SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

चीन का जिक्र, हिंसा और ड्रग्स: CBFC के नियमों में क्या-क्या बदला? आसान भाषा में समझिए पूरी गाइडलाइन

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्मों के सर्टिफिकेशन से जुड़े नए नियम जारी किए हैं. इन गाइडलाइंस में चीन, हिंसा, ड्रग्स और फिल्मों के टाइटल को लेकर कई अहम प्रावधान बताए गए हैं. जानिए नए नियमों में क्या बदला है...

Written By Swati Singh
Published: Sep 17, 2026, 05:26 PM IST | Updated: Sep 17, 2026, 05:30 PM IST
Image Credit: PC: AI
Join

लगभग एक दशक बाद केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC की सर्टिफिकेशन गाइडलाइन एक बार फिर चर्चा में है. दरअसल, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बुधवार को CBFC का पुनर्गठन किया है. 18 सदस्यों वाले बोर्ड में फिल्म और मनोरंजन जगत की कई जानी-मानी हस्तियों को शामिल किया गया है.

इस बोर्ड में एक्टर पंकज त्रिपाठी, प्रीति जिंटा और रुपाली गांगुली समेत कई चर्चित नाम शामिल हैं. साथ ही मंत्रालय की ओर से फिल्मों को सर्टिफिकेट देने से जुड़े संशोधित गाइडलाइन भी सुर्खियों में है. नई गाइडलाइन में फिल्मों के नाम और सर्टिफिकेशन प्रोसेस से जुड़े कई पहलुओं को लेकर नियम साफ किए गए हैं.

CBFC ने फिल्म सर्टिफ़िकेशन प्रोसेस के लिए संशोधित गाइडलाइंस

इन गाइडलाइंस में उन उद्देश्यों को बताया गया है जिन पर CBFC को फिल्मों को थिएटर में दिखाने के लिए सर्टिफ़िकेट देने से पहले विचार करना चाहिए. अन्य प्रावधानों के अलावा, इनमें कहा गया है कि फ़िल्मों को समाज के मूल्यों और मानकों के प्रति ज़िम्मेदार और संवेदनशील होना चाहिए. जबकि सर्टिफ़िकेशन प्रोसेस को सामाजिक बदलावों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए. इसमें  यह भी कहा गया कि हिंसा को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए और अपराधियों के काम करने के तरीकों या अपराध करने के लिए उकसाने वाले दृश्यों और शब्दों को नहीं दिखाया जाना चाहिए.

फिल्मों से दूसरे देशों के साथ दोस्ताना रिश्तों पर बुरा असर!

गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि ऐसे दृश्य या शब्द नहीं दिखाए जाने चाहिए, जो सांप्रदायिक, अंधविश्वासी या देश-विरोधी सोच को बढ़ावा देते हों. साथ ही, इनमें यह भी कहा गया है कि फिल्मों से दूसरे देशों के साथ भारत के दोस्ताना रिश्तों पर बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए. यह नियम भारत-चीन तनाव पर बेस्ड फिल्मों के लिए अहम हो सकता है. खासकर ऐसे समय में जब दोनों देश अपने आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

बता दें कि सलमान खान की आने वाली वॉर ड्रामा फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' (जिसका पहले नाम 'गलवान अटैक' था) चर्चा में है. यह फिल्म 2020 में हुई गलवान झड़प के बाद भारत और चीन के बीच बढ़े मिलिट्री तनाव पर आधारित है. हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, फ़िल्म को CBFC सर्टिफ़िकेशन मिलने में देरी हो रही है और कहा जा रहा है कि इस देरी की एक वजह फ़िल्म का चीन से जुड़ाव है.

इससे पहले, सलमान खान की फिल्म को लेकर बनी अनिश्चितता पर बात करते हुए एक सूत्र ने 'स्क्रीन'को बताया, 'गलवान की लड़ाई का जिक्र होने से कई लोगों को आपत्ति हुई थी. इसलिए अब कोशिश यह है कि ऐसी किसी और कंट्रोवर्सी से बचा जाए. इसलिए, फिल्म में चीन का सीधे तौर पर कोई ज़िक्र नहीं है. यह वैसा ही है जैसे जब भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सुधर रहे थे, तब पाकिस्तान को 'पड़ोसी मुल्क' कहा जाता था. 'धुरंधर' फ़िल्म की तरह, जिसमें पाकिस्तान का ही बोलबाला था. सलमान की फिल्म ऐसा रिस्क नहीं ले सकती, क्योंकि भारत के लिए चीन की स्थिति पाकिस्तान जैसी नहीं है.'

नशीली दवाओं को ना कहें

सर्टिफ़िकेशन के नए नियमों में ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों (दिमाग पर असर करने वाले नशीले पदार्थ) को दिखाए जाने के बारे में भी खास नियम शामिल हैं. इनके सेवन, इस्तेमाल या तस्करी वाले दृश्यों के साथ एक कानूनी चेतावनी या डिस्क्लेमर दिखाना ज़रूरी है कि गैर-कानूनी नशीले पदार्थ सेहत को बर्बाद करते हैं और जेल की सजा दिलाते हैं. नशीली दवाओं को ना कहें.'

