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Nana Patekar Theatre Career: बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के सबसे दमदार कलाकारों में से एक नाना पाटेकर को आज हर कोई जानता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि नाना पाटेकर कभी फिल्मों में काम ही नहीं करना चाहते थे. वह सिर्फ थिएटर की दुनिया में खुश थे और स्टेज पर एक्टिंग करना ही उनका असली सपना था. मगर एक मशहूर एक्ट्रेस ने उनकी जिंदगी बदल दी और उनका हाथ पकड़कर उन्हें बॉलीवुड की दुनिया में ले आईं. आमिर खान के साथ एक खास बातचीत में खुद नाना पाटेकर ने इस बात का खुलासा किया था.
फिल्मों में आने से पहले नाना थियेटर के बढ़िया कलाकार थे और वो सिर्फ थियेटर ही करना पसंद करते थे, लेकिन उन्हें फिल्मों में आने के लिए सिर्फ एक ही एक्ट्रेस ने मनाया और उनका नाम स्मिता पाटिल है. उन्होंने ही नाना से रिक्वेस्ट की कि आपको थियेटर से सिनेमा की तरफ आना चाहिए.
आमिर खान संग जी म्यूजिक कंपनी के ऑन सेट ऑफ स्क्रिप्ट पॉडकास्ट में बात करते वक्त पिछले साल नाना पाटेकर ने बताया था कि वो सिनेमा में आने का श्रेय स्मिता पाटिल को देते हैं. दरअसल, स्मिता ने कहा था कि थियेटर में तो सिर्फ 1000 लोग नाटक देखेंगे, जबकि सिनेमा लाखों-करोड़ों लोग देख पाएंगे. चलिए जानते हैं उन किस्सों के बारे में जिसे नाना पाटेकर ने खुद आमिर खान से चर्चा के दौरान खुलासा किया था.
नाना पाटेकर की पहली फिल्म 'गमन' थी, जिसे उन्होंने स्मिता पाटिल के साथ ही की थी. यह फिल्म 1978 में रिलीज हुई थी और अभी इसकी IMDb पर 7.5 रेटिंग है. इस फिल्म में मुख्य किरदार स्मिता और फारूख शेख ने निभाया था. नाना पाटेकर ने इसमें सपोर्टिंग रोल का किरदार निभाया था. भले ही रोल छोटा था, लेकिन नाना पाटेकर की एक्टिंग ने लोगों का ध्यान खींचा. नाना पाटेकर ने क्रेडिट देते हुए बताया कि स्मिता पाटिल ही हाथ पकड़कर सिनेमा तक ले गई थी और वो भी पुणे से थी. नाना पाटेकर ने बताया कि नाटक में ऑडियंस से तुरंत रिस्पॉन्स मिलता है और तालियां बजती हैं तो उस रिएक्शन की वजह से मुझे थियेटर से लगाव ज्यादा था.
इसी बातचीत के दौरान नाना पाटेकर ने यह भी बताया कि वो फिल्मों का चुनाव कैसे करते हैं. उन्होंने कहा कि वो किसी भी फिल्म को साइन करने से पहले उसकी पूरी स्क्रिप्ट पढ़ते और सुनते हैं. इसके बाद वो खुद को एक आम दर्शक की जगह रखकर सोचते हैं. अगर एक ऑडियंस के तौर पर उन्हें कहानी पसंद आती है, तभी वो फिल्म के लिए हां बोलते हैं. नाना के लिए फिल्म का जॉनर मायने नहीं रखता, बस कहानी में दम होना चाहिए.