कार्तिक आर्यन की 'नागजिला' के फंड में 4 करोड़ का घपला, बॉम्बे कोर्ट का सख्त रुख; आरोपियों को झटका
नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्टर कार्तिक आर्यन और फिल्ममेकर करण जौहर की अपकमिंग फिल्म 'नागजिला' के 3.92 करोड़ रुपये के फंड घोटाले में मुंबई कोर्ट ने तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत खारिज कर दी है. बिना बिलों के फर्जी खर्च दिखाने और वेंडरों से कमीशन लेने के इन आरोपों पर अब आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है.
कार्तिक आर्यन और करण जौहर की अपकमिंग फिल्म 'नागजिला' इस समय कानूनी पचड़े में फंस गई है. मुंबई की एक सेशंस कोर्ट ने इस फिल्म के फंड से जुड़े करीब 3.92 करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इस घोटाले में फंसे तीन मुख्य प्रोडक्शन अधिकारियों की अग्रिम जमानत अर्जी साफ तौर पर खारिज कर दी है. इस फैसले के बाद अब आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, एडिशनल सेशंस जज एम. मोहिउद्दीन ने सुनवाई के दौरान कहा कि शुरुआती जांच में इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि वो इस धोखाधड़ी में शामिल थे.
कोर्ट का ये भी माना है कि इस पूरे मामले की तह तक जाने और पैसों के लेन-देन का सच सामने लाने के लिए आरोपियों से हिरासत में पूछताछ करना बहुत जरूरी है, इसलिए इन्हें राहत नहीं दी जा सकती है. आपको बता दें कि 'नागजिला' फिल्म में एक्टर कार्तिक आर्यन मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. इसे करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस और महावीर जैन फिल्म्स मिलकर बना रहे हैं.
धोखाधड़ी में तीन लोग हैं शामिल
करण जौहर और कार्तिक आर्यन ने पिछले साल 30 अक्टूबर को दोनों कंपनियों के बीच 82.50 करोड़ रुपये के कुल बजट पर ये फिल्म बनाने की डील की. इस मामले में FIR महावीर जैन फिल्म्स के अकाउंटेंट तुकाराम महादेव सावंत ने दर्ज कराई है. जिन तीन लोगों की जमानत खारिज हुई है, उनमें कंसल्टेंट कुलदीप सिंह चंपावत, सर्विस प्रोवाइडर महिपाल करण राठौर और लाइन प्रोड्यूसर शिवकुमार तिवारी शामिल हैं.
पैसों के हेरफेर का पूरा खेल और फर्जीवाड़ा
पुलिस और प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक, इन तीनों ने मिलकर फिल्म मेकिंग के तय नियमों और एसओपी को पूरी तरह ताक पर रख दिया. इन्होंने बिना किसी सही बिल या वाउचर के लगभग 3 करोड़ 92 लाख रुपये से ज्यादा का ऐसा खर्च दिखा दिया, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं था. आरोप है कि पैसों को ठिकाने लगाने के लिए कई हथकंडे अपनाए गए और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया.
बिलों में हेराफेरी, वेंडरों से कमीशनबाजी का खेल
जांच में ये भी सामने आया कि आरोपियों ने मिलकर किस तरह फर्जीवाड़ा किया. एक मामले में वेंडर का असली बिल 85,000 रुपये का था, जिसे बढ़ाकर 1.30 लाख रुपये कर दिया गया. इसके अलावा 'ANM Global' नाम की एक ऐसी फर्म को 45,000 रुपये दे दिए गए, जिसने फिल्म के लिए कोई काम ही नहीं किया था. यही नहीं, एक प्रोडक्शन असिस्टेंट के साथ मिलकर डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा के फर्जी बिल पास कराए गए. जांच अधिकारी ने कोर्ट को ये भी बताया कि ये लोग वेंडरों से काम दिलाने और उनके बिल पास करने के बदले महंगे मोबाइल फोन और मोटा कमीशन ऐंठते थे.