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Hanuman Ansh Parvati Song: फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त धमाल मचा रही है और इसका गाना 'पार्बती' ('जब जिद पे आ गई पार्वती') इन दिनों लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है. बच्चे से लेकर बड़े तक इस ब्यूटीफुल गाने की फेमस लाइनों को गुनगुना रहे हैं. हालांकि, इस गाने की एक लाइन के एक शब्द को लेकर लोगों के बीच काफी कन्फ्यूजन बना हुआ है और बहुत से लोग इसे गलत गा रहे हैं.
दरअसल, बड़ी संख्या में लोग गाने की लाइन 'काय जिद कर रही, काय को मर रही' गा रहे हैं. जबकि इसके सही और असली लिरिक्स 'काय जिद कर रही, काय को खुमर-रही, ऐसे वर के लाने' हैं. सोशल मीडिया रील्स और शॉर्ट वीडियो के जरिए गाना तेजी से लोकप्रिय होने की वजह से कई लोगों ने इसे सुनने के हिसाब से गलत समझ लिया और वह गलत वर्जन आगे शेयर होने लगा.
इस गाने की चर्चा ऐसे समय में और बढ़ गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसे गुनगुनाते नजर आए. पीएम मोदी 25 सितंबर को दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय पार्क में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर आयोजित 'भजन क्लबिंग' कार्यक्रम में शामिल हुए थे. इस दौरान वे युवाओं के साथ बैठकर हाथों में खंजरी थामे गुजराती और हिंदी भजनों की धुन पर झूमते दिखे और उन्होंने 'पार्वती' गाना भी गुनगुनाया.
दरअसल, बता दें कि 'खुमर रही' एक बुंदेली भाषा का शब्द है. बुंदेलखंडी लोक बोली में 'खुमर रही' शब्द का भाव बहुत ही गहरा और प्यारा है. गाने के पूरे संदर्भ में इसका साफ भाव भी स्पष्ट होता है. गाने में जब ऋषि माता पार्वती को समझाने पहुंचते हैं, तो वे भगवान शिव के गले में सांप, सिर पर गंगा और उनके वैरागी रूप का वर्णन करते हैं. वे पार्वती जी से सवाल करते हैं कि वे ऐसे अवधूत वर को चुनने के लिए इतनी जिद क्यों कर रही हैं. 'खुमर रही' शब्द का मतलब तीव्र चाह और जिद होता है.
'खुमर रही' को अगर कोई गलती से 'को मर रही' सुनता या लिखता है, तो पूरी लाइन का अर्थ अलग नजर आने लगता है. वहीं, मूल लिरिक्स में इस्तेमाल हुआ लोकभाषा का यह देसी शब्द गीत को उसके पारंपरिक और प्रामाणिक रंग से जोड़ता है. फिल्म 'हनुमान अंश' का यह गाना भक्ति, लोक संस्कृति और सिनेमाई संगीत का एक बेहतरीन संगम है.
जब जिद पे आ गई पार्वती पार्वती पार्वती
समझाने पहुंचे सप्तऋषि सप्तऋषि सप्तऋषि
काय जिद कर रही, काय खुमर रही
काय जिद कर रही, काय खुमर रही
ऐसे वर के लाने,
काय जिद कर रही,
काय खुमर रही,
ऐसे वर के लाने,
जाके सीस पे गंगा और गले में, डाले फिर रहे सांप
जाके सीस पे गंगा और गले में, डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ
जाके सीस पे गंगा और गले में, डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ
ना खपरा ना छपरा
ना फूस की धरे मड़इया
का खावे को धरो वहां
बस रोवत रहत लड़इया
ना खपरा ना छपरा
ना फूस की धरे मड़इया
का खावे को धरो वहां
बस रोवत रहत लड़इया
भेष धरे अवधूत फिरे
अब तुमसे का कहे बिन्नू
डोरा डांगर ले घूमें
वे इनके कछुए नइयां
वे इनके कछुए नइयां
काय जिद कर रही
काय तप कर रही
काय जिद कर रही
काय खुमर रही
ऐसे वर के लाने
हां ऐसे वर के लाने
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ
शंभु.. शिव शंभु, भोलेनाथ
जटा लटा न कबहुं संवारे
दीसत महा भयंकर
मूड़ पे आधो चंदा और
बेला पे घूमे शंकर
जटा लटा न कबहुं संवारे
दीसत महा भयंकर
मूड़ पे आधो चंदा और
बेला पे घूमे शंकर
राम नाम के रसिया हैं वे
और उन्हें क्या चाहने
कामदेव के मर्दनहारी
घर-गृहस्थी क्या जाने
वे घर-गृहस्थी क्या जाने
काय जिद कर रही
काय खुमर रही
अरे काय जिद कर रही
काय तप कर रही
ऐसे वर के लाने
तेन्नू ऐसे वर के लाने
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ
भोले बम भोले
भोले बम भोले
भोले बम भोले
जय जय शिवशंभु