जब नाना पाटेकर ने नसीरुद्दीन शाह को पढ़ाया था राष्ट्रवाद का पाठ, देश प्रेम के लिए कही थी ये बात
75 की उम्र में नाना पाटेकर ने दुनिया को अलविदा कर दिया है. वह अपने पीछे अपनी फिल्में, अपनी कहानी और यादें परिवार और फैंस के दिलों में छोड़ गए हैं. केवल पर्दे पर ही नहीं रियल लाइफ में भी वह देशप्रेमी थे. साल 2023 में उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर पाठ पढ़ाया था. नाना ने एक्टर को राष्ट्रवाद का असली मतलब समझाया था.
नसीरुद्दीन शाह अक्सर अपनी विचारधारा को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. हाल ही में पीयूष मिश्रा और नसीरुद्दीन शाह के बीच जुबानी जंग देखने को मिल रही है. पीयूष मिश्रा ही नहीं नाना पाटेकर के संग भी नसीरुद्दीन की नोकझोंक देखने को मिली थी. साल 2023 में नाना पाटेकर और नसीरुद्दीन शाह के बीच जमकर जुबानी जंग हुई थी. नसीरुद्दीन शाह ने नाना की कुछ फिल्मों पर निशाना साधा था, जिसके बाद नाना पाटेकर ने नसीरुद्दीन शाह को ऐसा पाठ पढ़ाया था जिसे लोग आजतक नहीं भूले हैं.
जब नसीरुद्दीन को बताया था राष्ट्रवाद का मतलब
द कश्मीर फाइल्स, द केरल स्टोरी और गदर 2 जैसी फिल्मों ने जब नसीरुद्दीन शाह को परेशान कर कर दिया था. दरअसल उन्होंने इन फिल्मों की सफलता को खतरनाक बताया था. उस दौरान नाना पाटेकर ने उन्हें राष्ट्रवाद का असली मतलब बताया था. दरअसल नाना पाटेकर अपनी फिल्म द वैक्सीन वॉर की प्रमोशन कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने एक्टर से बोला था- मैं नसीर से पूछना चाहता हूं कि राष्ट्रवाद का क्या मतलब है? उनके अनुसार इसकी सही परिभाषा क्या है? हमारे देश में दलित, मुसलमान और हिंदू सभी रहते हैं और सभी राष्ट्रवादी है. अपने देश से प्यार करना और देश के हित में बात करना बुरी बात नहीं, बल्कि यही राष्ट्रवाद है. गदर 2 फिल्म में जिस तरह की फिल्म है उसमें वैसा ही कंटेंट होगा. इसके अलावा मैंने द केरल स्टोरी नहीं देखी है इसलिए उस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता.
संजय लीला भंसाली की लगाई थी क्लास
नाना यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे बोला था कि राष्ट्रवाद का बतंगड़ बनाकर पैसा बनाना गलत है. फिल्मों में जो जैसा है उसे वैसा ही दिखाना चाहिए. अगर वो डॉक्यूमेंट्री है तो उसे उसी तरह दिखाना चाहिए. अगर सच्ची घटना पर फिल्म बनाते हैं तो उसे वैसा ही दिखाना चाहिए, वरना जनता तो है वह सवाल जरूर करेगी. उन्होंने कहा था कि फिल्म बनाते समय तथ्यों को सही से दिखाना चाहिए. उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत और बाजीराव मस्तानी को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया था. उन्हें संजय लीला भंसाली की फिल्म वाट लावली सॉन्ग पसंद नहीं आया था. जिसके बाद उन्होंने डायरेक्टर को कॉल करके बोला था कि वाट लवाली क्या होता है? उन्होंने बोला कि इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि लोग क्या सोचेंगे. मुझे जो पसंद नहीं आया वो मैंने बोल दिया.
पॉलिटिक्स से दूर रहना चाहते थे
नाना पाटेकर से पूछा गया था कि क्या वह राजनीति में जा सकते हैं. उन्होंने बोला था कि सभी राजनीतिक पार्टियों से पहचान हैं, लेकिन वह राजनिति में नहीं आना चाहते, नाना केवल चैरिटेबल ट्रस्ट नाम फाउंडेशन के जरिए सोशल वर्क करना चाहते थे.
मोदी जी का काम था बेहद पसंद
नाना पाटेकर भले ही पॉलिटिक्स से दूर थे, लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काम बहुत पसंद करते थे. नाना ने बताया था कि पीएम मोदी को वह तब से जानते थे जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे.