द $7 बिलियन गैसोलीन क्राइसिस: क्यों थिएटर्स से भागकर टीवी की शरण में आ रहे हैं बिग-बजट हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर्स?
Fast and Furious TV series: जब हम 'फास्ट एंड फ्यूरियस' (Fast & Furious) का नाम सुनते हैं, तो दिमाग में तुरंत एचडी स्क्रीन, कानों को फाड़ देने वाला इंजन का शोर, हवा में उड़ती कारें और ऐसे स्टंट्स आते हैं, जो साइंस और फिजिक्स के सारे रूल्स की धज्जियां उड़ा देते हैं. कार को पैराशूट से गिराना हो या सीधे सैटेलाइट में भेजना हो. इस फ्रेंचाइजी की असली पहचान ही इसका लार्जर-देन-लाइफ होना है.
हॉलीवुड फिल्मों की जब भी बात होती है, तो सुपरहिट 'फास्ट एंड फ्यूरियस' सागा का जिक्र जरूर किया जाता है. सड़क पर कार रेस करते लोगों के फेवरेट हीरो और कान फाड़ देने वाले कारों के इंजन थिएटर में बवाल मचा देते हैं. ऐसे में जब ये खबर आती है कि 7.3 अरब डॉलर (करीब 58,000 करोड़ रुपये) की ये फ्रेंचाइजी अब साल 2028 में टीवी पर आ रही है, तो सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या मोबाइल और टीवी की छोटी स्क्रीन पर ये अपनी ओरिजनल और मजबूत पहचान खो देगी? पीकॉक ने इस फ्रैंचाइजी पर बेस्ड एक नई स्क्रिप्टेड टीवी सीरीज को हरी झंडी दे दी है.मई में हुए अपफ्रंट प्रेजेंटेशन के दौरान स्टार विन डीजल ने इसके साइन दिए थे.
अब रेस के सैम विंसेंट, नील एच मॉरित्ज, पावन शेट्टी, जेफ किर्शेनबाम और क्रिस मॉर्गन के साथ विन डीजल खुद इसके एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर होंगे. वहीं माइक डेनियल और वोल्फ कोलमैन इसके को-शो रनर, पायलट राइटर और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे. ये सिर्फ एक शो की बात नहीं है, बल्कि हॉलीवुड के उस बिजनेस मॉडल में आ रहे बड़े भूचाल का इशारा है, जहां 200 मिलियन डॉलर की फिल्में अब सिनेमाघरों के बजाए ड्रॉइंग रूम के टीवी सेट्स को अपना नया ठिकाना बना रही हैं.
स्ट्रीमिंग वॉर्स का नया पैचवर्क
कोविड के बाद से ही ग्लोबल सिनेमाघरों का संतुलन पूरी तरह बदल चुका है. वीकेंड पर थिएटर्स का रुख करने वाली जनता अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पसंदीदा कहानियों का आनंद लेने में ज्यादा कम्फर्टेबल महसूस कर रही है. दुनिया भर में मल्टीप्लेक्स का टिकट महंगा होना, स्नैक्स के बढ़ते दाम और घर पर बैठकर 4K कंटेंट देखने के आराम ने ट्रेडिशनल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को भारी नुकसान पहुंचाया है. शायद यही वजह है कि यूनिवर्सल, वार्नर ब्रदर्स और डिज्नी जैसे दिग्गज स्टूडियोज अपनी सबसे सुपरहिट आईपी को अब सीधे टीवी स्क्रीन पर ला रहे हैं.