गाइडलाइंस में ऐसे कंटेंट के प्रति भी चेतावनी दी गई है जो लोगों की भावनाओं या संवेदनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं. साथ ही बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, महिलाओं के खिलाफ अपराध और गैर-जरूरी या टाली जा सकने वाली हिंसा को दिखाए जाने पर भी रोक है.

कैटेगरी में बांटी जाएगी फिल्में

फिल्में, जो तय शर्तों को पूरा करती हैं. उन्हें उनके नेचर, कंटेंट और थीम के आधार पर UA, UA 7+, UA 13+, UA 16+ या A कैटेगरी में सर्टिफ़ाई किया जा सकता है. गाइडलाइंस में कहा गया है कि अगर कोई फिल्म दूसरी शर्तें पूरी करने के बावजूद बच्चों या किशोरों के लिए सही नहीं मानी जाती है, तो उसे सिर्फ एडल्ट दर्शकों के लिए सर्टिफ़ाई किया जाना चाहिए.

बिना किसी रोक-टोक के सार्वजनिक रूप से दिखाए जाने वाली फ़िल्मों के लिए बोर्ड को यह भी पक्का करना होता है कि फिल्म का कंटेंट परिवार के साथ देखने लायक हो. यानी परिवार के सभी सदस्य, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं. फ़िल्म को एक साथ देख सकें. अगर बोर्ड को लगता है कि किसी फिल्म के स्वभाव, कंटेंट या विषय के लिए माता-पिता की देखरेख (parental guidance) की जरूरत है. तो उसे UA 7+, UA 13+ या UA 16+ कैटेगरी में रखा जा सकता है.

विवादों के बावजूद, कुछ नियम एक जैसे ही-

हाल के सालों में, CBFC के साथ बातचीत को लेकर कई फ़िल्में चर्चा में रही हैं. इनमें ऐसे मामले भी शामिल हैं जिनमें फ़िल्ममेकर्स को सर्टिफ़िकेशन से पहले फ़िल्म के टाइटल या दूसरी चीज़ों में बदलाव करने के लिए कहा गया था.

इसका एक अहम उदाहरण मलयालम फ़िल्म 'जानकी वर्सेस स्टेट ऑफ़ केरल' है. CBFC ने फिल्म के ओरिजिनल टाइटल पर 'जानकी' पर आपत्ति जताई थी. क्योंकि ये देवी सीता से भी जुड़ा है. फ़िल्म के लीड किरदार के लिए इस्तेमाल किया गया था, जो यौन उत्पीड़न की शिकार थी. यह मामला बाद में केरल हाई कोर्ट पहुंचा और टाइटल बदलकर 'जानकी वर्सेस स्टेट ऑफ केरल' करने के बाद फिल्म को मंज़ूरी मिल गई.

विवाद ने एक बड़ी बहस को भी दिया जन्म

केरल हाई कोर्ट ने इस आपत्ति पर सवाल उठाए और ऐसी कई फिल्मों का जिक्र किया, जिनके नाम हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े हैं. ऐसे विवादों के बीच फ़िल्मों के टाइटल से जुड़ी गाइडलाइंस काफ़ी अहम हो जाती हैं. इनमें कहा गया है कि बोर्ड को फिल्मों के टाइटल की बारीकी से जांच करनी चाहिए और यह पक्का करना चाहिए कि वे भड़काऊ, अश्लील, आपत्तिजनक न हों या सर्टिफ़िकेशन गाइडलाइंस का उल्लंघन न करते हों.

ऐसे में अब नए नियमों में फिल्म निर्माताओं और सर्टिफ़िकेशन बोर्ड के सामने कई बातें रखी गई हैं. इसमें हिंसा, ड्रग्स और सामाजिक संवेदनाओं से लेकर ऐसे दृश्यों तक, जिनका असर दूसरे देशों के साथ भारत के रिश्तों पर पड़ सकता है.
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

स्वाति सिंह एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह Zee News Hindi की डिजिटल टीम के एंटरटेनमेंट (मनोरंजन) सेक्शन में काम कर रही हैं. स्वाति की एक्सपर्टीज बॉलीवुड न्यूज़, सिनेमा, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ट्रेंड्स और सेलेब्स की इन-डेप्थ रिपोर्टिंग में है.अपने करियर के दौरान स्वाति ने आयुष्मान खुराना, नीना गुप्ता, गजराज राव और ध्वनि भानुशाली जैसी कई जानी-मानी बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री की हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं. Zee News से पहले उन्होंने अमर उजाला, लाइव हिंदुस्तान और लोकमत जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, जहां काम के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से मास कम्युनिकेशन और सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की डिग्री हासिल करने वाली स्वाति, मनोरंजन जगत की खबरों को पाठकों तक रोचक और सटीक ढंग से पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.आप स्वाति सिंह से swati.kumari@india.com पर सीधे ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES