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टीवी के सबसे मशहूर शो ‘बालिका वधू’ में आनंदी के किरदार से घर-घर में मशहूर हुई प्रत्युषा बनर्जी की मौत के मामले में पूरे 10 साल बाद एक बड़ा फैसला आया है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में एक्ट्रेस के एक्स-बॉयफ्रेंड राहुल राज सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है. कोर्ट का कहना है कि पुलिस और जांच एजेंसियों के पास ऐसे पुख्ता सबूत मौजूद नहीं हैं, जिनके दम पर राहुल राज सिंह के खिलाफ कोर्ट में आगे केस या ट्रायल चलाया जा सके. इस फैसले के बाद राहुल पर चल रही सभी कानूनी कार्यवाहियों पर पूरी तरह रोक लग गई है.
बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट की सिंगल बेंच में जस्टिस एसजी डिगे ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ शक या बयानों के आधार पर किसी पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, जब तक कि ठोस कानूनी सबूत न हों. अदालत के इस फैसले के साथ ही साल 2016 से चल रहे इस लंबे कानूनी विवाद पर अब विराम लग गया है. इस फैसले के आते ही टीवी जगत और सोशल मीडिया पर एक बार फिर पुरानी यादें ताजा हो गई हैं. लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि इतने सालों बाद आखिरकार कानून ने सबूतों के अभाव में ये बड़ा कदम उठाया है.

ये दर्दनाक वाकया 1 अप्रैल 2016 का है, जब महज 24 साल की उम्र में प्रत्युषा बनर्जी अपने मुंबई के गोरेगांव वेस्ट वाले किराए के फ्लैट में फंदे से लटकी पाई गई थीं. इस खबर ने पूरी टीवी इंडस्ट्री और उनके लाखों फैंस को हिलाकर रख दिया था. घटना के तुरंत बाद प्रत्युषा की मां सोमा बनर्जी ने बांगुर नगर पुलिस स्टेशन में राहुल राज सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने परिवार के आरोपों पर राहुल के खिलाफ खुद की जान लेने के लिए उकसाने, मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने जैसी कई धाराओं में मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू की थी और चार्जशीट पेश की थी.
प्रत्युषा के परिवार ने उस वक्त सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि राहुल ने एक्ट्रेस को मेंटली, फिजिकली और फाइनेंशियली काफी टॉर्चर किया जा रहा था. परिवार का कहना था कि इसी दबाव और परेशानी के चलते प्रत्युषा ने इतना बड़ा कदम उठाया. मामले की जांच के बाद पुलिस ने साल 2018 में कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी. इससे पहले जुलाई 2016 में राहुल को बॉम्बे हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी थी. बाद में राहुल ने अदालत से खुद को केस से बरी करने की गुहार लगाई, लेकिन अगस्त 2023 में डिंडोशी सेशन कोर्ट ने गवाहों के बयानों को देखते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी.

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राहुल राज सिंह की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील आबाद पोंडा और श्रेयांश मिठारे ने कई अहम दलीलें पेश कीं. वकीलों ने अदालत को बताया कि घटना की जगह से भी किसी भी तरह का कोई नोट बरामद नहीं हुआ था और पुलिस ने जल्दबाजी में FIR दर्ज की थी. इसके अलावा वकीलों ने प्रत्युषा की मौत से करीब एक घंटा पहले की आखिरी फोन कॉल रिकॉर्डिंग का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि उस कॉल में राहुल प्रत्युषा को गलत कदम उठाने से रोक रहे थे और प्यार जता रहे थे. साथ ही घटना के बाद राहुल ने ही दरवाजा खुलवाकर प्रत्युषा को तुरंत अस्पताल पहुंचाया था.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और पुलिस की ओर जुटाए गए तमाम कागजातों पर बारीकी से गौर किया. कोर्ट ने माना कि जो फेक्ट्स रखे गए हैं, उनसे ये साबित नहीं होता कि ये खुद की जाने लेने के लिए उकसाने का केस बनता है. अदालत ने साफ कहा कि पर्याप्त सबूतों के बिना आरोपी पर ट्रायल चलाना कानून और कोर्ट प्रोसिडिंग का गलत इस्तेमाल होगा. इसी आधार पर कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को पलटते हुए राहुल राज सिंह को इस पूरे मामले से पूरी तरह डिस्चार्ज कर दिया. इस तरह एक दशक पुराने इस केस में राहुल को कानूनी रूप से बड़ी राहत मिली है.