विलेन के रोल में भी लोगों को खूब हंसाया: मुश्ताक खान ने ऐसे बदली हिंदी सिनेमा में खलनायकों की परिभाषा; कुछ ऐसा रहा उनकी अदाकारी का यादगार सफर
Mushtaq Khan Memorable Roles: पर्दे पर विलेन का चेहरा देखते ही मन में एक खौफ सा पैदा हो जाता है, लेकिन मुश्ताक खान वो फनकार थे, जिन्होंने विलेन की दुनिया में रहकर भी लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया. ‘सड़क’ और ‘साथी’ के खौफनाक किरदारों से लेकर ‘वेलकम’ के बल्लू तक, उनकी अदाकारी का सफर बेहद दिलचस्प रहा.
हिंदी फिल्मों में विलेन का मतलब आमतौर पर क्या होता है? गुस्से से लाल आंखें, भारी डरावनी आवाज, हाथ में हथियार और हीरो की जान का दुश्मन. बरसों से हमारे सिनेमा में खलनायकों को इसी सांचे में ढाला गया है, लेकिन कुछ कलाकार ऐसे भी आए, जिन्होंने इस तय ढर्रे को तोड़कर विलने की नई परिभाषा लिखी. इन्हीं में एक बेहद खास नाम था मुश्ताक खान का. उनको आप किसी एक खांचे में बंद करके नहीं देख सकते. उन्होंने पर्दे पर सीधे-सादे हंसाने वाले रोल भी किए और गैंगस्टर के खतरनाक गुर्गे भी बने.
मजेदार बात तो ये है कि फिल्मों में कई बार वे विलेन की तरफ खड़े दिखे, मगर अपनी जानदार अदाकारी से उन्होंने उस बुरे किरदार को भी इतना मजेदार बना दिया कि दर्शकों को उनसे नफरत होने के बजाय हंसी आ जाती थी. IMDb भी उनकी इसी खास पहचान को बयां करती है. उनके मुताबिक, मुश्ताक खान का असली दम उनकी गजब की कॉमिक टाइमिंग और चुटकियों में संजीदा रोल से कॉमेडी में बदल जाने की कला थी. यही वजह है कि स्क्रीन पर उनका छोटा सा रोल भी लोगों के दिलों में उतर जाता था.
‘वेलकम’ का बल्लू: नकली टांग का वो किस्सा जो आज भी याद है
अगर आपको ये समझना है कि किसी विलेन के किरदार को मजेदार कैसे बनाया जाता है? तो साल 2007 में आई फिल्म ‘वेलकम’ देख लीजिए. इस फिल्म में मुश्ताक खान ने ‘बल्लू’ का शानदार और यादगार किरदार निभाया था. बल्लू कोई सीधा-साधा इंसान नहीं था. वो फिल्म के गैंगस्टर उदय शेट्टी की गैंग का बाकायदा मेंबर था.
यानी वो क्राइम की दुनिया का आदमी था, जिसके पास हथियार भी थे और गुंडागर्दी का बैकग्राउंड भी, लेकिन जब बल्लू पर्दे पर आता है, तो डर का नामोनिशान गायब हो जाता है खास तौर पर वो सीन, जहां वो अपनी नकली टांग और पुराने दिनों का दर्द भरा किस्सा सुनाता है. वो सीन इतना जबरदस्त हिट हुआ कि आज भी वो फिल्म के सबसे आइकॉनिक सीन्स में शुमार है.
वहां बड़े-बड़े सितारे मौजूद थे, लेकिन मुश्ताक खान ने अपने फेस एक्सप्रेशन और सीधे अंदाज से पूरी महफिल लूट ली. टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी अपनी एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया था कि बल्लू का किरदार उदय शेट्टी की गैंग का हिस्सा था, लेकिन मुश्ताक खान की डेडपैन डिलीवरी ने इसे अमर बना दिया.
‘वेलकम बैक’ में भी मेकर्स को याद आए बल्लू
बल्लू के किरदार में मुश्ताक खान ने बॉलीवुड के बरसों से चली आ रही गुड़ों और गैंगस्टर के मेंबर्स की पूरी इमेज ही उलटकर रख दी थी. बल्लू का जादू सिर्फ पहली फिल्म तक सीमित नहीं रहा. जब साल 2015 में अनीस बज्मी ने ‘वेलकम बैक’ बनाई, तो उन्हें फिर से बल्लू की जरूरत महसूस हुई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहली फिल्म की जबरदस्त सक्सेस के बाद मुश्ताक खान को सीक्वल में भी उसी अंदाज में वापस लाया गया.
हालांकि, पहली फिल्म जैसा जादू दोबारा रचना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने अपनी तरफ से कोई कसन नहीं छोड़ी थी. मुश्ताक खान ने उस किरदार में कितनी जान फूंक दी थी. वो बिना लीड विलेन बने भी पूरी लाइमलाइट अपनी ओर खींचना बखूबी जानते थे.
क्या मुश्ताक खान के लिए विलेन बनना नया था?
आज की पीढ़ी मुश्ताक खान को शायद सिर्फ कॉमेडी की वजह से जानती है, लेकिन उनके करियर की शुरुआत ऐसी बिल्कुल नहीं थी. उन्होंने बाकायदा खौफनाक और सीरियस निगेटिव रोल निभाए थे. बिजनेस टुडे ने उनके एक पुराने इंटरव्यू के हवाले से बताया था कि मुश्ताक खान ने खुद महेश भट्ट की फिल्म ‘सर’ में निभाए अपने किरदार को पूरी तरह निगेटिव माना था.
