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Explainer: बॉलीवुड से पहले की है India-Iran की फिल्मी दोस्ती, 90 साल पहले साथ बनाया था सिनेमा का इतिहास

आज हम आपको बताएंगे भारत और ईरान के बीच सिनेमा के उस पुराने रिश्ते के बारे में, जिसकी शुरुआत बॉलीवुड के मशहूर दौर से भी पहले हो चुकी थी. यह कहानी दोनों देशों के बीच बने एक अनोखे सिनेमाई पुल की झलक देती है.

Written By Swati Singh
Published: Sep 12, 2026, 02:08 PM IST | Updated: Sep 12, 2026, 02:25 PM IST
Image Credit: Photo: AI
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आज राजधानी में BRICS समिट के लिए कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष दिल्ली पहुंचे हैं. इसमें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी शामिल हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं, भारत और ईरान के रिश्ते सिर्फ राजनीति और कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों का एक दिलचस्प सिनेमाई कनेक्शन भी रहा है. इसमें और भी खास ये है कि ये कनेक्शन बॉलीवुड के दौर से भी पुराना है. यह कहानी कई दशकों पुरानी है. दरअसल, जब भारत में हिंदी सिनेमा खुद अपनी जगह बनाने की कोशिश में जूता था. उस दौर में मुंबई में एक ऐसी फिल्म तैयार हो रही थी. इस फिल्म की भाषा हिंदी नहीं, बल्कि फारसी थी. वहीं, फिल्म की कहानी ईरान की थी और कलाकारों और क्रिएटिव टीम में ईरानी लोग शामिल थे और फिल्म बनाने का पूरा आधार भारत में मौजूद था.

हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं, उसका नाम था The Lor Girl. इसमें फारसी में Dokhtar-e Lor कहा गया. यह फिल्म भारत में बनी पहली फारसी भाषा की साउंड फिल्मों में गिनी जाती है. साथ ही इस फिल्म में ईरानी सिनेमा के इतिहास में भी इसका खास जगह है. इस फिल्म को बॉम्बे स्थित Imperial Film Company के बैनर बनाया गया था और इसके पीछे भारतीय फिल्ममेकर Ardeshir Irani और ईरानी लेखक-कलाकार Abdolhossein Sepanta की साझेदारी थी. फिल्म को लेकर सबसे दिलचस्प बात यही है कि इसे भारत में बनाया गया, लेकिन इसकी कहानी, भाषा और सांस्कृतिक पहचान ईरान से जुड़ी थी.

जब हिंदी सिनेमा अभी अपनी जमीन तलाश रहा था

आज भले ही भारत की फिल्म इंडस्ट्री को दुनिया के सबसे बड़े फिल्म उद्योगों में गिना जाता है. लेकिन उस दौर में ये बिल्कुल अलग था. तब मूक फिल्मों के बाद बोलती फिल्मों का दौर अभी शुरू ही हुआ था और फिल्ममेकर नई तकनीक, नई कहानियों और नए दर्शकों के साथ प्रयोग कर रहे थे. इसी दौर में Ardeshir Irani का नाम तेजी से उभरा.

बता दें कि उन्होंने भारतीय सिनेमा की पहली बोलती फिल्म आलम आरा बनाई थी. फिर उनका स्टूडियो और उनका फिल्ममेकिंग नेटवर्क सिर्फ भारतीय भाषाओं तक सीमित नहीं रहा. ईरानी ने अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के लिए फिल्म बनाने की संभावनाएं तलाशनी शुरू कीं.

वहीं, दूसरी ओर Abdolhossein Sepanta ईरान से जुड़े ऐसे रचनाकार थे, जो सिनेमा के जरिए फारसी भाषा और ईरानी संस्कृति को बड़े पर्दे तक पहुंचाना चाहते थे. ऐसे में जब दोनों की मुलाकात हुई तो एक ऐसी फिल्म का बनी, जिसकी कल्पना भी उस समय आसान नहीं थी.

The Lor Girl को ईरान की पहली फारसी भाषा की साउंड फिल्म के रूप में जाना जाता है. फिल्म की कहानी ईरान के Lorestan क्षेत्र पर बेस्ड है. वहीं, फिल्म एक लड़की गुलनार के इर्द-गिर्द की कहानी थी, जिसकी जिंदगी बचपन में ही हिंसा और अपराध की दुनिया से जुड़ जाती है.

The Lor Girl आखिर थी क्या?

फिल्म में गुलनार के परिवार पर हमला होता है और वह डाकुओं के कब्जे में पहुंच जाती है. फिर आगे चलकर वह एक चायखाने में डांस करने वाली लड़की के रूप में जिंदगी बिताती है. तभी उसकी मुलाकात जाफर से होती है. जाफर सरकार की तरफ से इलाके में फैली डकैती और अव्यवस्था को खत्म करने के लिए आया है. लेकिन दोनों के बीच लव स्टोरी शुरू होती है और दोनों भागने का फैसला करते हैं. लेकिन डाकुओं का सरदार Qoli Khan उनके रास्ते में आ जाता है. जाफर को अपने साथ शामिल करने की कोशिश की जाती है, लेकिन वह इनकार कर देता है. इसके बाद गुलनार की मदद से दोनों वहां से निकलने की कोशिश करते हैं.

कहानी का एक बड़ा हिस्सा उस समय के ईरान में कानून व्यवस्था और राजनीतिक बदलाव की तरफ इशारा करता है. आखिर में गुलनार और जाफर भारत पहुंचते हैं. बाद में जब उन्हें पता चलता है कि ईरान में नई सरकार के आने के बाद हालात बदल चुके हैं, तो वे वापस ईरान लौट जाते हैं. इस फिल्म में सिर्फ लव स्टोरी नहीं है, इसमें उस दौर के ईरान के सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की झलक भी दिखाई गई थी.

ईरान की कहानी भारत में क्यों बनी?

इसका जवाब उस समय के फिल्ममेकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में छिपा है. दरअसल, बॉम्बे उस समय भारतीय सिनेमा का एक बड़ा केंद्र बन रहा था. यहां स्टूडियो, तकनीकी विशेषज्ञ और फिल्म बनाने की सुविधाएं मौजूद थीं. Imperial Film Company के पास वह आधार था, जिसके जरिए फारसी भाषा की फिल्म बनाई जा सकती थी. फिर Ardeshir Irani खुद भारतीय सिनेमा के शुरुआती बड़े फिल्ममेकर्स में थे और उनकी पारसी पृष्ठभूमि का ईरान से ऐतिहासिक सांस्कृतिक रिश्ता भी था.

इस फिल्म ने एक तरह से यह भी दिखाया कि सिनेमा की सीमाएं राजनीतिक नक्शे से हमेशा तय नहीं होतीं. कहानी ईरान की हो सकती है, भाषा फारसी हो सकती है और फिल्म का निर्माण बॉम्बे में हो सकता है. उस समय यह अपने आप में एक बड़ा प्रयोग था.

फिर आया Subah-O-Sham का दौर

The Lor Girl के बाद भारत और ईरान के बीच सिनेमाई कनेक्शन खत्म नहीं हुआ. कई दशकों बाद यह रिश्ता एक बार फिर एक ऐसी फिल्म में नजर आया, जिसमें दोनों देशों के कलाकार और फिल्म इंडस्ट्री सीधे साथ आए. यह फिल्म थी Subah-O-Sham. इस फिल्म को ईरान में Humaye Saadat के नाम से भी जाना गया. फिल्म का निर्देशन तपी चाणक्य ने किया था और इसमें भारत की वहीदा रहमान और संजीव कुमार के साथ ईरान के पॉपुलर एक्टर मोहम्मद अली फरदीन नजर आए.