'फास्ट एंड फ्यूरियस' का टीवी पर आना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि बड़े स्टूडियो्स अब केवल 45 दिनों की थियेट्रिकल विंडो पर भरोसा नहीं रख सकते. स्ट्रीमिंग वॉर्स के इस नए दौर में, अपनी सब्सक्रिप्शन बेस को बनाए रखने के लिए अब हॉलीवुड अपने सबसे बड़े गैसोलीन-ओपेरेटेड इंजनों को टीवी सीरीज के फॉर्म में ढालने को मजबूर है. पीकॉक की प्लानिंग साल 2028 तक इस सीरीज का प्रीमियर करने की है, जो फ्रेंचाइजी की 11वीं और आखिरी फिल्म 'फास्ट फॉरएवर' के सिनेमाघरों में रिलीज 17 मार्च, 2028 के साथ ही तालमेल बैठाएगी.
क्यों थिएटर्स अब सेफ नहीं?
हॉलीवुड में बीते कुछ सालों में फिल्मों का बजट जिस तेजी से बढ़ा है, उसने रिकवरी के मैथ को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है. एक समय था, जब 100 मिलियन डॉलर में एक बड़ी ब्लॉकबस्टर बन जाती थी, लेकिन आज केवल वीएफएक्स, स्टार्स की फीस और मार्केटिंग मिलाकर एक फिल्म का बजट करीब 300 से 350 मिलियन डॉलर तक पहुंच जाता है. ऐसे में किसी फिल्म को सिर्फ अपनी लागत वसूलने के लिए बॉक्स ऑफिस पर करीब 800 मिलियन से 1 बिलियन डॉलर की कमाई करनी पड़ती है.
'फास्ट X' जैसी फिल्मों का बड़ा बजट इस बात का गवाह है कि थिएटर्स से इतनी बड़ी रकम की पूरी तरह से रिकवर करना अब एक जुआ बन चुका है. इसके उलट, टीवी सीरीज या स्ट्रीमिंग मॉडल में स्टूडियोज को लंबे समय तक सब्सक्राइबर्स से रिवेन्यू मिलता है. टीवी पर एपिसोडिक फॉर्मेट में बजट को कई घंटों के कंटेंट में डिवाइ किया जा सकता है, जिससे जोखिम कम हो जाता है और ब्रांड वैल्यू भी सालों-साल बनी रहती है.
मार्वल का MCU फॉर्मूला
बड़े बजट की थियेट्रिकल फिल्मों को टीवी सीरीज में बदलने का ये ट्रेंड मार्वल स्टूडियोज ने 'एमसीयू फॉर्मूला' के बाद से काफी पॉपुलर हो रहा है. 'वांडाविजन', 'लोकी' और 'द फाल्कन एंड द विंटर सोल्जर' जैसे शोज ने साबित किया कि बड़े पर्दे के सुपरहीरोज को टीवी पर लाकर काफी ऑडियंस को बढ़ाया जा सकता है. मार्वल की इस सफलता को देखते हुए अब दूसरे बड़े स्टूडियोज भी अपनी सुपरहिट फ्रेंचाइजियों का टीवी पर टेलीकास्ट कर रहे हैं. वार्नर ब्रदर्स जहां 'हॉरी पॉटर' और 'द बैटमैन' के स्पिनऑफ्स 'द पेंगुइन' को टीवी सीरीज के रूप में तैयार कर रहा है, वहीं यूनिवर्सल अब 'फास्ट एंड फ्यूरियस' यूनिवर्स से इसी फॉर्मूले पर दांव लगा रहा है.
VFX की फिजूलखर्ची से मुक्ति
सिनेमाघरों में बड़े पर्दे का दबाव अक्सर निर्देशकों को भारी-भरकम वीएफएक्स और फिजूलखर्च CGI स्टंट्स का इस्तेमाल करने पर मजबूर करता है, जिससे कई बार फिल्म की ओरिजनल कहानी पीछे छूट जाती है. टीवी सीरीज का फॉर्मेट प्रोड्यूसर्स को ये फ्रीडम देता है कि वो बिना वजह की फिजूलखर्ची से बचकर किरदारों के इमोशनल विकास, उनके बैकस्टोरी और मजबूत स्क्रिप्ट पर काम कर सकें. विन डीजल के मुताबिक, पिछले लंबे समय से फैंस इन किरदारों को और करीब से जानना चाहते थे. नेटफ्लिक्स ने इससे पहले साल 2019 से 2021 के बीच 6 सीजन के लिए एनिमेटेड सीरीज 'फास्ट एंड फ्यूरियस स्पाई रेसर्स' का टेलीकास्ट किया था, जिसने ये साबित किया कि इस ब्रांड में बिना महंगे रियल स्टंट्स के भी ऑडियंस को बांधे रखने का दम है.
