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सिनेमाघरों में अक्सर बड़े सितारों और करोड़ों के बजट वाली फिल्मों का ही शोर सुनाई देता है. लोगों की भीड़ भी आमतौर पर बड़े चेहरों की चमक देखने के लिए सिनेमाघरों में जाती है, लेकिन कभी-कभार बड़े पर्दे पर ऐसी फिल्में भी रिलीज होती हैं, जो सीधे दिल में उतर जाती है. ऐसी ही एक फिल्म इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचने में लगी है, जिसका नाम है ‘हनुमान अंश’. इस फिल्म को सिनेमाघरों में एक महीना पूरा हो चुका है और फिल्म अभी बड़े पर्दे के साथ-साथ लोगों के दिलों पर राज कर रही है. महज 2 करोड़ के बहुत छोटे से बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने 10 लाख से अपनी शुरुआत की थी.
किसी ने सोचा भी नहीं था कि आगे चलकर ये फिल्म इतना बड़ा कमाल कर दिखाएगी. शुरुआती दिनों में भले ही फिल्म को बहुत कम दर्शक मिले, लेकिन जिन लोगों ने भी इसे देखा, उन्होंने इसकी तारीफ अपने करीबियों से की. देखते ही देखते लोगों की जुबानी चर्चा ने फिल्म के लिए एक मजबूत माहौल तैयार कर दिया. नतीजा ये हुआ कि सिनेमाघरों में लोगों की भीड़ लगातार बढ़ने लगी और टिकट खिड़की पर कमाई की रफ्तार तेज हो गई. इस फिल्म ने 29 दिनों के अंदर 73.27 करोड़ की कमाई कर ली. इस हैरान कर देने वाली सफलता के पीछे असली मेहनत राइटर और डायरेक्टर डॉक्टर विशाल चतुर्वेदी की है.

विशाल चतुर्वेदी का जन्म और शुरुआती परवरिश लखनऊ शहर में हुई. पढ़ाई में हमेशा आगे रहने वाले विशाल ने साल 2006 में गोरखपुर से MBBS की डिग्री हासिल की. डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसी साल जब उनकी पोस्टिंग हल्द्वानी में हुई, तब उन्हें पहली बार फेमस कैंची धाम जाने का सौभाग्य मिला. यहीं पर उनका परिचय नीम करोली बाबा के जीवन, उनकी शिक्षाओं और चमत्कारों से हुआ. इस आध्यात्मिक अनुभव ने उनके मन और सोच पर बहुत गहरा असर डाला. करीब दो दशकों तक ये सोच उनके दिल में चलती रही और आगे चलकर इसी से फिल्म ‘हनुमान अंश’ की कहानी तैयार हुई.
‘हनुमान अंश’ विशाल चतुर्वेदी की बनाई पहली फीचर फिल्म है और पहली ही कोशिश में उन्होंने ऐसा मुकाम हासिल कर लिया जो कई पुराने फिल्ममेकर्स का सपना होता है. फिल्म ने जिस तरह से रफ्तार पकड़ी, वो बॉक्स ऑफिस पर अपने आप में एक मिसाल बन चुका है. कमाल की बात ये रही कि अपने 28वें दिन इस छोटी सी फिल्म ने 11 करोड़ का नेट कलेक्शन दर्ज किया, जबकि उसी दिन साउथ स्टार यश की भारी-भरकम बजट वाली फिल्म ‘टॉक्सिक’ सिर्फ ₹4.25 करोड़ ही कमा पाई. बहुत कम स्क्रीन्स और बेहद लिमिटेड प्रमोशन के बीच किसी नई फिल्म का ऐसा दम दिखाना वाकई काबिल-ए-तारीफ है.
फिल्म डायरक्टर की दुनिया में कदम रखने से पहले भी विशाल चतुर्वेदी ने अपनी जिंदगी में कई अलग-अलग रास्ते तय किए. वे पिछले करीब 14 सालों से राइटिंग, रिसर्च, फिल्ममेकिंग और वीडियो कंटेंट तैयार करने के काम से एक्टिवली जुड़े रहे. वे सिर्फ एक डॉक्टर या डायरेक्टर ही नहीं, बल्कि एक जाने-माने शेफ और बिजनेसमैन भी हैं. उन्होंने ‘द इंडियन थिंग’ और ‘होली काव होम प्रोडक्शंस’ जैसे पॉपुलर प्लेटफॉर्म्स की नींव रखी. इन मंचों के जरिए उन्होंने कई नामी ब्रांड्स और बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बेहतरीन और असरदार कहानियां तैयार की हैं, जिन्हें लोगों ने सोशल मीडिया पर काफी पसंद भी किया है.
विशाल को देश के पारंपरिक खानपान, देहाती रसोई और भारतीय संस्कृति से बहुत ज्यादा लगाव है. बतौर शेफ उन्होंने हमेशा घर के शुद्ध देसी खाने और पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार कोशिशें की हैं. उनका सबसे बड़ा मकसद अपनी जिंदगी में 100 मूल कहानियां यानी ओरिजिनल आईपी तैयार करना है, जो सिर्फ अपने देश के दर्शकों को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लोगों को भारत की मिट्टी से जोड़ सकें. मात्र 10 लाख की मामूली शुरुआत से 73.27 करोड़ के बड़े आंकड़े तक का ये सफर किसी सुनहरे ख्वाब से कम नहीं है और अब सभी की नजरें उनके अगले कदम पर टिकी हैं.