SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

बॉलीवुड गानों का राज खत्म? सुपरहिट होने के लिए फिल्म की जरूरत नहीं, इंडिपेंडेंट म्यूजिक ने कैसे हिला दिया बी-टाउन का साम्राज्य

कभी फिल्म का एक गाना सुपरहिट होता था तो फिल्म की किस्मत बदल जाती थी, लेकिन अब बिना किसी फिल्म का हिस्सा बने भी गाने करोड़ों लोगों तक पहुंच रहे हैं. आखिर बॉलीवुड के म्यूजिक का दबदबा कम हो रहा है या म्यूजिक इंडस्ट्री का पूरा खेल ही बदल गया है?

Written By Alkesh Kushwaha
Published: Oct 12, 2026, 10:35 AM IST | Updated: Oct 12, 2026, 02:49 PM IST
Image Credit: क्या इंडिपेंडेंट सिंगर्स बॉलीवुड म्यूजिक का खत्म कर रहे हैं दबदबा? (AI Image)
Join

एक वक्त था जब किसी भी फिल्म के हिट होने की गारंटी उसके गानों से तय होती थी. फिल्म के रिलीज होने से महीनों पहले रेडियो पर बजते गाने और म्यूजिक चैनल्स पर चलते वीडियो लोगों की जुबान पर चढ़ जाते थे. लेकिन आज माहौल बिल्कुल बदल चुका है. अब किसी गाने को करोड़ों दिलों तक पहुंचने के लिए किसी करोड़ों के बजट वाली फिल्म की जरूरत नहीं है.

आज एक कमरे में बैठकर गिटार बजाता हुआ नया लड़का या अपनी धुनों से रील्स पर छाने वाला इंडी आर्टिस्ट बॉलीवुड के बड़े-बड़े म्यूजिक लेबल्स को सीधी टक्कर दे रहा है. एपी ढिल्लों, किंग, अनुव जैन, और प्रतीक कुहाड़ जैसे नामों ने बिना किसी बड़े फिल्मी बैनर के वो जादू कर दिखाया है, जिसके बारे में पहले कोई सोच भी नहीं सकता था. तो क्या वाकई बॉलीवुड गानों का राज खत्म हो रहा है या म्यूजिक का पूरा इकोसिस्टम ही बदल गया है?

कभी फिल्मी गानों से चलती थी म्यूजिक इंडस्ट्री

एक समय था जब भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री का मतलब सिर्फ बॉलीवुड हुआ करता था. फिल्म रिलीज से पहले म्यूजिक कैसेट्स और सीडी बिकना शुरू होती थीं. अगर फिल्म के गाने हिट हो गए, तो सिनेमाघर में टिकट खिड़की पर लाइनें लग जाती थीं. मोहम्मद रफी, किशोर कुमार से लेकर सोनू निगम और अरिजीत सिंह तक, सबने फिल्मी गानों के जरिए ही अपने करियर की बुलंदियों को छुआ. लेकिन उस दौर में सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि किसी भी नए सिंगर या कंपोजर को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बॉलीवुड के बड़े प्रोड्यूसर्स और म्यूजिक लेबल्स के चक्कर काटने पड़ते थे. अगर लेबल ने रिजेक्ट कर दिया, तो कलाकार का टैलेंट वहीं दबकर रह जाता था.

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने कैसे बदला पूरा गेम

आज के यूथ को किसी म्यूजिक कंपनी का मोहताज रहने की जरूरत नहीं है. YouTube, Spotify, Apple Music और Instagram Reels ने गानों को सीधे दर्शकों तक पहुंचाने का काम किया है. अब एक आर्टिस्ट अपने बेडरूम में गाना रिकॉर्ड करके उसे ऑनलाइन डिस्ट्रीब्यूट कर सकता है. अगर गाने की वाइब अच्छी है, तो वह बिना किसी फिल्म प्रमोशन के रातों-रात वायरल हो जाता है. सिंगर किंग का 'मान मेरी जान' हो या अनुव जैन का 'बारिशों', इन गानों ने साबित कर दिया कि आज का लिसनर सिर्फ अच्छे कंटेंट और रिलेटेबल लिरिक्स की कद्र करता है, इस बात की नहीं कि गाना किस बड़े स्टार पर शूट हुआ है.


 

मशहूर म्यूजिक कंपोजर सलीम मर्चेंट ने क्या कहा?

मशहूर बॉलीवुड म्यूजिक कंपोजर सलीम मर्चेंट ने भी इस बदलते ट्रेंड पर खुलकर बात की है. उन्होंने जी मीडिया की सिस्टर वेबसाइट बॉलीवुड लाइफ से इंटरव्यू के दौरान जिक्र किया कि कैसे आज बॉलीवुड म्यूजिक लेबल्स और फिल्मों में क्रिएटिव फ्रीडम की कमी आई है. सलीम मर्चेंट के मुताबिक, फिल्मों में रिमेक और री-क्रिएशन का कल्चर इतना बढ़ गया था कि ओरिजिनलिटी पीछे छूट गई. इसी वजह से उन्होंने और कई बड़े आर्टिस्ट्स ने इंडिपेंडेंट म्यूजिक की तरफ रुख किया ताकि वे अपनी मर्जी की धुनें बना सकें. उनका मानना है कि इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट्स आज बिना किसी दबाव के अपनी बात लोगों तक पहुंचा पा रहे हैं और यही वजह है कि पब्लिक भी उनके गानों को ज्यादा पसंद कर रही है.

इंडी आर्टिस्ट्स के पास कमाई के नए रास्ते?

पहले गानों की रॉयल्टी और कमाई का बड़ा हिस्सा म्यूजिक कंपनियों की जेब में जाता था. सिंगर्स को सिर्फ एक फिक्स्ड फीस मिलती थी. लेकिन अब इंडिपेंडेंट म्यूजिक ने इकोनॉमिक्स ही बदल दी है.


 

बॉलीवुड गानों का कंटेंट क्यों पड़ गया फीका?

यूथ के बीच बॉलीवुड गानों का क्रेज कम होने की सबसे बड़ी वजह रिमेक कल्चर रही है. पिछले कुछ सालों में 90 के दशक के हिट गानों को दोबारा री-मिक्स करके फिल्मों में ठूंसा गया, जिससे लिसनर्स ऊब गए. इसके अलावा फिल्मों में गानों की सिचुएशन भी जबरदस्ती की लगने लगी. दूसरी तरफ, इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट्स ऐसे मुद्दे और इमोशंस चुन रहे हैं, जिनसे आज का यूथ तुरंत कनेक्ट कर लेता है. चाहे वो ब्रेकअप का दर्द हो, वन-साइडेड लव हो या लाइफ का स्ट्रगल, इंडी म्यूजिक में सादगी और सच्चापन दिखता है जो आजकल के कमर्शियल बॉलीवुड गानों से गायब है.

सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम रील्स की ताकत

आज किसी गाने का भाग्य तय करने में इंस्टाग्राम रील्स का बहुत बड़ा हाथ है. 15 से 30 सेकंड का एक ट्रेंडिंग ऑडियो पूरे देश में किसी गाने को रातों-रात हिट बना सकता है. इंडिपेंडेंट सिंगर्स इस बात को अच्छे से समझते हैं. वे अपने गानों के हुक-स्टेप्स और हुक-लाइन्स ऐसे डिजाइन करते हैं जो रील्स पर आसानी से फिट हो जाएं. जब लाखों लोग किसी इंडी ट्रैक पर रील्स बनाते हैं, तो वह गाना अपने आप स्पॉटिफाई की टॉप 50 लिस्ट में पहुंच जाता है. इसके लिए अब किसी करोड़ों के बजट वाले फिल्म प्रमोशन की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ती. यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि बॉलीवुड म्यूजिक खत्म हो गया है. जब भी 'पठान', 'जवान' या 'एनिमल' जैसी बड़ी फिल्में आती हैं, तो उनके गाने पूरे देश में बजते हैं. लेकिन अब बॉलीवुड म्यूजिक का एकाधिकार खत्म हो चुका है.

 

फिल्म क्रिटिक अमित भाटिया ने इस टॉपिक पर खुलकर बात की और जी न्यूज के कई सवालों के जवाब दिए-

1. बॉलीवुड फिल्मों के गानों का दबदबा पहले कितना था और आज उसमें क्या बदलाव आया है?

पहले गानों का दबदबा बहुत जबरदस्त था. आज भी पुराने गाने बजते हैं, तो हम तुरंत गुनगुनाने लग जाते हैं, चाहे वो गाना हमने कई साल बाद सुना हो. आज का गाना दो-चार-पांच दिन चलता है, रील पर चलता है, वायरल हो जाता है, उसके बाद अगर दो महीने बाद सुनेंगे ना, कई बार तो आपको याद भी नहीं रहता कि यह कौन सी फिल्म का था. तो बदलाव तो बहुत जबरदस्त तरीके से आया है. अंताक्षरी जब हम खेलते हैं, तो पुराने ही गाने याद आते हैं.  

2. इंडिपेंडेंट म्यूजिक से आखिर क्या मतलब है और यह फिल्मी संगीत से कैसे अलग है?

