हिंदी सिनेमा के 90 और 2000 के दशक में कई ऐसे चेहरे सामने आए, जिन्होंने अपनी सादगी और बेहतरीन अदाकारी से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई. उस दौर में बड़े पर्दे पर एक ऐसे कलाकार की एंट्री हुई, जिसकी तुलना शाहरुख खान और सलमान खान से होने लगी थी. उसकी आवाज में ठहराव था और चेहरे पर मासूमियत. आज वो एक्टर अपना 58वां जन्मदिन मना रहे हैं. चॉकलेटी लुक और संजीदा एक्टिंग के दम पर उन्होंने उस जमाने के कई बड़े कलाकारों के बीच अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई. उनकी फिल्मों के गाने आज भी लोगों की जुबान पर ताजा रहते हैं.
हालांकि, साल 2000 में गोवा में वॉटर-स्कीइंग (या जेट-स्कीइंग) के दौरान वे एक हादसे का शिकार हो गए, जिसमें उनका दायां कंधा बुरी तरह डिस्लोकेट हो गया और गंभीर चोट आई. इस चोट और लंबे इलाज की वजह से उन्हें कई साल फिल्मों से दूर रहना पड़ा, जिसका असर उनके करियर पर पड़ा और आज वे ज्यादातर साइड रोल में नजर आते हैं. 11 अक्टूबर 1968 को जन्म इस कलाकार का ताल्लुक एक बेहद रसूखदार घराने से है. उनके पिता कैप्टन बलदेव सिंह उत्तर प्रदेश के खैर से विधायक रहे, जबकि मां कृष्णा कुमारी देवी ओडिशा के बोलांगीर राजघराने से ताल्लुक रखती थीं.
देहरादून के मशहूर दून स्कूल और वेल्हम बॉयज स्कूल से पढ़ाई के बाद उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से डिग्री ली. कॉलेज के बाद उनका इरादा यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की सिविल सेवा एग्जाम पास करके IAS अफसर बनने का था. उनके भाई अभिमन्यु सिंह और आदित्य सिंह भी फिल्म प्रोडक्शन से जुड़े. इस वर्सेटाइल वाले एक्टर का नाम चंद्रचूड़ सिंह है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक बच्चों को तराशने का काम किया. वे एक सधे हुए क्लासिकल सिंगर भी हैं, इसलिए एक्टिंग में कदम रखने से पहले उन्होंने दिल्ली के वसंत वैली स्कूल में बच्चों को संगीत सिखाया.
इसके अलावा उन्होंने अपने पुराने स्कूल द दून स्कूल में इतिहास के टीचर के तौर पर भी काम किया. स्कूल में पढ़ाने के दौरान ही उनके दिल में अभिनय की दुनिया में जाने की ख्वाहिश जगी. उन्होंने नौकरी छोड़कर फिल्मों का रुख किया और सही मौके का इंतजार करने लगे. उनका मानना था कि कला के हर रूप को सीखने से इंसान का नजरिया बेहतर होता है. साल 1996 में चंद्रचूड़ सिंह ने अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ABCL) की फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ से अपने करियर की शुरुआत की. फिर इसी साल आई गुलजार की फिल्म ‘माचिस’ ने उनके पूरे करियर का रुख बदल दिया.

पंजाब के सेंसिटिव हालात पर बनी इस फिल्म में उनके सीरियस रोल ने ऑडियंस के साथ क्रिटिक्स को भी हैरान कर दिया. इस यादगार एक्टिंग के लिए उन्हें बेस्ट मेल डेब्यू का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. इस बड़ी सक्सेस ने उन्हें रातों-रात एक बड़ा स्टार बना दिया और इंडस्ट्री के बड़े प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स उनके साथ काम करने के लिए आगे आने लगे. ‘माचिस’ की जबरदस्त सक्सेस के बाद चंद्रचूड़ ने कई यादगार फिल्मों में काम किया. उन्होंने शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय के साथ फिल्म ‘जोश’ में काम किया, जिसमें उनके रोल को खूब पसंद किया गया. इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया.

उनकी फिल्मों की लिस्ट में ‘दाग: द फायर’, ‘क्या कहना’, ‘दिल क्या करे’ और ‘आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया’ शामिल है, जिन्होंने उन्हें घर-घर में मशहूर बनाया. वे पर्दे पर ज्यादातर रोमांटिक हीरो के रोल में नजर आते थे. उनकी सादगी भरी मुस्कान और आंखों से बात करने का सलीका लोगों को बेहद पसंद आया, जिससे उस दौर में उनकी एक अलग फैन फॉलोइंग तैयार हुई. सक्सेस के साथ-साथ चंद्रचूड़ की पर्सनल लाइफ में भी कई बड़े मोड़ आए. उन्होंने साल 1999 में अवंतिका कुमारी के साथ शादी की थी.
हालांकि, ये रिश्ता लंबे समय तक नहीं चल सका और दोनों आपसी सहमति से अलग हो गए. दोनों का एक बेटा भी है, जिसकी परवरिश में वे हमेशा आगे रहे. शादी टूटने और जीवन में आई दिक्कतों के बाद भी उन्होंने खुद को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया. स्क्रीन पर भले ही उनकी मौजूदगी कुछ समय के लिए कम हुई हो, लेकिन ऑडियंस के दिलों में उनकी फिल्मों और सादगी भरे किरदारों की यादें आज भी वैसी ही हैं.