हिंदी सिनेमा की सबसे पहली और पॉपुलर कैबरे डांसर क्वीन कही जाने वाली हेलेन ने अपनी खूबसूरती और अलग डांस स्टाइल से लाखों लोगों के दिलों पर राज किया है. 'पिया तू अब तो आजा', 'आओ ना गले लग जाओ ना', 'ये मेरा दिल', 'आ जाने जा', 'महबूबा' जैसे सुपरहिट गाने तो आपने बहुत बार सुने होंगे. इनके गानों पर लोग आज भी थिरकते हैं. हेलेन ने अपने सुपरहिट गानों पर अपनी एनर्जी से डांस को नए पैमाने पर पहुंचाया है. यह उस जमाने की बात है, जब फिल्मों में नाच-गाना करने वाली हीरोइनों को सम्मान से नहीं देखा जाता था.
एक दौर था, जब हेलेन की एक नजर पाने के लिए फैंस की ऐसी भीड़ उमड़ती थी कि उन्हें बचने के लिए बुर्का पहनना पड़ता था और छिपते-छिपाते कहीं निकलना पड़ता था. आपको जानकर हैरानी होगी कि यह रुतबा हिंदी सिनेमा के इतिहास में किसी और डांसर के पास नहीं था. एक वक्त ऐसा भी आया, जब टाइपकास्ट होने के बाद हेलेन पर व्हाइट स्किन वेस्टर्न वैंप का ठप्पा लगा था.
बॉलीवुड की पहली 'आइटम गर्ल' कही जाने वाली हेलेन को दर्शकों ने दशकों तक सिर-आंखों पर बिठाए रखा था. उनकी कला का लोग आज भी सम्मान करते हैं. आज भले ही हेलेन चकाचौंध भरी दुनिया से दूर हों, लेकिन उनकी कला के कद्रदान आज भी उनका सम्मान करते हैं. उन्होंने 'मेरा नाम चिन चिन चू', 'यम्मा-यम्मा', 'ओ हसीना जुल्फों वाली', 'मोनिका, ओ माय डार्लिंग' जैसे आइटम नंबर्स दिए हैं.

हेलेन का जन्म 21 अक्टूबर 1938 को बर्मा में हुआ था. उनका पूरा नाम हेलेन ऐन रिचर्डसन है. मूल रूप से उनकी मां बर्मा की थीं और पिता का निधन हो चुका था. उनके परिवार में मां के अलावा एक भाई और एक सौतेली बहन जेनिफर थीं. उनकी मां ने एक ब्रिटिश सैनिक से दूसरी शादी की थी, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध में उनकी भी मौत हो गई थी. जापान ने बर्मा पर कब्जा कर लिया था, तो हेलेन के पूरे परिवार ने मुंबई आकर बसने का फैसला किया था. इस यात्रा के दौरान उन्हें जंगलों और गांवों से गुजरना पड़ा था. एक्ट्रेस की मां और भाई-बहन बुरी तरह भूख से बिलख रहे थे और उस वक्त ग्रामीण लोगों ने उन्हें अपने घर में रखा और खाना दिया था. कभी-कभी किसी ब्रिटिश जवान को भी उनकी हालत पर तरस आ जाता था, तो वह भी उनकी मदद कर देता था. सभी के पैरों में चलते-चलते छाले तक पड़ गए थे, लेकिन मंजिल अभी भी उनसे काफी दूर थी. न जाने कितने ही मासूम लोगों ने चलते-चलते अपनी जान गंवा दी थी.

हेलेन का फिल्मी सफर फिल्म 'शबिस्तान' से शुरू हुआ था. इस ग्रुप डांसिंग में हेलेन ने अपने डांस से सभी का दिल जीत लिया था. धीरे-धीरे उस भीड़ के साथ डांस करते-करते उन्हें फिल्मों में सोलो डांस के ऑफर आने लगे. इसके बाद उन्होंने फिल्म 'अलिफ लैला' और 'हूर ए अरब' में सोलो डांस किया, जिसमें उन्हें देखने के बाद मेकर्स ने दांतों तले उंगलियां दबा ली थीं. फिर उन्होंने 'हावड़ा ब्रिज', 'चाइना टाउन', 'कश्मीर की कली', 'एन इवनिंग इन पेरिस', 'आराधना', 'अमर प्रेम' जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम किया. 'हावड़ा ब्रिज' में हेलेन को एक आइटम सॉन्ग मिला था, जिसका नाम 'चिन चिन चू' था. इस एक गाने से उन्हें इतना ज्यादा फेम मिला कि वह देखते ही देखते पहली आइटम गर्ल बन गईं.
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प्यार के रास्ते अजीब होते हैं, लेकिन आखिरकार वह अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाता है. यह बात एक्ट्रेस हेलेन और सलमान खान के पिता, लेखक सलीम खान के मामले में बिल्कुल सटीक बैठती है. जब सलीम ने 1980 में एक्ट्रेस हेलेन से शादी करने का फैसला किया, तब वह पहले से शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी थे. उस समय सलीम की उम्र 45 साल और हेलेन की उम्र 42 साल थी, जो शादी के लिए कोई आम उम्र नहीं मानी जाती. लेकिन उनका रिश्ता समय के साथ और भी मजबूत होता गया था. शादी ने बस इस रिश्ते को एक औपचारिक रूप दे दिया और समाज की मंजूरी दिला दी.
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हेलेन की मां एक नर्स के तौर पर काम करती थीं और अपनी कमाई से घर का खर्च नहीं चला पाती थीं. इसी वजह से हेलेन को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और परिवार की मदद के लिए काम खोजना पड़ा. हेलेन ने सलीम खान से शादी की और उनकी दूसरी पत्नी बनीं. सलीम की पहली शादी पहले ही हो चुकी थी और उनकी पहली पत्नी से उनके बेटे सलमान, अरबाज और सोहेल खान हैं. बाद में, अपनी कोई संतान न होने पर हेलेन और सलीम ने अर्पिता खान को गोद ले लिया.
कहा जाता है कि हेलेन की मुलाकात 1962 में 'काबिल' फिल्म के दौरान सलीम खान से हुई थी. 17 साल की उम्र में हेलेन को 'हावड़ा ब्रिज' फिल्म में एक बड़ा ब्रेक मिला और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2009 में भारत सरकार ने हेलेन को पद्म श्री से सम्मानित किया. इसके अलावा, 1999 में उन्हें फिल्मफेयर का 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड' और 1980 में फिल्म 'लहू के दो रंग' के लिए 'बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस' का अवॉर्ड मिला था.