इस बार कहानी का बड़ा हिस्सा ईरान के तेहरान में था. वहीदा रहमान ने शिरीन का रोल निभाया, जबकि फरदीन और संजीव कुमार ने अहम भूमिकाएं निभाईं. फिल्म को हिंदी और फारसी दोनों रूपों में तैयार किया गया. 
यानी The Lor Girl में जहां ईरान की कहानी भारत के स्टूडियो तक आई थी, वहीं Subah-O-Sham के दौर तक भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ईरान की जमीन पर जाकर फिल्म बना रही थी.

वहीदा रहमान का ईरान कनेक्शन

वहीदा रहमान का Subah-O-Sham से जुड़ना इस रिश्ते को और खास बनाता है. जब ये फिल्म बनी तब एक्ट्रेस भारतीय सिनेमा की पॉपुलर एक्ट्रेसेस में शामिल थीं. उनका ईरानी फिल्म प्रोजेक्ट में काम करना सिर्फ एक विदेशी लोकेशन पर शूट करने जैसा नहीं था. फिल्म की कहानी, लोकेशन, कलाकार और भाषा के लेवल पर दोनों देशों के सिनेमा का मेल दिखाई देता था. भारतीय टीम ईरान गई और वहां की फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों और तकनीकी लोगों के साथ काम किया. इससे यह भी साफ होता है कि दोनों देशों के बीच फिल्मी रिश्ता सिर्फ किसी एक स्टार की पॉपुलैरिटी तक सीमित नहीं था. इसके पीछे लंबे समय से चल रहा सांस्कृतिक आदान-प्रदान था.

राज कपूर और ईरान

बात जब भारत और ईरान की फिल्मी दोस्ती की हो और राज कपूर का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. दरअसल, The Lor Girl के बाद के दशकों में राज कपूर भारतीय सिनेमा की उस पहचान का हिस्सा बने, जिसे ईरान समेत कई देशों में दर्शकों ने पसंद किया. राज कपूर की फिल्मों का आम आदमी वाला किरदार, इमोशनल कहानी, म्यूजिक और सामाजिक मैसेज भारतीय सीमाओं से बाहर भी दर्शकों से जुड़ा. ईरान में भारतीय फिल्मों की पॉपुलैरिटी के संदर्भ में राज कपूर का नाम खास तौर पर लिया जाता रहा है.

पहले भारतीय स्टूडियो ने ईरान की भाषा में फिल्म बनाने के लिए जगह दी और बाद में भारतीय सिनेमा की अपनी कहानियां ईरानी दर्शकों तक पहुंचने लगीं. ऐसे में ये रिश्ता सिर्फ एक तरफ से दूसरी तरफ जाने वाला नहीं था. दोनों तरफ से फिल्मों, कलाकारों और कहानियों का आना-जाना जारी रहा.

एक फिल्म से दूसरे दौर तक माजिद मजीदी और एआर रहमान

ईरान के मशहूर फिल्ममेकर माजिद मजीदी ने भारत में Beyond the Clouds बनाई. इस फिल्म के जरिए उन्होंने भारतीय कहानी और भारतीय कलाकारों के साथ काम किया. फिल्म की शूटिंग और कहानी का बड़ा हिस्सा मुंबई के सामाजिक और शहरी परिवेश से जुड़ा था. इस प्रोजेक्ट से भारतीय और ईरानी फिल्ममेकिंग की एक नई तरह की साझेदारी सामने आई. यहां न तो सिर्फ एक देश की कहानी दूसरे देश में दिखाई जा रही थी और न ही केवल किसी विदेशी स्टार को भारतीय फिल्म में लिया गया था. एक ईरानी निर्देशक भारत की जमीन, यहां के किरदार और सामाजिक माहौल को अपनी सिनेमाई नजर से देख रहा था.

इस फिल्म के संगीत से एआर रहमान भी जुड़े. यानी भारत और ईरान का सिनेमाई रिश्ता अब उस लेवल पर पहुंच चुका था, जहां अलग-अलग देशों के बड़े रचनाकार एक ही फिल्म के लिए साथ काम कर रहे थे. यह The Lor Girl से बिल्कुल अलग दौर था, लेकिन मूल भावना कहीं न कहीं वैसी ही थी. दूसरे देश की क्रिएटिविटी को अपनी फिल्ममेकिंग का हिस्सा बनाना.

Golshifteh Farahani और भारतीय सिनेमा

भारत और ईरान के बीच सिनेमाई कनेक्शन का एक और उदाहरण ईरानी एक्ट्रेस रहवार्ड फराहानी (Golshifteh Farahani) हैं. उन्होंने अनूप सिंह की फिल्म द Song of Scorpions में इरफ़ान खान के साथ काम किया. फिल्म की कहानी राजस्थान की पृष्ठभूमि में थी और इसमें वहीदा रहमान भी अहम रोल में थीं. फिल्म में Farahani ने नूरान का किरदार निभाया था. ये फिल्म बॉलीवुड की नहीं थी, लेकिन भारतीय सिनेमा और ईरानी प्रतिभा के बीच एक अहम कड़ी जरूर थी. फिल्म की भाषा और माहौल भारतीय था, जबकि इसकी लीड एक्ट्रेस ईरान की जानी-मानी कलाकार थीं.

सलाम मुंबई ने रिश्ते को फिर नए दौर में पहुंचाया

भारत और ईरान की फिल्मी साझेदारी का आधुनिक दौर सलाम मुंबई से भी जुड़ता है. ईरानी निर्देशक Ghorban Mohammadpour की इस फिल्म में दिया मिर्जा और ईरानी स्टार Mohammad Reza Golzar लीड रोल में थी.  फिल्म की कहानी एक ईरानी मेडिकल स्टूडेंट और मुंबई की एक भारतीय लड़की के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म की शूटिंग भारत और ईरान से जुड़ी थी और इसमें फारसी, हिंदी और अंग्रेजी का इस्तेमाल किया गया. भारतीय गानों का भी हिस्सा था.  इस फिल्म की खासियत सिर्फ कलाकारों का साथ आना नहीं था. पूरी फिल्म का विचार ही दो संस्कृतियों के मिलने पर आधारित था. ईरानी किरदार भारत आता है, भारतीय समाज और लोगों से मिलता है और इसी दौरान दोनों देशों की भाषा, संस्कृति और सोच के बीच संवाद दिखाई देता है.

फिल्म के बारे में बात करते हुए दिया मिर्जा ने इसे ईरानी सिनेमा का हिस्सा बनने का एक खास अनुभव बताया था. वहीं Mohammad Reza Golzar के लिए यह भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के साथ काम करने का बड़ा मौका था.

ईरान-ओरिजन कलाकारों का बॉलीवुड कनेक्शन

भारत और ईरान के रिश्ते की कहानी सिर्फ फिल्मों और निर्देशकों तक सीमित नहीं है. मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कई कलाकार रहे हैं जिनकी पारिवारिक जड़ें ईरान या ईरानी पारसी समुदाय से जुड़ी हैं. जॉन अब्राहम की मां की पारिवारिक जड़ें ईरानी जोरोएस्ट्रियन समुदाय से जुड़ी बताई जाती हैं. वहीं, बोमन ईरानी भी मुंबई के एक ईरानी जोरोएस्ट्रियन परिवार से आते हैं.

बाद के दौर में Elnaaz Norouzi, Mandana Karimi और Sajjad Delafrooz जैसे ईरान से आए कलाकारों ने भी भारतीय मनोरंजन जगत में अपनी जगह बनाई. Elnaaz Norouzi का काम भारतीय फिल्मों और वेब सीरीज में नजर आया, जबकि Mandana Karimi और Sajjad Delafrooz ने भी हिंदी मनोरंजन जगत में काम किया. ये कलाकार भारत-ईरान के सिनेमाई कनेक्शन सिर्फ का नतीजा है.

The Lor Girl से सलाम मुंबई तक क्या बदला?