इंडिपेंडेंट म्यूजिक इसलिए अलग है, क्योंकि वहां पर आपको कोई लेबल नहीं चाहिए. मान लो, कोई बड़ी कंपनी है, वो आपके आगे टर्म्स एंड कंडीशंस रखती है कि इससे जो पैसा आएगा, उसमें हम आपको इतना देंगे, उतना देंगे. इंडिपेंडेंट म्यूजिक में आप अपना म्यूजिक बनाते हैं, अच्छा होगा चल जाएगा, बुरा होगा नहीं चलेगा, उससे जो फायदा होगा, वो भी आपका, उससे जो नुकसान होगा, वो भी आपका. आप अपनी पूरी क्रिएटिविटी उसमें दिखा सकते हैं. फिल्म में एक सिचुएशन के हिसाब से म्यूजिक होगा कि यहां पर रोमांटिक गाना आएगा या यहां पर एक इमोशनल गाना आएगा. इंडिपेंडेंट म्यूजिक में जो है, आर्टिस्ट जो चाहता है, वो बना सकता है.

3. क्या Spotify, YouTube और Instagram Reels ने नए सिंगर्स को बड़े म्यूजिक लेबल पर निर्भर रहने से आजादी दी है?


 

4. आज म्यूजिक कंपनियां फिल्मी गानों पर ज्यादा पैसा लगाती हैं या इंडिपेंडेंट कलाकारों पर?

म्यूजिक कंपनियां अब आर्टिस्ट इंटरनेट पर खोजते हैं और उनको जो इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट अच्छा लगता है या उनको जो कलाकार फायदा पहुंचा सकता है, वो उस पर पैसा लगा देते हैं. म्यूजिक कंपनियों का जहां फायदा होगा, वो वहां पैसा लगाती हैं.  

5. क्या बॉलीवुड में अच्छे गानों की कमी है या दर्शकों की पसंद और गाने सुनने का तरीका बदल गया है?

बॉलीवुड में अच्छे गानों की ही कमी है. बॉलीवुड में अच्छे गाने बन ही नहीं रहे हैं. दर्शकों की पसंद आज भी अच्छी है. अच्छा गाना होगा, तो वो उसे पसंद करते हैं.  

6. आने वाले पांच साल में क्या इंडिपेंडेंट म्यूजिक फिल्मी संगीत को चुनौती देगा, या दोनों एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ेंगे?

इंडिपेंडेंट म्यूजिक ऑलरेडी चुनौती दे चुका है और साथ-साथ बढ़ेंगे, लेकिन इंडिपेंडेंट म्यूजिक आज की डेट में फिल्म म्यूजिक से बहुत आगे निकल गया है.  

म्यूजिक का फ्यूचर किसके हाथ?

म्यूजिक इंडस्ट्री में आया यह बदलाव सिर्फ आर्टिस्ट्स के लिए नहीं, बल्कि गानों को प्यार करने वाले लिसनर्स के लिए भी बहुत बेहतरीन है. अब म्यूजिक का कंट्रोल कुछ बड़े कॉर्पोरेट लेबल्स के हाथ में नहीं, बल्कि सीधे ऑडियंस के हाथ में है. इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट्स का मानना है कि अगर आपके कंटेंट में दम है, तो कोई भी प्लेटफॉर्म आपको हिट होने से नहीं रोक सकता. बॉलीवुड को अगर अपना पुराना मुकाम हासिल करना है, तो उसे रिमेक कल्चर छोड़कर एक बार फिर ओरिजिनल और दिल को छू लेने वाले संगीत पर ध्यान देना होगा. तब तक इंडी म्यूजिक का यह राज यूं ही चलता रहेगा.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

अल्केश कुशवाहा एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव है. वर्तमान में वे जी न्यूज हिंदी में चीफ सब-एडिटर के रूप में बॉलीवुड-वायरल सेक्शन संभाल रहे हैं. अल्केश की मुख्य विशेषज्ञता बॉलीवुड, एंटरटेनमेंट, वायरल सिनेमा ट्रेंड्स और सेलिब्रिटी एक्सक्लूसिव्स में है. साल 2012 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने वाले अल्केश ने दैनिक भास्कर, हिन्दुस्तान टाइम्स, राजस्थान पत्रिका और NDTV जैसे देश के अग्रिम मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. अल्केश ने अपने करियर में अर्जुन रामपाल, ऋचा चड्ढा और राजपाल यादव जैसी कई दिग्गज बॉलीवुड हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यूज किए हैं. फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस एनालिसिस, सेलिब्रिटी गॉसिप्स और एंटरटेनमेंट ट्रेंड्स का इन-डेप्थ डेटा एनालिसिस करना उनका मजबूत पक्ष है. वे पाठकों तक बॉलीवुड जगत की हर छोटी-बड़ी खबर सटीक, निष्पक्ष और विश्लेषणात्मक तरीके से पहुंचाते हैं. आप अल्केश कुशवाहा से सीधे alkesh.kushwaha@zeemedia.com पर संपर्क कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES