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जब से श्रद्धा कपूर की अपकमिंग फिल्म ‘ईठा’ का ट्रेलर रिलीज हुआ है, तब से सोशल मीडिया पर उनके किरदार को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है, लेकिन इसके साथ ही इंटरनेट पर एक दिलचस्प बहस ने जोर पकड़ ली है. कई लोगों का मानना है कि फिल्म में श्रद्धा का रोल 2022 में आई आलिया भट्ट की फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में उनके लुक से मिलती जुलती है, लेकिन अगर देखा जाए तो ये सिमिलरिटी सिर्फ ट्रडिशनल लुक या भारी-भरकम स्क्रीन प्रेजेंस की नहीं, बल्कि उस पूरे सिनेमैटिक ताने-बाने की है, जहां एक बेखौफ महिला अपने हक, वजूद और पहचान की लड़ाई पूरी शिद्दत से लड़ती है.
हालांकि, केवल दो या तीन मिनट के ट्रेलर को देखकर दोनों किरदारों को एक जैसा ठहरा देना जल्दबाजी होगी. जहां ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ मुंबई के कमाठीपुरा, अंडरवर्ल्ड और सियासी रसूख से जुड़ी एक प्रभावशाली महिला के जीवन पर आधारित थी. वहीं, श्रद्धा की ‘ईठा’ महाराष्ट्र की जानी-मानी तमाशा और लावणी लोक कलाकार विठाबाई नारायणगावकर के जीवन से इंस्पायर है. इंडिया टुडे और IMDb के मुताबिक, दोनों किरदारों की दुनिया और संघर्ष भले ही जमीन-आसमान जितने जुदा हों, लेकिन सेंटर में एक बेहद ताकतवर फीमेल लीड किरदार होने के चलते ये तुलना नेचुरली हो सकती है.
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ट्रेलर सामने आने के बाद जिस बात ने लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा, वो था श्रद्धा कपूर का एकदम बदला हुआ अंदाज. चटख रंगों वाली ट्रेडिशनल नौवारी साड़ी, चेहरे पर तीखे भाव, मंच पर पूरे कॉन्फिडेंस से भरी मौजूदगी और भारी भीड़ को अपनी एक आवाज से थाम लेने वाले तेवर ने सीधे ऑडियंस को आलिया की ‘गंगूबाई’ की याद दिला दी. कुछ मीडिया ने भी अपनी रिपोर्ट में माना है कि ये इफेक्ट ऑडियंस के जेहन में तुरंत बैठ जाता है.
दोनों फिल्मों की हीरोइनें सिर्फ एक जैसा रोल नहीं निभा रहीं, बल्कि अपने समय की एक मजबूत पहचान बनकर सामने आती हैं. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर लोग इन दोनों को एक ही नजर से देख रहे हैं. हालांकि, इन दोनों महिलाओं ने अपने समय में मेल-डोमिनेंट सिस्टम को सीधी टक्कर दी थी. उन्होंने किसी के आगे घुटने नहीं टेके, बल्कि अपनी शर्तों पर चलकर पूरी दुनिया को अपनी ताकत का लोहा मानने पर मजबूर कर दिया.
दोनों फिल्मों में फीमेल किरदारों को काफी दमदार और बड़े अंदाज में दिखाया गया है. कैमरा वर्क, भारी-भरकम डायलॉग और बैकग्राउंड म्यूजिक, ये सब चीजें ऐसी हैं, जो फिल्म देखने वालों को बिल्कुल एक जैसा अहसास कराती हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पर्दे पर दिखने वाली यही टेक्निक और इमोशनल सिमिलरिटी इस समय सोशल मीडिया पर बहस की सबसे बड़ी वजह बन चुकी है. लोग दोनों की तुलना करके लगातार बात कर रहे हैं.

4 दिंसबर को रिलीज होने वाली फिल्म ‘ईठा’ की कहानी महाराष्ट्र की जानी-मानी लोक कलाकार विठाबाई भाऊ मांग नारायणगावकर की जिंदगी के इंस्पायर है. वो अपने दौर में तमाशा और लावणी की सबसे बड़ी स्टार मानी जाती थीं. उनके हुनर का जादू कुछ ऐसा था कि लोग दूर-दूर से उनका शो देखने खींचे चले आते थे. चाहे पुराने रिकॉर्ड हों या इंटरनेट का डेटा, हर जगह इस बात का जिक्र मिलता है कि मंच पर उनका अलग ही जलवा था और लोग उनकी कला के दीवाने थे.
विठाबाई ने अपनी पहचान उस दौर में बनाई जब पारंपरिक कलाकारों को वो इज्जत और हक नहीं मिलता था, जिसके वो असली हकदार थे. पैसों की भारी तंगी, समाज की पाबंदियों और पर्सनल लाइफ के दर्द के बाद भी उन्होंने कभी स्टेज का साथ नहीं छोड़ा. कला को ही उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कला के लिए इसी सच्चे लगाव ने उन्हें महाराष्ट्र की लोक संस्कृति का ऐसा बड़ा नाम बना दिया, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता.
‘ईठा’ का ट्रेलर देखकर साफ समझ आता है कि इसमें कितना दर्द, जिद्द और कला को लेकर गजब का जुनून भरा है. कहानी एक ऐसी बेखौफ महिला की है, जो हर मुसीबत से लड़कर आखिरकार स्टेज पर अपनी धाक जमा ही लेती है. कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोककला से जुड़े इस कड़े संघर्ष को जिस सच्चाई से दिखाया गया है, वही इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है और यही बात लोगों के दिलों को सीधे छू लेती है. अब देखना ये है कि बड़े पर्दे पर क्या कमाल कर पाती है.

‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ की कहानी मुंबई के कमाठीपुरा इलाके में मिलने वाली ताकत, जुर्म की दुनिया, राजनीति और समाज में अपनी पहचान बनाने की जंग को दिखाती है. इसके उलट, विठाबाई की पूरी जिंदगी लोककला, तमाशा, लोकगीत और अपनी संस्कृति को बचाने के संघर्ष में बीती. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों के हालात, जीने का ढंग और काम करने का दायरा एक-दूसरे से एकदम अलग था. दोनों महिलाओं ने अपनी-अपनी दुनिया में बेहद मुश्किल राह चुनी और अपनी अलग पहचान बनाई.
एक तरफ जहां गंगूबाई ने समाज से ठुकराई गई बेबस औरतों के हक के लिए सरकार से सीधी टक्कर ली, वहीं दूसरी तरफ मराठी लोकडांसर विठाबाई ने ‘तमाशा’ और ‘लावणी’ जैसी लोक कलाओं को देश भर में बड़ा मान-सम्मान दिलाया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों ने अपनी-अपनी जिंदगी में बिल्कुल अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया. यही खास बात दोनों के सफर और उनकी पहचान के बीच का सबसे बड़ा फर्क तय करती है. इसलिए भले ही शख्सियत सेम हो लेकर कहानी अलग है.
ऊपर से देखने पर भले ही दोनों का अंदाज, बेबाक डायलॉग और तेवर एक जैसे लगें, लेकिन अंदर से दोनों की मुश्किलें, सपने और जिंदगी का रास्ता बिल्कुल अलग है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ कुछ सीन्स मिलते-जुलते दिखने की वजह से ‘ईठा’ को ‘गंगूबाई काठियावाडी’ की नकल मान लेना सही नहीं होगा. दोनों का अपना अलग दर्द और बैकग्राउंड है. ऐसे में थोड़े बहुत हाव-भाव देखकर एक फिल्म को दूसरी की हूबहू कॉपी समझ लेना गलत है, क्योंकि पर्दे पर दोनों का सफर असल तरीके से दिखाया गया.
लोग श्रद्धा कपूर को हमेशा से रोमांटिक, मजेदार कॉमेडी या फिर फैमिली ड्रामा रोल में ही देखते आए हैं, लेकिन ‘ईठा’ के ट्रेलर में उनका अंदाज बिल्कुल ही बदल गया है. उनके कपड़े, बात करने का सलीका, चाल-ढाल और चेहरे के एक्सप्रेशंस सब कुछ एकदम फ्रेश और अलग नजर आ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पर्दे पर श्रद्धा का ये नया अवतार लोगों को सच में हैरान करने वाला है, क्योंकि ऐसा संजीदा और हटकर काम उन्होंने अपने पूरे करियर में पहले कभी नहीं किया है.
ट्रेलर में श्रद्धा कपूर एक सधी हुई लावणी डांसर के रोल में पूरी तरह जंच रही हैं. उनके डांस के स्टेप्स, चेहरे के एक्सप्रेशंस और स्टेज पर उनका जबरदस्त जोश देखकर साफ पता चलता है कि उन्होंने इस रोल के लिए कितनी तगड़ी मेहनत की है. उनका ये बिल्कुल अलग और नया अंदाज लोगों को खूब पसंद आ रहा है. सोशल मीडिया पर हर कोई उनके इस कमाल के ट्रांसफॉर्मेशन की तारीफ कर रहा है, जिसे रिपोर्ट्स के मुताबिक, मीडिया में भी काफी सराहा गया है.
फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि ये रोल श्रद्धा के करियर का सबसे बड़ा और दमदार मोड़ साबित हो सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेलर आने के बाद से ही लोग उनके इस नए रूप की जमकर तारीफ कर रहे हैं. हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ लोग उनके काम की तुलना आलिया भट्ट से भी कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी फैंस पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है. लोग पर्दे पर श्रद्धा की ये बेहतरीन अदाकारी देखने के लिए बेहद एक्साइटेड नजर आ रहे हैं.

सोशल मीडिया पर चल रही बातों को अगर दरकिनार करके सच्चाई देखें, तो श्रद्धा कपूर पर आलिया भट्ट की कॉपी करने का आरोप लगाना बिल्कुल गलत है. असल में दोनों ही फिल्में बिलकुल अलग जमाने, अलग माहौल और अलग-अलग सच्ची महिलाओं की जिंदगी पर बनी हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसी भी एक्टर की ऐक्टिंग उसके अपने रोल की जरूरत पर टिकी होती है, न कि किसी दूसरे की कॉपी करने पर. इसलिए दोनों किरदारों की तुलना करना बेमानी है.
सच कहें तो जब भी बॉलीवुड में कोई महिला पर्दे पर बेखौफ और अपनी शर्तों पर जीने वाली दिखाई जाती है, तो लोगों को पुरानी हिट फिल्मों की याद आ ही जाती है. ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ और ‘विठाबाई’ के किरदारों में एक जैसी निडरता और सिस्टम से लड़ने का जज्बा है, जिसकी वजह से लोग दोनों को जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये नई कहानी अपने आप में बिल्कुल फ्रेश और अलग है. इसका ताना-बाना एकदम अलग तरीके से बुना गया है.
ट्रेलर सामने आने के बाद से ही लोगों के बीच इस फिल्म को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है. लोग अब इसे देखने के लिए काफी एक्साइटेड नजर आ रहे हैं और चारों तरफ माहौल भी काफी पॉजिटिव दिख रहा है. ऐसे में अब असली बात तब समझ आएगी, जब ‘ईठा’ सिनेमाघरों में रिलीज होगी. देखने वाली बात ये होगी कि क्या ये फिल्म अपनी कहानी के दम पर कोई नया रिकॉर्ड बना पाएगी, या फिर सोशल मीडिया पर चल रही तुलना ही इसकी कहानी पर भारी पड़ जाएगी.