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बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर ने हाल ही में 'देवरा: पार्ट 1' फिल्म के अपने गाने 'चुट्टामल्ले' के एक AI-मॉर्फ्ड वीडियो को लेकर बात की थी. वायरल हुए इस वीडियो में डिजिटल तरीके से उनके लुक में बदलाव करके ऐसे अश्लील दृश्य बनाए गए थे, जो असल गाने का हिस्सा कभी नहीं थे. साथ ही एक्ट्रेस ने महिलाओं को केवल एक 'वस्तु' की तरह दिखाने के लिए AI के दुरुपयोग की कड़ी आलोचना की और इस वीडियो को गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला और यौन उत्पीड़न के बराबर बताया.
इस घटना ने एक बार फिर AI के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसके चलते जूनियर NTR, चिरंजीवी और खुशबू सुंदर जैसी फिल्म जगत की हस्तियों ने इस उल्लंघन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. इसी बीच एक इंटरव्यू में श्रिया सरन ने AI के गलत इस्तेमाल और अपनी मॉर्फ्ड तस्वीरों पर बात की.
उन्होंने कहा कि अक्सर महिलाओं को ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है, क्योंकि इंटरनेट पर उनके शरीर के अंगों को चर्चा का विषय बना दिया जाता है. एक्ट्रेस ने कहा , 'यह बहुत अजीब है. कभी-कभी तो मुझे पता भी नहीं चलता कि यह मैं ही हूं. वे आपके ब्रेस्ट का साइज बदल देते हैं, अचानक आपने जो केप पहना होता है वह गायब हो जाता है या आपके हिप्स बड़े दिखने लगते हैं. आपको इसे हल्के में लेना पड़ता है. फिर भी, यह परेशान करने वाला है और सही नहीं है.'
श्रिया ने आगे कहा, 'AI से हमें बहुत कुछ मिल सकता है और यह हमारी कई तरह से मदद कर सकता है, लेकिन यह हमारे लिए बहुत कुछ बदल भी सकता है. इससे ऐसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं जो खतरनाक हो सकती हैं. मुझे लगता है कि यह बात हर टेक्नोलॉजी पर लागू होती है. समय के साथ हमें या तो इसके साथ जीना सीखना होगा या फिर इससे निपटना होगा.'
श्रिया कहती हैं कि साल 2001 में 'इष्टम' फिल्म से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद से अब तक और भी कई चीजें बदल गई हैं. उन्होंने कहा, 'हमारे पास मेकअप वैन नहीं होती थीं. मेरी पहली तीन फिल्मों में तो मेरे पास ऐसी कोई वैन नहीं थी. हम कोई पेड़ ढूंढकर उसके नीचे बैठते थे और साथ में लंच करते थे. यह एक तरह से बहुत अच्छा अनुभव था. अच्छी बात यह है कि मुझे आज भी अपने कुछ को-एक्टर और डायरेक्टर के साथ हुई बातचीत याद है. हम साथ बैठकर जिंदगी और किताबों के बारे में बातें करते थे. हम रिकॉर्डर लाते थे और सब मिलकर म्यूजिक सुनते थे.'
उन्होंने आगे कहा, 'अब सबके पास ईयरफोन होते हैं और आपको पता भी नहीं चलता कि सामने वाला क्या सुन रहा है. सिनेमा बहुत बदल गया है. कहानी कहने का तरीका भी बहुत बदल गया है.' वह आगे कहती हैं. सबसे बड़ा बदलाव फिल्म सेट पर फैसले लेने वाली भूमिकाओं में महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी है. वह बताती हैं, 'कैमरे के सामने से ज्यादा महिलाएं कैमरे के पीछे काम कर रही हैं.'