'फास्ट फॉरएवर', 4 साल का इंतजार
टीवी सीरीज की अनाउंसमेंट के साथ ही इस फ्रेंचाइजी की आखिरी मुख्य फिल्म 'फास्ट फॉरएवर' को लेकर भी बड़े अपडेट्स सामने आए हैं. अगस्त की शुरुआत में वैरायटी के साथ एक इंटरव्यू में विन डीजल ने खुलासा किया कि अगर स्टूडियो की मांगें पूरी हुईं, तो इस फिल्म की शूटिंग इसी साल दिसंबर से शुरू हो जाएगी. डीजल ने माना कि इस मुकाम तक पहुंचना बिल्कुल आसान नहीं था. उन्हें चार अलग-अलग राइटर्स के साथ चार लंबे सालों तक काम करना पड़ा, तब जाकर एक ऐसी कहानी तैयार हो सकी जो इस 27 साल पुराने सफर का अंत कर सके.
टीवी पर उतरते दूसरे बड़े हॉलीवुड प्रोजेक्ट्स
'फास्ट एंड फ्यूरियस' अकेली ऐसी ब्लॉकबस्टर नहीं है, जो थिएटर्स से टीवी का रुख कर रही है. आज पूरा हॉलीवुड इस ट्रेंड में शामिल है. एचबीओ की मोस्ट पॉपुलर 'हॉरी पॉटर' (Harry Potter) रीबूट सीरीज, जो फिल्मों के बजाए किताबों के हर चैप्टर को एक-एक सीजन में ढाल रही है, इसका बड़ा एग्जाम्पल है. इसी तरह एमाजॉन प्राइम का 'द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स: द रिंग्स ऑफ पावर' और डिज्नी का 'स्टार वॉर्स' यूनिवर्स ('द मैंडलोरियन', 'अंडोर') ये साबित कर चुके हैं कि अरबों डॉलर की फ्रेंचाइजी अब सिनेमाघरों तक लिमिटेड नहीं रह गई हैं. 'ड्यून: प्रोफेसी' और 'ब्लेड रनर 2099' जैसे प्रोजेक्ट्स ये दिखाते हैं कि बड़े बजट की थिएट्रिकल साइंस-फिक्शन फिल्मों का अब स्मॉल स्क्रीन पर ही सबसे ज्यादा सेफ और फायदेमंद माना जा रहा है.
क्या 'फैमिली' का ये नया ठिकाना फैंस को भाएगा?
7.3 बिलियन की कमाई करने वाली यूनिवर्सल की सबसे सफल और लंबी चलने वाली फ्रेंचाइजी का टीवी पर आना सिनेमा के बदलते एरा का साइन है. विन डीजल और उनकी टीम का मानना है कि डोना लैंगली के अंडर में टीवी इंडस्ट्री में किरदारों की इंटरनेशनल अपील और 'फैमिली' का माहौल पूरी तरह से सेफ रहेगा. हालांकि, सवाल अभी भी यही है कि क्या टीवी की स्क्रीन पर जब बिना थिएटर के साउंड सिस्टम के कारें दौड़ेंगी, तो क्या फैंस वही फील ले पाएंगे? लेकिन इतना तय है कि थिएटर्स के गिरते ग्राफ और बड़े बजट के दबाव के बीच, टीवी और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ही हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर्स के लिए वो नया गैसोलीन साबित हो रहे हैं जो इन बड़ी-बड़ी फ्रेंचाइजियों की गाड़ी को फ्यूचर में रुकने नहीं देंगे.