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Jhajjar News: कहते हैं अगर हौसले बुलंद हों तो अंधेरे में भी रास्ते अपने आप बन जाते हैं. हरियाणा के रोहतक के रहने वाले हिमांशु नांदल ने इस बात को सच साबित कर दिया है. जन्म से दृष्टिबाधित हिमांशु ने पानी की लहरों को अपनी दुनिया बनाया है और आज वे भारत के उभरते हुए पैरा स्विमिंग स्टार बन चुके हैं. हिमांशु 18 अक्टूबर से जापान में होने वाले एशियन पैरा गेम्स में देश के लिए मैडल जीतने का काम करने वाले हैं.
हरियाणा के रोहतक के दृष्टिबाधित तैराक हिमांशु नांदल, एक ऐसा नाम जो आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है. जन्म से दृष्टिबाधित हिमांशु ने साल 2021 में जूडो से कदम निकालकर पैरा स्विमिंग की दुनिया में कदम रखा. पैरा स्वीमिंग की एस इलेवन कैटेगरी में अपनी अलग पहचान स्थापित की. स्विमिंग ने उन्हें वह आजादी दी जिसकी उन्हें तलाश थी. साल 2022 की पहली ही राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक और नेशनल रिकॉर्ड बनाकर उन्होंने बता दिया कि वे लंबी रेस के घोड़े हैं. साल 2023 में चीन के हांगझोउ में हुए चैथे एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले हिमांशु ने फाइनलिस्ट बनकर देश का मान बढ़ाया. हिमांशु ने साल 2024 में पेरिस पैरालंपिक गेम्स के लिए मिनिमम क्वालिफिकेशन स्टैंडर्ड हासिल किया और ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय ब्लाइंड तैराक बने. कोटा सीमाओं के चलते भले ही वे पेरिस में प्रतिस्पर्धा न कर पाए हों, लेकिन यह मील का पत्थर उनके बुलंद हौसलों की गवाही देता है.
लेकिन हिमांशु का हौसला और हौसलों की उड़ान का सिलसिला यहीं नहीं रुका. साल 2025 में सिंगापुर में हुई वल्र्ड पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में वे दो इवेंट्स के फाइनलिस्ट रहे. इसके बाद हैदराबाद नेशनल पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप 2025 में तो हिमांशु छा गए. उन्होंने 50 मीटर फ्रीस्टाइल, 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 100 मीटर बैकस्ट्रोक में शानदार स्वर्ण पदक जीते और नेशनल रिकॉर्ड बनाते हुए बेस्ट स्विमर का खिताब अपने नाम किया. हिमांशु स्पोर्टस मैनेजमैंट में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं. स्नातक परीक्षा पास कर चुके हैं और आगे चलकर पोस्ट ग्रैजुएशन भी करना चाहते हैं.
इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी
मेहनतए उनके माता पिता का संघर्ष और उनके कोच रणबीर शर्मा का सटीक मार्गदर्शन है. एक दृष्टिबाधित तैराक के लिए पूल में सही दिशा बनाए रखना, टन्र्स और रिदम बहुत कठिन होता है, लेकिन कोच की एडेप्टिव तकनीकों और हिमांशु के समर्पण ने हर नामुमकिन चुनौती को मुमकिन बना दिया.
हिमांशु के पिता बलवान हरियाणा के मुख्यमंत्री की सुरक्षा टीम में पुलिस अधिकारी हैं. अपने व्यस्त शिड्यूल के बीच वो अपने बेटे का साथ देने के लिए देश और विदेशों में भी साथ रहे. उनका मानना है कि हर बच्चा भगवान की दी हुई विशेष योग्यताओं के साथ आता है और माता पिता को अपने बच्चे के साथ हर परिस्थित में खड़े रहना चाहिए. हिमांशु की विजय यात्रा में सरकार की तरफ से यथासंभव सहयोग नही मिला. पैरिस ओलम्पिक का क्वालिफिकेशन मार्क पार करने के बावजूद उन्हे खिलाड़ियों की टॉप स्कीम तक में शामिल नही किया गया. उनका कहना है कि एक खिलाड़ी की तैयारियों के दौर में सरकारों का आगे आना चाहिए .
अब हिमांशु की नजरें इसी महीने जापान में होने वाले एशियन पैरा गेम्स और लॉस एंजिल्स 2028 पैरालंपिक्स पर टिकी हैं. एशियन गेम्स के लिए हिमांशु हर रोज बहादुरगढ की एचएल सिटी स्थित चैम्पियन्स स्पोर्टस एकेडमी में स्वीमिंग पूल में तैयारियां कर रहा है. हरियाणा ओलम्पिक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और हरियाणा तैराकी संघ के महासचिव अनिल खत्री ने भी हिमांशु का हौसला बढ़ाया है. उन्होंने कहा कि हिमांशु हरियाणा की नही बल्कि देश की धरोहर है और इस बार हिमांशु एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जरूर जीतकर लाएगा. हिमांशु जापान में होने वाले एशियन गेम्स में 50, 100 और 400 मीटर फ्री स्टाईल में साथ 100 मीटर बैकस्ट्रॉक, 100 मीटर ब्रैस्टस्ट्रॉक और 200 मीटर आईएम स्पर्धा में मैडल हासिल करने के लिए तैरने वाले हैं. हिमांशु ने साबित कर दिया है कि मंजिल देखने के लिए आंखें नहीं, बल्कि मजबूत इरादे और पक्का विश्वास चाहिए. पानी में उतरते वक्त उन्हें रास्ता दिखाई नहीं देता, वे उसे महसूस करते हैं और अपनी मेहनत से अपनी जीत की लकीर खींचते हैं.
(झज्जर से सुमित कुमार की रिपोर्ट)