अगर इन फिल्मों को एक साथ देखा जाए तो करीब एक सदी की पूरी कहानी सामने आती है. वक तरफ जहां, The Lor Girl के समय भारत में फिल्म बनाने की तकनीकी सुविधा थी और ईरानी रचनाकार उस सुविधा का इस्तेमाल अपनी भाषा और कहानी को पर्दे पर लाने के लिए कर रहे थे. वहीं, Subah-O-Sham तक भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ईरान में जाकर फिल्म शूट करने लगी. भारतीय और ईरानी सितारे एक ही कहानी का हिस्सा बने. फिर Majid Majidi जैसे ईरानी निर्देशक भारत आए और भारतीय शहर तथा समाज को अपनी नजर से पर्दे पर उतारा.

इसके बाद सलाम मुंबई में कहानी ही भारत और ईरान के लोगों के बीच रिश्ते पर आधारित हो गई. और आज ईरानी मूल के कलाकार भारतीय मनोरंजन जगत में काम कर रहे हैं, जबकि भारतीय कलाकार और तकनीशियन अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बन रहे हैं. इस पूरे सफर में एक बात लगातार बनी रही. दोनों देशों की फिल्म इंडस्ट्री एक-दूसरे से कुछ न कुछ लेती रही है. कभी भाषा, कभी कहानी, कभी कलाकार, कभी तकनीक और कभी सिर्फ एक-दूसरे की संस्कृति को समझने की कोशिश.

एक सदी पुरानी फिल्मी दोस्ती की कहानी

भारत और ईरान के सिनेमाई रिश्ते को सिर्फ स्टार्स की पॉपुलैरिटी या किसी एक इंडो-ईरानियन फिल्म से समझना अधूरा होगा. इसकी शुरुआत उस दौर में हुई थी जब दोनों देशों के आधुनिक फिल्म उद्योग अभी अपनी-अपनी पहचान बना रहे थे. The Lor Girl इस पूरी कहानी का सबसे मजबूत शुरुआती चैप्टर है. ईरान की भाषा, ईरान की कहानी और ईरानी कलाकारों को भारत के बॉम्बे फिल्म स्टूडियो ने अपने भीतर जगह दी. Ardeshir Irani और Abdolhossein Sepanta की साझेदारी ने एक ऐसा प्रयोग किया, जिसने फारसी भाषा के सिनेमा के इतिहास में अपनी जगह बनाई.

इसके बाद यह रिश्ता कई रूपों में सामने आया. कभी भारतीय फिल्में ईरान पहुंचीं, कभी ईरानी कलाकार भारत आए, कभी भारतीय सितारे ईरान में शूटिंग करने पहुंचे और कभी दोनों देशों की टीमें मिलकर फिल्म बनाने लगीं.
ऐसे में भारत और ईरान की फिल्मी दोस्ती को सिर्फ एक फिल्म से जोड़ना सही नहीं होगा. The Lor Girl से लेकर Subah-O-Sham, राज कपूर की पॉपुलैरिटी, मजीद मजीदी और एआर रहमान की साझेदारी, Golshifteh Farahani का भारतीय सिनेमा से जुड़ना और सालम मुंबई तक यह रिश्ता लगातार अपना रूप बदलता रहा.

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About the Author

स्वाति सिंह एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह Zee News Hindi की डिजिटल टीम के एंटरटेनमेंट (मनोरंजन) सेक्शन में काम कर रही हैं. स्वाति की एक्सपर्टीज बॉलीवुड न्यूज़, सिनेमा, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ट्रेंड्स और सेलेब्स की इन-डेप्थ रिपोर्टिंग में है.अपने करियर के दौरान स्वाति ने आयुष्मान खुराना, नीना गुप्ता, गजराज राव और ध्वनि भानुशाली जैसी कई जानी-मानी बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री की हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं. Zee News से पहले उन्होंने अमर उजाला, लाइव हिंदुस्तान और लोकमत जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, जहां काम के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से मास कम्युनिकेशन और सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की डिग्री हासिल करने वाली स्वाति, मनोरंजन जगत की खबरों को पाठकों तक रोचक और सटीक ढंग से पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.आप स्वाति सिंह से swati.kumari@india.com पर सीधे ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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