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पिछले कुछ सालों में ओटीटी और स्ट्रीमिंग वर्ल्ड में जिस तरह की काट-काट कॉम्पिटिशन देखने को मिली है उसने पुराने ट्रेडिशनल हॉलीवुड स्टूडियोज की कमर तोड़ दी है. नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो और ऐप्पल टीवी जैसे टेक जाइंट्स ने अरबों डॉलर खर्च करके पूरे मार्केट पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया था. ऐसे में पैरामाउंट और वॉर्नर ब्रदर्स जैसी पुरानी लीगेसी कंपनियों के पास दो ही रास्ते थे, या तो वे अलग-अलग रहकर टेक कंपनियों की रेस में पिछड़ जाएं या फिर अपनी ताकतों को मिलाकर एक महा-शक्ति बन जाएं. दोनों कंपनियों ने मिलकर अपनी ताकत दोगुनी करने और सालाना अरबों डॉलर की कॉस्ट कटिंग के लिए यह मर्जर करने का फैसला किया.
वैराइटी, रॉयटर्स और द हॉलीवुड रिपोर्टर की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मर्जर केबल टीवी से घटते रेवेन्यू और स्ट्रीमिंग लॉस को कवर करने का एक सोचा-समझा स्ट्रैटेजिक मूव है. इस डील के बाद जो नई कंबाइंड एंटिटी बनकर तैयार हो रही है उसे 'स्काईडांस' नाम से जाना जाएगा. इसका पोर्टफोलियो इतना तगड़ा है कि किसी भी कॉम्पिटिटर की नींदे उड़ जाएं.

जब यह सारा कंटेंट एक ही सब्सक्रिप्शन मॉडल में आएगा तो यूजर्स के लिए इसे मना करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा. डेडलाइन की रिपोर्ट्स के अनुसार, मर्जर के बाद स्काईडांस अब दुनिया की सबसे बड़ी आईपी लाइब्रेरी वाली कंपनियों में से एक बन जाएगी.
हर चमकती चीज सोना नहीं होती, और इस मेगा-डील के साथ भी एक बहुत बड़ा रिस्क फैक्टर जुड़ा है. वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी और पैरामाउंट दोनों के ऊपर मिलाकर $80 बिलियन (लगभग 6.6 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा का नेट डेप्थ है. इतने भारी कर्ज के साथ नई कंपनी की कमान संभालना स्काईडांस के नए मैनेजमेंट के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होगा. कर्ज चुकाने के लिए कंपनी को आने वाले दिनों में भारी ले-ऑफ, प्रोजेक्ट्स को कैंसिल करना और नॉन-कोर एसेट्स को बेचना पड़ सकता है. अगर स्ट्रीमिंग से तुरंत बड़ा प्रॉफिट नहीं आया तो यह कर्ज कंपनी को डुबो भी सकता है. वॉल स्ट्रीट जर्नल के एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि हाई-इंटरेस्ट रेट के इस दौर में $80 बिलियन का कर्ज स्काईडांस के फ्यूचर ऑपरेशन्स पर भारी दबाव डालेगा.
जब दो बड़े कॉम्पिटिटर आपस में मिल जाते हैं तो मार्केट में विकल्प कम हो जाते हैं. हॉलीवुड में पहले 'बिग 6' स्टूडियोज हुआ करते थे जो अब घटकर 'बिग 4' या 'बिग 3' रह जाएंगे. कॉम्पिटिशन कम होने से फिल्म मेकर्स, एक्टर्स और राइटर्स के लिए अपने प्रोजेक्ट्स बेचने के ऑप्शन सीमित हो जाएंगे. इससे क्रिएटिव फ्रीडम पर असर पड़ सकता है और बड़ी फिल्में बनाने का बजट तय करने की पावर सिर्फ दो-तीन बड़ी कंपनियों के हाथ में सिमट जाएगी. हालांकि दूसरी तरफ यह भी तर्क दिया जा रहा है कि नेटफ्लिक्स और अमेजन जैसे टेक जाइंट्स को टक्कर देने के लिए ऐसा कंसॉलिडेशन बेहद जरूरी था. हॉलीवुड गिल्ड रिपोर्ट्स के अनुसार, एंटी-ट्रस्ट रेगुलेटर्स इस डील पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि मार्केट में एकाधिकार न कायम हो सके.

भारत इस समय दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता ओटीटी और डिजिटल मार्केट है. हॉलीवुड की यह हलचल सीधे भारतीय दर्शकों और लोकल फिल्म इंडस्ट्री को भी प्रभावित करेगी. स्काईडांस भारत में अपने पैर मजबूत करने के लिए डीसी और हैरी पॉटर जैसे कंटेंट को हिंदी, तमिल, तेलुगु और अन्य भारतीय भाषाओं में हाई-क्वालिटी डबिंग के साथ पुश करेगा. नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो की तरह स्काईडांस भी भारतीय मेकर्स के साथ मिलकर लोकल वेब सीरीज और फिल्में प्रोड्यूस करने में भारी इन्वेस्टमेंट कर सकता है. भारतीय कंज्यूमर प्राइस-सेंसिटिव है. नेटफ्लिक्स और डिज्नी हॉटस्टार को टक्कर देने के लिए स्काईडांस भारत में बहुत ही एग्रेसिव और सस्ते प्लान्स पेश कर सकता है, जिससे यूजर्स को फायदा होगा.
पैरामाउंट और वॉर्नर ब्रदर्स का यह मर्जर सिर्फ एक शुरुआत है. आने वाले समय में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में ऐसे और भी कई मेगा-मर्जर्स और टेक-ओवर देखने को मिल सकते हैं. सोनी, लायंसगेट और एप्पल जैसी कंपनियां भी अब नए पार्टनर ढूंढ रही हैं या फिर छोटे स्टूडियोज को खरीदने की फिराक में हैं. केबल टीवी का जमाना तेजी से खत्म हो रहा है और डिजिटल स्ट्रीमिंग ही एंटरटेनमेंट का इकलौता भविष्य है. ऐसे में जो कंपनियां साइज में बड़ी नहीं होंगी, वे इस नई डिजिटल दुनिया में टिक नहीं पाएंगी. मॉर्गन स्टेनली के मीडिया प्रेडिक्शन रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगला 3 से 5 साल पूरे ग्लोबल मीडिया और एंटरटेनमेंट लैंडस्केप को पूरी तरह री-शेप कर देगा.