मजे की बात ये है कि उसी दौर में उनकी एक और फिल्म आई ‘हम हैं राही प्यार के’. इस फिल्म में उन्होंने ‘मिश्रा जी’ का रोल किया था, जो बेहद हल्का-फुल्का और गुदगुदाने वाला था. खुद एक्टर ने माना था कि ‘हम हैं राही प्यार के’ की सक्सेस के बाद बॉलीवुड के डायरेक्टर्स ने उन्हें कॉमेडी रोल में ज्यादा देखना शुरू कर दिया. यानी जो एक्टर अंदर से एक संजीदा कलाकार था, इंडस्ट्री ने उसे कॉमेडी का तमगा थमा दिया.
‘सड़क’ और ‘साथी’: जहां दिखा उनका डरावना रूप
अगर आप 1991 में आई फिल्म ‘सड़क’ देखेंगे, तो आपको यकीन नहीं होगा कि ये वही इंसान है, जिसने बाद में ‘वेलकम’ में सबको हंसाया था. फिल्मोग्राफी रिकॉर्ड्स के मुताबिक, ‘सड़क’ में उन्होंने एक दलाल का बेहद डार्क किरदार निभाया था. इस रोल में रत्ती भर भी कॉमेडी नहीं थी. फिल्म का माहौल बहुत भारी और संजीदा था और मुश्ताक खान ने उस डार्कनेस को अपने चेहरे पर पूरी तरह उतारा था.
उसी साल 1991 में उनकी एक और फेमस फिल्म आई थी ‘साथी’, जिसमें वे ‘शेट्टी’ के किरदार में नजर आए थे. ये भी उनके शुरुआती दौर का एक ऐसा रोल था, जिसमें उनकी एक्टिंग की गहराई साफ नजर आती है. इन दोनों फिल्मों को देखकर समझ आता है कि मुश्ताक अचानक से कॉमेडी किंग नहीं बने. उनके पास थिएटर और संजीदा सिनेमा का मजबूत आधार था, जिसकी बदौलत वे बाद में कॉमेडी को भी इतनी आसनी से कर पाए.
‘जोड़ी नंबर 1’ में अपराध और कॉमेडी का मेल
साल 2001 में डेविड धवन की फिल्म आई थी ‘जोड़ी नंबर 1’. इस फिल्म में गोविंदा और संजय दत्त की जोड़ी थी. ये फिल्म खुद एक क्राइम-कॉमेडी की कहानी थी, जिसमें चोरी, ठगी और माफिया का घालमेल था. इस फिल्म में मुश्ताक खान ‘डीकोस्टा’ के शानदार और यादगार किरदार में नजर आए थे. हालांकि, वे फिल्म के मुख्य विलेन नहीं थे, क्योंकि लीड विलेन के तौर पर सर जॉन और ठकराल जैसे बड़े नाम थे.
लेकिन मुश्ताक खान ने ‘डीकोस्टा’ के रोल में जो जान डाली थी, उसने लोगों को गुदगुदाने को पर मजबूर कर दिया था. उन्होंने डीकोस्टा के रोल में भी फिल्म के माहौल को काफी मजेदार और हल्का बना दिया था. उनके इस तरह के रोल दिखाते हैं कि कैसे मुश्ताक खान फिल्मों में क्राइम की दुनिया में भी अपनी मौजूदगी से माहौल को मजेदार बना देते थे. वे जब भी पर्दे पर आते, सीन में एक अलग ही ताजगी आ जाती थी.
छोटे रोल को यादगार बनाने की जादुई कला
मुश्ताक खान की सबसे बड़ी खूबी यही थी कि उन्हें कभी फिल्म के हीरो या लीड विलेन बनने की होड़ नहीं रही. वो चंद मिनटों के रोल में भी ऐसी छाप छोड़ जाते थे कि लोग सालों तक उनके डायलॉग दोहराते रहते थे. ‘हेरा फेरी’ हो, ‘वेलकम’ हो या फिर 90 के दशक की अनगिनत फिल्में, उनका चेहरा हर सिनेमा प्रेमी के दिल में बस चुका था. 24 सितंबर 2026 को जब उनके दुनिया से जाने की खबर आई, तो हर किसी की आंखें नम हो गईं.
सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके लंबे करियर के कई यादगार सीन्स शेयर किए, लेकिन सबसे ज्यादा याद ‘बल्लू’ और उसकी कॉमिक टाइमिंग को ही किया गया. मुश्ताक खान ने हमें ये सिखाया कि विलेन का मतलब सिर्फ खून-खराबा या नफरत नहीं होता. अगर कलाकार में दम हो, तो वो खलनायक की टोली में खड़ा होकर भी दुनिया के चेहरे पर मुस्कान बिखेर सकता है. उनका नाम भले ही किसी को फौरन याद न आए, लेकिन उनका चेहरा देखते ही हर हिंदुस्तानी के चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान अपने आप तैर जाती है.
मुश्ताक खान का फिल्मी सफर
मुश्ताक खान का फिल्मी सफर करीब पांच दशकों तक चला. उन्होंने 1975 के आसपास अभिनय की दुनिया में शुरुआत की थी और 2026 तक उनका करियर लगभग 51 साल का हो चुका था. Film Information के मुताबिक, उन्होंने अपने लंबे करियर में 500 से ज्यादा फिल्मों के साथ कई टीवी सीरियल, वेब सीरीज और नाटकों में काम किया.
उनकी फेमस फिल्मों में ‘आशिकी’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘राजा’, ‘हेरा फेरी’, ‘गदर: एक प्रेम कथा’, ‘जोड़ी नंबर 1’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘वेलकम’, ‘वांटेड’, ‘ओह माय गॉड!’, ‘स्त्री’, ‘गदर 2’, ‘स्त्री 2’ और ‘जाट’ शामिल हैं. कॉमेडी से लेकर नेगेटिव किरदारों तक उनकी जबरदस्त रेंज रही.