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बॉलीवुड में बयानबाजी और विवाद कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन जब देश के दो बड़े नाम आमने-सामने आ जाएं, तो बात अलग ही मोड़ ले लेती है. इस बार माहौल गर्म हुआ है दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और मशहूर फिल्ममेकर अशोक पंडित के बीच. मामला जुड़ा है यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट प्रोटेस्ट, सरकारी नीतियों और फिल्मों के नैरेटिव से.
हाल-फिलहाल में नसीरुद्दीन शाह ने एक वीडियो जारी कर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया था. इसी दौरान उन्होंने खुद को "दिमागी नक्सल" कह डाला. बस फिर क्या था, इस बयान के सामने आते ही बॉलीवुड के गलियारों में बहस की आग लग गई. फिल्ममेकर अशोक पंडित ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए नसीरुद्दीन शाह पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि नसीरुद्दीन शाह को किसी साइकेट्रिस्ट यानी मानसिक रोग विशेषज्ञ से सलाह लेने की जरूरत है.
पूरी कहानी को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलना पड़ेगा. दरअसल, जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र अपनी चुनी हुई स्टूडेंट्स यूनियन को फिर से बहाल करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल और प्रदर्शन कर रहे हैं. गौरतलब है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 2006 से ही इस यूनियन पर बैन लगा रखा है. इसी मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए 76 साल के नसीरुद्दीन शाह ने एक काफी गुस्से से भरा वीडियो शेयर किया था.
इस वीडियो में उन्होंने सिर्फ जामिया ही नहीं, बल्कि जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) के छात्रों का भी खुलकर पक्ष लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश के युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है.
नसीरुद्दीन शाह का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. वीडियो में वे काफी गुस्से में नजर आ रहे थे. उन्होंने कहा कि सरकार और उनके समर्थक लोगों को तरह-तरह के टैग देते रहते हैं. उन्होंने आगे कहा, "मुझे नहीं पता कि सरकार के स्वयंभू चौकीदारों ने मुझ जैसे लोगों पर और कौन-कौन से लेबल चिपका रखे हैं. कभी एंटी-नेशनल, कभी टुकड़े-टुकड़े गैंग और न जाने क्या-क्या. अगर युवाओं की आवाज उठाना गलत है, तो हां, मैं एक दिमागी नक्सल हूं."
इतना ही नहीं, नसीरुद्दीन शाह ने मीडिया के एक वर्ग और सत्ताधारी पार्टी के IT सेल पर भी हमला बोला. उन्होंने मीडिया को "गोदी मीडिया" कहते हुए तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया और IT सेल के सदस्यों को नासमझ और अयोग्य करार दिया. उनका कहना था कि देश के शैक्षणिक संस्थानों को तबाह किया जा रहा है और लोकतंत्र को खतरे में डाला जा रहा है, जिसे देश का युवा कभी बर्दाश्त नहीं करेगा.
नसीरुद्दीन शाह का यह वीडियो जैसे ही वायरल हुआ, फिल्ममेकर अशोक पंडित ने एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए उन पर जोरदार हमला बोला. अशोक पंडित ने कहा कि वे नसीरुद्दीन शाह की भाषा से बिल्कुल भी हैरान नहीं हैं. अशोक पंडित ने कहा, "मुझे नसीरुद्दीन शाह की ऐसी भाषा से न तो कोई झटका लगा है और न ही सरप्राइज हुआ है. पिछले कुछ महीनों से, बल्कि यूं कहें कि साल भर से वे लगातार इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं. वे एक तरह से आदतन गाली देने वाले बन चुके हैं. जिस तरह की भाषा वे बोलते हैं और जैसे चेहरे बनाते हैं, उससे साफ झलकता है कि वे अंदर से कितने हताश हैं. मुझे तो सच में उन पर तरस आता है."
Mumbai, Maharashtra: Filmmaker and FWICE Chief Advisor Ashoke Pandit, responding to actor Naseeruddin Shah’s statement, says, “I’m not surprised or shocked because, for the past year or so, Mr Naseeruddin Shah has become a constant abuser. He has lost all manners and etiquette. He behaves like a ruffian. I think the way he talks in front of the camera, speaks to people and addresses them is not just about the Prime Minister; his conduct has gone berserk. His behaviour has gone berserk. You know, even goons don’t behave like this, and he is supposed to be an educated person. I don’t know whether he is really educated or not, because his entire mannerisms and the language he uses sound like frustration. It sounds like a loss of mental balance. So, I think I’m very sure that this man needs medical help. He is not normal. The way he talks and the expressions on his face are full of anger..."
— IANS (@ians_india) October 29, 2026
अशोक पंडित ने नसीरुद्दीन शाह के इस गुस्से के पीछे कमर्शियल और वैचारिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया. उनका मानना है कि बॉलीवुड में जिस तरह से अब देशभक्ति और अलग-अलग पॉलिटिकल नैरेटिव पर आधारित फिल्में बन रही हैं, वे नसीरुद्दीन शाह जैसे लोगों को पच नहीं रही हैं.
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अशोक पंडित ने कहा, "शायद उनकी इस बौखलाहट और असुरक्षा की सबसे बड़ी वजह यह है कि जो फिल्में आज देश में सुपरहिट हो रही हैं, वो उनके एजेंडे में फिट नहीं बैठतीं. 'द कश्मीर फाइल्स', 'द केरला स्टोरी' और 'धुरंधर' जैसी फिल्मों की सफलता से ऐसे लोग हीन भावना का शिकार हो रहे हैं. यही वजह है कि वे कैमरे के सामने आकर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं, लेकिन जितना वे बोलेंगे, उतने ही बेनकाब होते जाएंगे."
इंटरव्यू के आखिर में अशोक पंडित ने नसीरुद्दीन शाह की मेंटल हेल्थ पर सवाल उठाते हुए उन्हें एक सलाह भी दे डाली. उन्होंने कहा कि एक नॉर्मल इंसान इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करता. अशोक पंडित ने कहा, "आखिर में तो मैं उनसे यही कहना चाहूंगा कि उन्हें किसी अच्छे साइकेट्रिस्ट से अपनी काउंसलिंग करानी चाहिए. उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है. कोई भी सामान्य व्यक्ति कैमरे के सामने इस तरह से गुस्सा और हताशा नहीं निकालता."
यह पहली बार नहीं है जब नसीरुद्दीन शाह अपने बयानों के कारण सुर्खियों में आए हैं. इससे पहले भी वे देश के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते रहे हैं. हाल ही में उन्होंने सत्यजीत रे फिल्म इंस्टीट्यूट में हुए विवाद पर भी छात्रों का समर्थन किया था और बीजेपी पर आरोप लगाया था कि वे प्रशासनिक जवाबदेही मांगने वाले छात्रों को निशाना बना रहे हैं.