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Anurag Kashyap Birthday: बाप का, दादा का, भाई का...सबका बदला लेगा रे तेरा फैजल! अनुराग कश्यप को क्यों चुभता है 'गैंग्स ऑफ वासेपुर'का नाम?

Anurag Kashyap: बॉलीवुड में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो रिलीज के समय भले ही कोई बहुत बड़ा धमाका न करें, लेकिन समय बीतने के साथ उनकी पॉपुलैरिटी बढ़ती चली जाती है.अनुराग कश्यप की 'गैंग्स ऑफ वासेपुर'भी ऐसी ही फिल्म है. साल 2012 में आई इस दो भाग वाली फिल्म ने हिंदी सिनेमा में गैंगस्टर फिल्मों का अंदाज ही बदल दिया. फिर क्यों अनुराग कश्यप को इस फिल्म का जिक्र रास नहीं आता है? आईए बताते हैं.

 Anurag Kashyap Birthday: बाप का, दादा का, भाई का...सबका बदला लेगा रे तेरा फैजल! अनुराग कश्यप को क्यों चुभता है 'गैंग्स ऑफ वासेपुर'का नाम?
Image Credit: Anurag Kashyap Birthday

'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के आज ज्यादातर डायलॉग सोशल मीडिया पर मीम हैं, किरदारों के नाम लोगों की जुबान पर हैं और फिल्म को कल्ट क्लासिक कहा जाता है. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि खुद अनुराग कश्यप इस फिल्म के बार-बार जिक्र से खुश नहीं होते हैं. वजह फिल्म से नफरत नहीं, बल्कि उसका उनके नाम के साथ इस कदर चिपक जाना है कि उनकी बाकी फिल्मों पर बात ही नहीं होती है. खुद अनुराग कई इंटरव्यू में कह चुके हैं कि वो 'गैंग्स ऑफ वासेपुर 3' जैसे सवालों से थक चुके हैं.एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा था कि वो 'गैंग्स 3' इसलिए नहीं बनाना चाहते थे कि आगे चलकर जिंदगी भर उसी तरह की फिल्में बनाते रहें. उनके मुताबिक अब वो खुद को नए तरीके से एक्सप्लोर करना चाहते हैं.

'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की कहानी सिर्फ बदला, बंदूक और गैंगवार की कहानी नहीं थी. अनुराग ने इसकी मदद से बिहार के कोयला एरिया, पॉलिटिक्स, कास्ट एक्योजन, परिवारों की दुश्मनी और कई जनरेशन में चलने वाली हिंसा को एक साथ पर्दे पर उतारा था. फिल्म की कहानियों के पीछे असली घटनाओं और इलाके के इतिहास की प्रेरणा थी, हालांकि घटनाओं को सिनेमाई जरूरत के हिसाब से बदला गया था.

फेमस कैरेक्टर, पॉपुलर स्टोरी...फिर भी क्यों नहीं पसंद!

अनुराग की ये फिल्म सिर्फ एक गैंगस्टर ड्रामा बनकर नहीं रही, मनोज बाजपेयी का 'सरदार खान', नवाजुद्दीन सिद्दीकी का 'फैजल', ऋचा चड्ढा की 'नगमा' और हुमा कुरैशी समेत कई किरदारों ने ऑडियंस के बीच अपनी अलग जगह बनाई. लेकिन यहीं से अनुराग के लिए एक अजीब समस्या शुरू हुई. ऑडियंस ने फिल्म को इतना अपना बना लिया कि निर्देशक की हर अगली फिल्म को 'वासेपुर' की कसौटी पर तौलना शुरू कर दिया. अनुराग का कहना है कि यही चीज उनके लिए परेशान करने वाली बन गई. उन्होंने यहां तक कहा कि फिल्म ने उन्हें एक तरह से डिरैल कर दिया, क्योंकि उनकी हर नई फिल्म की तुलना उसी से होने लगी.

salman khan

'वासेपुर' से क्या था सलमान खान का कनेक्शन?

'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की रिलीज को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर ये बात लिखी जाती है कि फिल्म को सलमान खान की 'टाइगर 3' ने नुकसान पहुंचाया था और फिल्म ने पहले हफ्ते में करीब 21 करोड़ रुपये कमाए थे. 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' 22 जून, 2012 में रिलीज हुई थी, जबकि 'टाइगर 3' नवंबर 2023 में आई. साल 2012 में जिस सलमान खान फिल्म से 'वासेपुर' की स्क्रीन को लेकर अनुराग ने शिकायत की, वो 'एक था टाइगर' थी. 

अनुराग ने बाद में बताया कि 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' को सिनेमाघरों से जल्दी हटना पड़ा क्योंकि सलमान की फिल्म आ गई थी. दूसरी तरफ, बाद के सालों में फिल्म की पॉपुलैरिटी थिएटर से ज्यादा टीवी, इंटरनेट और डाउनलोडिंग से बढ़ती गई. अनुराग ने ये भी कहा कि प्रोडक्शन कंपनी के हिसाब से फिल्म को कॉमर्शियल हिट नहीं माना गया था, जबकि ऑडियंस ने उसे समय के साथ कल्ट बना दिया.

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बॉक्स ऑफिस पर 'फ्लॉप', इंटरनेट पर 'कल्ट'

'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ यही है कि जिस फिल्म को आज लोग अनुराग कश्यप की सबसे बड़ी सफलता में गिनते हैं, उसकी शुरुआती बॉक्स ऑफिस कहानी इतनी चमकदार नहीं थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के दोनों हिस्सों को मिलाकर फिल्म ने करीब 43 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन किया था, जिसे केवल लगभग 18.5 करोड़ रुपये के बजट पर बनाया गया था. 

मगर असली खेल बॉक्स ऑफिस के बाद हुआ. इंटरनेट पर लोगों ने फिल्म को बार-बार देखा, इसके डायलॉग वायरल हुए और धीरे-धीरे 'वासेपुर' थिएटर की फिल्म से ज्यादा एक पॉप-कल्चर फिनॉमिना बन गई. अनुराग के लिए शायद यही सबसे बड़ी विडंबना है, जिस फिल्म को बनाते समय उन्होंने एक कहानी कही थी, वही फिल्म बाद में उनके पूरे करियर की पहचान बन गई.


 ‘वासेपुर’ से पहले शुरू हुआ अनुराग का सफर

अनुराग कश्यप को सिर्फ 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के निर्देशक के तौर पर देखा जाए, तो उनकी पूरी कहानी अधूरी रह जाएगी. उन्होंने शुरुआत में राम गोपाल वर्मा के साथ काम किया और फिर ऐसी फिल्में लिखीं और बनाईं, जो उस दौर की मैनस्ट्रीम से काफी अलग थीं. उनकी पहली निर्देशित फिल्म 'पांच' बनी तो सही, लेकिन रिलीज नहीं हो सकी. फिल्म पर सेंसर बोर्ड की आपत्तियां थीं और सेक्स, ड्रग्स तथा हिंसा जैसे टॉपिक को लेकर विवाद हुआ. इसके बाद 'ब्लैक फ्राइडे' आई, जो 1993 मुंबई बम धमाकों पर बेस्ड थी. ये फिल्म भी लंबे समय तक अटकी रही और साल 2007 में जाकर रिलीज हो पाई.

फिर 'देव डी' ने 'देवदास' की पुरानी कहानी को एक बिल्कुल नए अंदाज और नशे में डूबी दुनिया में बदल दिया. 'गुलाल', 'नो स्मोकिंग', 'दैट गर्ल इन येलो बूट्स', 'उड़ता पंजाब', 'रमन राघव 2.0', 'मुक्काबाज', 'मनमर्जियां' और 'उगली' जैसी फिल्मों ने दिखाया कि अनुराग एक ही तरह की कहानी कहने वाले डायरेक्टर नहीं हैं. 'उगली' को लेकर भी सेंसर और रिलीज से जुड़ी परेशानियां हुईं.

