टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: आखिर क्या है ये 25-30 बैंक खातों का नया खेल? विदेश से रची गई पूरी साजिश और खौफ का नेटवर्क
टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग मामले में मुंबई पुलिस ने एक बड़े नेटवर्क की परतें खोली हैं. वारदात के लिए 25 से 30 बैंक खातों और डिजिटल पेमेंट से खेल रचा गया. विदेश में बैठे मास्टरमाइंड से लेकर बाइक खरीदने तक की हैरान करने वाली कड़ियां अब सामने आ रही हैं.
बॉलीवुड स्टार टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच काफी तेजी से जांच कर रही है. इस केस में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, इस हमले की साजिश रचने और पैसों का लेन-देन छिपाने के लिए करीब 25 से 30 बैंक खातों और कई ऑनलाइन पेमेंट ऐप्स का इस्तेमाल किया गया था. जांच टीम का कहना है कि ये पूरा खेल इसलिए रचा गया, ताकि पैसा भेजने वाले और उसे लेने वाले का असली चेहरा सामने न आ सके. अब पुलिस ये पता लगाने में जुटी है कि हथियार, गाड़ी और दूसरा सामान खरीदने के लिए रकम कहां-कहां से घुमाई गई थी.
इस पूरे मामले के तार सीधे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं. इस केस का मेन आरोपी अनिल पंडित अब तक पुलिस की पकड़ में नहीं आया है. जांच एजेंसियों को पूरा शक है कि वो देश से बाहर बैठकर वहां से सब कुछ चला रहा है. फायरिंग के ठीक बाद उसने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इसकी जिम्मेदारी भी ली थी. पुलिस के मुताबिक, उसने अपना एक पूरा नेटवर्क बना रखा था, जिसमें उसने साथियों को अलग-अलग काम बांटे हुए थे. किसी के जिम्मे हथियार जुटाना था, तो कोई गाड़ियों और पैसों के लेन-देन का बंदोबस्त देख रहा था. अब पुलिस तेजी से उसके बाकी मददगारों की धरपकड़ में लगी है.
बाइक्स खरीदने के लिए भेजी गई रकम
क्राइम ब्रांच की जांच में ये बात भी सामने आई है कि हमले के दौरान इस्तेमाल की गई बाइक को खरीदने के लिए 25 हजार रुपये भेजे गए थे. ये रकम कथित तौर पर अमर मुदेलिया नाम के आरोपी ने ट्रांसफर की थी. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पुलिस ने अमर मुदेलिया को हरियाणा के सोनीपत जिले से गिरफ्तार किया है. अदालत ने उसे 6 नवंबर तक क्राइम ब्रांच की हिरासत में भेज दिया है. पुलिस ने कोर्ट को बताया कि अमर ने अपने खाते से दूसरे आरोपियों तक रकम पहुंचाई थी. अब पुलिस कस्टडी में उससे ये पूछताछ की जा रही है कि यह पैसा कहां से आया था और कौन-कौन से ऐप का इस्तेमाल हुआ था?
डिजिटल चैट और ऑडियो क्लिप से खुले राज
जांच में तकनीकी सबूत भी पुलिस के हाथ लगे हैं. द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को वॉट्सऐप चैट और कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली हैं. इन सबूतों से हमले की गहरी साजिश साफ दिखाई दे रही है. पुलिस को पूरा अंदेशा है कि केस का मेन आरोपी अनिल पंडित अपने साथियों से वॉयस नोट्स और सिक्योर मैसेजिंग ऐप्स के जरिए सीधे बात करता था. वो सीधे कॉल करने से बचता था, ताकि पुलिस की नजर से दूर रह सके. हर काम के लिए कोडवर्ड और अलग-अलग चैट ग्रुप्स का इस्तेमाल किया गया था ताकि किसी को कोई शक न हो.
पैसों की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश
क्राइम ब्रांच की फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन विंग अब उन सभी 25-30 बैंक अकाउंट के लेन-देन का ब्योरा खंगाल रही है. पुलिस ये देखना चाहती है कि किन-किन शहरों से इन अकाउंट्स में पैसे डाले गए और किस समय एटीएम या ऑनलाइन के जरिए निकासी की गई. अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हो सकते हैं, जो सिर्फ कमीशन लेकर अपने खातों का इस्तेमाल करने देते हैं. ऐसे अकाउंट होल्डर्स की पहचान की जा रही है, ताकि गिरोह की फाइनेंशियल रीढ़ को तोड़ा जा सके. जब तक फंड का रास्ता पूरी तरह साफ नहीं होता, तब तक साजिश की पूरी तस्वीर साफ होना मुश्किल है.
विदेश से बैठे मास्टरमाइंड पर नजर
मुंबई पुलिस अब इस मामले में सेंट्रल एजेंसियों और इंटरनेशनल लेवल पर मदद लेने की तैयारी कर रही है, ताकि विदेश में छिपे अनिल पंडित पर शिकंजा कसा जा सके. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 18 अक्टूबर को हुई इस फायरिंग का मकसद सिर्फ दहशत फैलाना था या इसके पीछे कोई बहुत बड़ी रंगदारी की मांग थी, ये मुख्य साजिशकर्ता के पकड़े जाने के बाद ही पूरी तरह सामने आ पाएगा. फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों के बयानों को मिला रही है और डिजिटल सबूतों को कोर्ट में पेश करने के लिए पुख्ता बना रही है. आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियों की पूरी संभावना जताई जा रही है.