क्या सोची-समझी साजिश थी दिशा सालियान की मौत? गृह मंत्रालय की रिपोर्ट से उठे बड़े सवाल; वकील का सनसनीखेज दावा
Disha Salian Case: दिशा सालियान की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है. परिवार के वकील ने दावा किया है कि सचिन वाजे की बहाली से जुड़े नए सबूत सामने आए हैं, जो एक बड़ी साजिश की तरफ इशारा करते हैं. ये सारे दस्तावेज अब जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिए गए हैं.
सिर्फ 34 साल की उम्र में दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कहने वाले हिंदी सिनेमा के चमते सितारे सुशांत सिंह राजपूत की एक्स-मैनेजर दिशा सालियान के केस में एक नया मोड़ आया है. करीब 6 साल पहले 9 जून 2020 की देर रात दिशा की एक ऊंची बिल्डिंग की 12वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी. उस समय पुलिस की शुरुआती जांच में इसे सीधे तौर पर खुदकुशी माना गया था और किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार कर दिया गया था. बाद में बनी राज्य सरकार की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को भी किसी साजिश का सुराग नहीं मिला था, लेकिन अब कई साल बीत जाने के बाद इस पूरे मामले में एक बहुत बड़ा और हैरान करने वाला नया मोड़ सामने आया है.
इस केस में दिशा के पिता सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने बहुत बड़ा दावा किया है. न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए वकील ने बताया कि वे इस केस में शुरू से जो बातें कह रहे थे, अब नए सबूत मिलने से उन सभी दावों की पुष्टि हो रही है. उनका कहना है कि परिवार ने जो आशंकाएं जताई थीं, वे सब अब धीरे-धीरे सच साबित हो रही हैं. पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की दोबारा सर्विस में बहाली से जुड़े कुछ ऐसे ऑफिशियल दस्तावेज सामने आए हैं, जिन्होंने पूरी पुरानी जांच और पुलिस थ्योरी पर बहुत गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में मिला बड़ा सबूत
वकील नीलेश ओझा ने ANI से बात करते हुए बताया कि गृह मंत्रालय को सौंपी गई एक खास रिपोर्ट से केस में नया सबूत मिला है. इस रिपोर्ट के मुताबिक 5 जून 2020 को सचिन वाजे को अचानक बिना किसी देरी के दोबारा पुलिस सेवा में बहाल किया गया था. सर्विस में वापसी के तुरंत बाद उन्हें मुंबई पुलिस की बेहद अहम मानी जाने वाली क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट में तैनात कर दिया गया था. वकील का सीधा आरोप है कि ये अपॉइंटमेंट तय सरकारी नियमों और लीगल प्रोसेस की अनदेखी करके बहुत जल्दबाजी में की गई थी, जिसके पीछे एक बड़ी मंशा छिपी हुई थी.
क्राइम ब्रांच में तैनाती को लेकर उठे सवाल
नियमों का हवाला देते हुए वकील नीलेश ओझा ने साफ तौर पर कहा कि क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का जिम्मा केवल पुलिस इंस्पेक्टर रैंक के सीनियर अधिकारी को ही दिया जा सकता है. वहीं, दूसरी तरफ सचिन वाजे उस समय इस तय पैमाने और सीनियरिटी पर बिल्कुल खरे नहीं उतरते थे. वे इस पद के मुकाबले काफी निचले रैंक के अधिकारी थे, फिर भी हर नियम-कायदे को ताक पर रखकर उन्हें इतनी सेंसिटिव यूनिट की कमान सौंप दी गई थी. वकील का कहना है कि एक सब-इंस्पेक्टर रैंक के इंसान को इस तरह सीधे अहम यूनिट सौंपना अपने आप में बहुत बड़ा शक पैदा करता है.
साजिश और सबूत मिटाने का लगा गंभीर आरोप
वकील ने दावा किया कि सचिन वाजे को अचानक इस तरह बहाल करना किसी आम एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस का हिस्सा नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश रची गई थी. उनका सीधा आरोप है कि इस पूरी साजिश का मकसद दिशा की हत्या करना, फिर घटना के सबूत मिटाना और मामले को दबाना था. इसके अलावा इसमें जबरन वसूली, ड्रग्स का अवैध धंधा और दूसरी गैर-कानूनी गतिविधियों का नेटवर्क भी शामिल था. वकील के मुताबिक जिस तरह दिशा की मौत से ठीक चार दिन पहले ये बहाली हुई, वे इस पूरे घटनाक्रम को एक सोची-समझी प्लानिंग की ओर ले जाता है.
सीबीआई को सौंपे गए सभी नए दस्तावेज
इस पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के बारे में बताते हुए वकील नीलेश ओझा ने कहा कि शनिवार 3 अक्टूबर को उन्होंने ये सारे नए सबूत और जरूरी कागजात सीधे सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन को सौंप दिए हैं. उन्होंने उम्मीद जताई है कि केंद्रीय जांच एजेंसी अब इन नए फैक्ट्स और गृह मंत्रालय की रिपोर्ट की गहराई से निष्पक्ष जांच करेगी. इस नए खुलासे के बाद से एक बार फिर दिशा सालियान की मौत से जुड़े कई अनसुलझे रहस्य सामने आने लगे हैं और अब हर किसी की नजरें सेंट्रल एजेंसी के अगले कानूनी कदम पर टिकी हुई हैं.