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'बॉम्बे वेलवेट' ने दिखाए पड़े सपने

अनुराग के करियर में 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के बाद सबसे ज्यादा पॉपुलर फिल्म शायद 'बॉम्बे वेलवेट' ही थी. रणबीर कपूर और अनुष्का शर्मा जैसे बड़े सितारों के साथ बनी ये पीरियड फिल्म 1960 के दशक के मुंबई की जमीन पर तैयार की गई थी. फिल्म का विजुअल स्केल बड़ा था, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसे वो सफलता नहीं मिली जिसकी उम्मीद की जा रही थी. इसके बाद अनुराग को लेकर एक दिलचस्प सवाल पैदा हुआ, क्या एक ऐसा निर्देशक, जिसने छोटे बजट में 'ब्लैक फ्राइडे', 'देव डी' और 'वासेपुर' जैसी फिल्में बनाई थीं, बड़े स्टार और बड़े बजट वाले सिस्टम में फिट बैठता है?

शायद अनुराग की फिल्मोग्राफी का जवाब है, उन्हें सबसे ज्यादा आजादी तब मिली, जब वो सिस्टम के बाहर खड़े होकर अपनी शर्तों पर कहानी कहते रहे.यही वजह है कि आज भी 'उगली', 'रमन राघव 2.0', 'मुक्काबाज' और 'कैनेडी' जैसी फिल्मों की बात उनके एक्सपेरिमेंटल सिनेमा के रूप में होती है. 'कैनेडी' को फिल्म फेस्टिवल सर्किट में भी काफी तारीफ मिली.

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फिर आता है सलमान खान वाला किस्सा

अनुराग कश्यप और सलमान खान के बीच तनाव की कहानी 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के दौर से शुरू नहीं हुई थी. इसकी जड़ें इससे काफी पहले की हैं. साल 2003 की 'तेरे नाम' को शुरू में अनुराग कश्यप निर्देशित करने वाले थे. अनुराग ने बाद में बताया कि फिल्म की स्क्रिप्टिंग पर वो काफी काम कर चुके थे और शूटिंग शुरू होने वाली थी. लेकिन एक पॉजिटिव राय के बाद मामला बिगड़ गया. अनुराग चाहते थे कि सलमान फिल्म में अपने किरदार के हिसाब से सीने के बाल न हटाएं, क्योंकि उनका तर्क था कि उत्तर प्रदेश के उस इलाके के एक देसी लड़के का लुक ज्यादा नैचुरल लुक होना चाहिए.

अनुराग के मुताबिक उन्होंने सलमान से ये बात कही और इसके बाद फिल्म को लेकर उनकी तरफ से कॉन्टैक्ट ही बंद हो गया. फिल्म आखिरकार सतीश कौशिक ने निर्देशित की और सुपरहिट साबित हुई. अनुराग ने साल 2023 में कहा था कि इस घटना के बाद वो सलमान को फिर कभी ठीक से नहीं मिले, हालांकि आमना-सामना होने पर हैलो-हाय जरूर हुआ.

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सलमान से पर्सनल विवाद हुआ पब्लिक

सलमान और अनुराग का नाम बाद के सालों में भी अलग-अलग मौकों पर एक साथ आया. साल 2016 में सलमान खान की एक विवादित टिप्पणी पर अनुराग ने खुलकर कहा था कि उन्हें माफी मांगनी चाहिए. उस समय बॉलीवुड के कई लोग चुप थे, लेकिन अनुराग अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते थे और उन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर रिएक्शन दिया. हालांकि, सलमान के साथ उनकी कहानी को सिर्फ पर्सनली दुश्मनी कहना शायद ठीक नहीं होगा. अनुराग खुद कई बार सलमान की फिल्मों की तारीफ भी कर चुके हैं. 
 

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About the Author

Jyoti Rajput

Jyoti Rajput

ज्योति सिंह राजपूत जी न्यूज में सब एडिटर हैं और पिछले 1 साल से ज्यादा से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. दैनिक जागरण प्रिंट और सहारा न्यूज नेटवर्क में ट्रेनिंग लेने के बाद अब Zee News में काम कर रही हैं. कुछ समय तक लाइफस्टाइल की खबरों में काम करने के बाद अब एंटरटेनमेंट में काम कर रही हैं. वहीं हॉलीवुड की खबरों और फिल्मों पर पैनी नजर रखती हैं. उन्होंने पंडित माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी (MCU) से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री हासिल की है. आप Jyoti.Rajput@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं.
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