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Ranbir Kapoor Birthday Special: बॉलीवुड के 'चॉकलेट बॉय' से लेकर 'रॉकस्टार' और 'संजू' जैसे दमदार किरदारों तक सुपरस्टार रणबीर कपूर ने अपने करियर में कई अलग-अलग रंग दिखाए हैं. रणबीर का नाम लंबे समय तक हिंदी सिनेमा के उन एक्टर्स में लिया जाता रहा, जिनकी पहचान सिर्फ स्टारडम से नहीं, बल्कि उनकी एक्टिंग और किरदारों की संवेदनशीलता से बनी है. उन्होंने अपने करियर में कई अलग-अलग रंग दिखाए हैं. आज रणबीर कपूर 28 सितंबर को अपना 44वां जन्मदिन सेलिब्रेट करेंगे.
‘सांवरिया’ से अपने एक्टिंग के करियर की शुरुआत करने वाले रणबीर ने ‘बचना ऐ हसीनों’, ‘रॉकस्टार’, ‘बर्फी!’, ‘तमाशा’, ‘ऐ दिल है मुश्किल’ और ‘संजू’ जैसी फिल्मों के जरिए खुद को एक ऐसे मंझे हुए अभिनेता के तौर पर स्थापित किया, जो पर्दे पर रोमांस, दर्द और इमोशनल गहराई को बेहद सहजता से उतार सकता है.
यह बदलाव सिर्फ रणबीर कपूर के पर्दे पर निभाए किरदार में नहीं था, बल्कि उस तरीके में भी था, जिस तरह से दर्शकों ने उन्हें देखना शुरू किया. एक ऐसा एक्टर, जिसे लंबे समय तक 'चॉकलेट बॉय', रोमांटिक हीरो या फिर परफॉर्मेंस ड्रिवन एक्टर के रूप में देखा जाता था, अचानक एक इंटेंस अंदाज में नजर आया. फिल्म की इस शानदार सफलता ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या 'एनिमल' ने रणबीर कपूर को बदल दिया या फिर दर्शकों ने पहली बार उनके स्टारडम को एक बिल्कुल नई नजर से देखना शुरू कर दिया?
'ब्रह्मास्त्र' जैसी बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म के बावजूद रणबीर कपूर को लंबे समय तक उस लिस्ट का मास सुपरस्टार नहीं माना गया, जिस तरह सलमान खान, शाहरुख खान या अन्य बड़े सितारों को देखा जाता है. उनकी लोकप्रियता बहुत मजबूत थी, लेकिन उनकी स्टार पर्सनैलिटी का बड़ा दायरा मुख्य रूप से यूथ और अर्बन ऑडियंस तक सीमित माना जाता था.
दिसंबर 2023 में रिलीज हुई 'एनिमल' ने इस पूरे समीकरण को ही बदलकर रख दिया था. फिल्म में रणबीर कपूर ने रणविजय सिंह का किरदार निभाया था, जो उनके पिछले सभी रोमांटिक और इमोशनल किरदारों से बिल्कुल अलग था. इसमें गुस्सैल अंदाज, हिंसा, जुनून और बड़े पर्दे वाला भव्य और दमदार अंदाज भी देखने को मिला था. यहां सबसे महत्वपूर्ण बात सिर्फ फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन नहीं था, बल्कि असली बदलाव यह था कि रणबीर कपूर की फिल्मों को लेकर दर्शकों की उम्मीदें पूरी तरह से बदल गई थीं.

एक नजरिए से देखा जाए तो 'एनिमल' ने रणबीर कपूर के अंदर मौजूद उस खास पहलू को सामने लाया, जिसे दर्शकों ने पहले कभी देखा ही नहीं, या फिर बहुत कम देखा था. अपनी पूरी फिल्मोग्राफी में वह हमेशा अलग-अलग तरह के प्रयोग करते रहे हैं. यानी एक्टर वही था, लेकिन निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने उन्हें बड़े पर्दे पर पेश करने का तरीका बिल्कुल नया चुना था.
यही इस पूरी कहानी का दिलचस्प हिस्सा है. रणबीर कपूर के स्टारडम में आए बदलाव को सिर्फ उनके किरदार के कायापलट (character transformation) से नहीं समझा जा सकता, बल्कि यह दर्शकों के बदलते इंटरेस्ट से भी जुड़ा है. वह पहले से ही हिंदी सिनेमा के प्रमुख सितारों में शामिल थे, लेकिन फर्क उनकी स्टार पहचान में आया. एक एक्टर की लोकप्रियता और एक बड़े थिएट्रिकल मास स्टार की मार्केट वैल्यू में जो दूरी थी, 'एनिमल' ने उसे खत्म कर दिया.

'एनिमल' की सबसे बड़ी विरासत शायद यही रही कि उसने रणबीर कपूर को किसी एक इमेज में कैद नहीं होने दिया. एक तरफ वह ‘रॉकस्टार’ और ‘तमाशा’ वाले बेहतरीन परफॉर्मेंस हैं, तो दूसरी तरफ ‘एनिमल’ का रणविजय भी उनके करियर का स्थायी हिस्सा बन चुका है. आने वाले समय में जब वह अलग-अलग जॉनर में काम करेंगे, तो दर्शकों के पास उन्हें देखने का एक ज्यादा बड़ा और विविध संदर्भ मौजूद होगा.
‘एनिमल’ से पहले रणबीर कपूर एक शानदार अभिनेता थे, जिनके पास मजबूत स्टारडम था. ‘एनिमल’ के बाद दर्शकों ने उनके स्टारडम को एक नए और बड़े पैमाने पर देखना शुरू किया है. इस फिल्म ने दर्शकों की नजर में रणबीर कपूर की पूरी स्टार पर्सनैलिटी का एक नया चेहरा उजागर किया है. अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी इस नई मास-इमेज का सही संतुलन बनाए रखने की है.