती है
गुरुग्राम में दिल्ली आने-जाने वाली गाड़ियों की संख्या बहुत ज्यादा होती है. अगर शाम के समय यानी की पीक आवर्स के आसपास बारिश होती है तो सड़क पर पहले से मौजूद ट्रैफिक में पानी भरने की समस्या और बढ़ जाती है. इसका मतलब है कि एक तरफ गाड़ियां ज्यादा होती हैं और दूसरी तरफ उनकी स्पीड कम हो जाती है. यह कॉम्बिनेशन लंबे ट्रैफिक जाम का सबसे बड़ा कारण है.
12 किलोमीटर का जाम कैसे लगता है?
इसे आसान शब्दों में समझते हैं. सोचिए कि सड़क के एक हिस्से पर पानी भरने से गाड़ियों की स्पीड आधी हो जाती है. सड़क पार करने में ज्यादा समय लगेगा. पीछे से लगातार नई गाड़ियां आती रहेंगी. कुछ देर बाद पानी भरे हिस्से से गाड़ियों की लाइन पीछे की ओर बढ़ने लगेगी. अगर यह सड़क किसी बड़े हाईवे से जुड़ी हो तो जाम का असर और भी ज्यादा हो सकता है. शुक्रवार को बारिश के बाद गुरुग्राम में भी ऐसा ही असर देखा गया, जब NH-48 पर दिल्ली के महिपालपुर से राजीव चौक तक 12 किलोमीटर लंबा जाम लग गया.
क्या सिर्फ बारिश ही ट्रैफिक लगने की मुख्य वजह है?
नहीं. बारिश अक्सर मौजूदा ट्रैफिक और सड़क की ड्रेनेज की समस्याओं को और बढ़ा देती है. अगर पानी जल्दी निकल जाए तो बारिश के बावजूद ट्रैफिक नॉर्मल रह सकता है. मगर जब भारी बारिश, पानी भरना, पीक-टाइम ट्रैफिक और गाड़ियों की धीमी स्पीड एक साथ आती है तो ट्रैफिक जाम जल्दी ही लंबा हो जाता है.
गुरुग्राम में बारिश के बाद ट्रैफिक जाम से कैसे बचें?
बारिश के दौरान घर से निकलने से पहले ट्रैफिक अपडेट चेक करना, पानी भरी सड़कों से बचना और दूसरे रास्तों का इस्तेमाल करना मददगार हो सकता है. इस बीच, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम, पानी भरे इलाकों की पहचान करना और बारिश के दौरान ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे उपाय एडमिनिस्ट्रेशन के लिए बहुत जरूरी हैं.