'मैं रोने से खुद को रोकता था...', Baldy का किरदार निभाते हुए क्यों इमोशनल हो गए मिहिर आहूजा?
मिहिर आहूजा ने 'ऑपरेशन सफेद सागर' में फ्लाइंग ऑफिसर सी.एच. बाल रेड्डी यानी 'Baldy' का किरदार निभाया है. उन्होंने बताया कि ‘लक्ष्य’ देखकर उन्हें वर्दी पहनने की प्रेरणा मिली थी. अब दर्शकों को एयरफोर्स ज्वाइन करने के लिए प्रेरित करना उनके लिए गर्व की बात है.
'ऑपरेशन सफेद सागर: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ द कारगिल वॉर' में अभिनेता मिहिर आहूजा ने फ्लाइंग ऑफिसर सी.एच. बाल रेड्डी का किरदार निभाया है. एयरफोर्स की दुनिया में बाल रेड्डी को उनके निकनेम 'Baldy' से जाना जाता था. 7 अगस्त को रिलीज हुई यह सीरीज कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन और नंबर 17 स्क्वाड्रन यानी 'Golden Arrows' की कहानी को सामने लाती है.
आपने 'Lakshya' देखकर uniform पहनने का सपना देखा था. क्या Hrithik Roshan के सामने आज आप ‘Operation Safed Sagar’ में अपना uniform वाला किरदार दिखाना चाहेंगे?
बिलकुल मैं बहुत ज्यादा इंस्पायर्ड था, मैं आपको बताना चाहूंगा कि अभी दो दिन पहले मैं जिम में था, तब तक कोई आया मेरे पास मैंने आपको ऑपरेशन सफेद सागर में देखा. आपका शो देखकर हम भी एयरफ़ोर्स ज्वाइन करना चाहते हैं. ये सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा. ये बहुत बड़ी बात है एक एक्टर के लिए की हम उन्हें इंस्पायर कर रहे हैं. मैंने ऐसा सुना है कि 'लक्ष्य' देखने के बाद बहुत से लोगों ने फ़ोर्स ज्वाइन किया था. अब अगर हमारा शो देख कर भी लोग ऐसे बोल रहे हैं, तो ये बहुत बड़ी बात है
क्या कोई ऐसा moment था जहां director से आपकी creative disagreement हुई हो, क्योंकि आपको लगा हो कि Baldy ऐसा नहीं करेगा?
नहीं, ऐसा नहीं था बिलकुल भी नहीं. इतनी अच्छी राइटिंग इतना अच्छा डायरेक्शन था.वो पहले से ही इतना रिसर्च करके बैठे रहते हैं. हम एक्टर्स तो बहुत लास्ट में आते हैं. हमे सब कुछ कुछ थाल में परोस के दे दिया जाता है. लेकिन हमने भी बहुत चीजें सीखी हैं. कैसे चलना है. कैसे बात करनी है. लेकिन इस दौरान जो सबसे ज्यादा मुश्किल काम होता है उनकी फैमिली से मिलना. वो उनकी कहानियां सुनते हैं. कैसे उनके हसबैंड गए और कभी वापस नहीं आए. वो अपने आप को किस तरीके से कैसे मोल्ड करके रखते हैं, ये काबिले तारीफ है. हम सेट पर भी रोज कोई ना कोई कहानी सुनते थे. ये प्रोजेक्ट इमोशनली बहुत ज्यादा चैलेंगिंग था. हम रोज खुद को रोने से रोकते थे.
Siddharth और Jimmy में से किसने आपको acting को लेकर ऐसी सलाह दी जो आगे आपके career में काम आने वाली है?
उन दोनों को देख कर ही बहुत सिखने को मिल गया. मै इसके बहुत शुक्रगुजार हूं कि मुझे ऐसे स्टार्स के साथ काम करने को मिला. सिद्धार्थ हमारे साथ इतना घुल-मिल गए जैसे हम दोस्त हो. वो जो एक सीनियर और जूनियर वाला गैप होता है, वो आइस ब्रेक बहुत जल्दी हो गया था. पहले दिन दोनों ने बहुत कम्फर्ट फील करवा दिया. दोनों से खूब मस्ती करते थे हम. जिम्मी सर के साथ तो हम काम के अलावा खाने पर खूब डिस्कस करते थे.
आपको ज्यादा डर किससे लगता है-flop होने से या typecast होने से?
डर नहीं कह सकते लेकिन, मैं कोशिश करता हूं कि मैंने टाइपकास्ट ना हो पाऊं. हालांकि, ये पूरी तरफ एक्टर पर निर्भर करता है. जैसे मां लीजिए, अगर मैं कल वापस से किसी ऑफिसर का रोल करूं तो उसकी कहानी बिलकुल अलग होगी. तो मेरे ऊपर है कि मैं दोनों को कैसे अलग रखूं. इसलिए ये पूरा एक्टर के हाथ में है. हम इंसान की पर्सनालिटी अलग होती है तो उसको उसकी तरफ ही करना चाहिए.
क्या कभी आपको लगा कि स्टारकिड्स के साथ काम करते हुए आपके लिए कुछ दरवाजे देर से खुले?
नहीं, ऐसा नहीं है. मुझे शुरू से ही बहुत प्यार मिला है. मैं तो वो लड़का हूं जो सिर्फ एक फूल देखकर ही खुश हो जाता हूं. मुझे तो पूरा गुलदस्ता मिल गया है. मैं तो बाहर से आकर खुद का नाम बना रहा हूं, तो मुझे मुंबई ने बहुत प्यार मिला है. मुझे अपनी जर्नी बहुत सही लग रही है.
कभी किसी role के लिए ‘न’ सुनकर घर जाकर रोए हैं?
नहीं, ऐसा तो नहीं हुआ है. क्योंकि मैं बिलीव करता हूं कि जो होता है अच्छे के लिए होता है. तो जो मिलाता है वो काफी है. जैसे मैं कोई एक प्रोजेक्ट करने वाला हूं, अगर वो नहीं मिला. लेकिन बदले में मुझे कोई और प्रोजेक्ट मिल गया. इसलिए ऐसा नहीं है कि कभी दुख हुआ है.
Suhana, Khushi और Agastya में से किसके साथ आपकी सबसे ज्यादा tuning थी?
द आर्ची के सबके एक्टर के साथ मेरी अच्छी ट्यूनिंग है. हमारा तो एक व्हाट्सएप ग्रुप है, हम खूब बाते करते हैं. अपने बारे में चीजे शेयर भी करते हैं और आज भी एक दूसरे को एप्रीसिएट करते हैं.