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EXCLUSIVE: 'वो वंस इन ए मिलेनियम कलाकार थीं!' आशा भोंसले के अंतिम फिल्म ट्रैक पर एक्टर अंशुमान झा से बातचीत

Exclusive Interview: आशा भोंसले के 93वें जन्मदिन और पहली जयंती के मौके पर उनकी आवाज में रिकॉर्ड हुआ आखिरी फिल्म गाना 'ऐ मेरी जिंदगी' रिलीज हो रहा है. फिल्म 'ओम का हरि' के अभिनेता अंशुमान झा ने विशेष इंटरव्यू में साझा कीं रिकॉर्डिंग स्टूडियो की अनसुनी यादें.

EXCLUSIVE: 'वो वंस इन ए मिलेनियम कलाकार थीं!' आशा भोंसले के अंतिम फिल्म ट्रैक पर एक्टर अंशुमान झा से बातचीत
Image Credit: asha bhosle anshuman jha

Asha Bhosle Last Song: संगीत की दुनिया की मल्लिका आशा भोंसले जी का हर अंदाज निराला रहा है. 8 सितंबर को उनके जन्मदिन के मौके पर उनके प्रशंसकों को एक बेहद भावुक और खास तोहफा मिलने जा रहा है. उनकी सुरीली आवाज में रिकॉर्ड किया गया उनका आखिरी फिल्मी गाना 'ऐ मेरी जिंदगी, तू छुपी है कहां' रिलीज होने जा रहा है. यह गाना आगामी फिल्म 'ओम का हरि' का हिस्सा है. इस खास मौके पर फिल्म के अभिनेता और निर्देशक अंशुमान झा ने विशेष बातचीत में आशा जी के साथ बिताए लम्हों और इस गाने से जुड़े भावुक अनुभवों को साझा किया है.

भारतीय सिनेमा और संगीत जगत में आशा भोंसले का योगदान अतुलनीय है. 8 सितंबर को उनके जन्मदिन के खास अवसर पर उनकी सुरीली आवाज में दर्ज आखिरी फिल्मी गीत 'ऐ मेरी जिंदगी, तू छुपी है कहां' रिलीज किया जा रहा है. हरीश व्यास के निर्देशन में बनी पारिवारिक ड्रामा-कॉमेडी फिल्म 'ओम का हरि' का यह गाना जिंदगी, प्यार और दिल की भावनाओं को खुलकर बयां करने का संदेश देता है. फिल्म में अंशुमान झा, रघुवीर यादव, सोनी राजदान और आयशा कपूर मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं.

पिता और बेटे के रिश्तों की अनकही दास्तान

फिल्म 'ओम का हरि' की कहानी पिता और पुत्र के बीच के वैचारिक मतभेद और उनके आपसी प्यार के आसपास घूमती है. यह फिल्म बताती है कि अक्सर हम अपने सबसे करीबियों से अपने दिल की बात या 'आई लव यू' कहना भूल जाते हैं. आशा जी की आवाज में रिकॉर्ड यह गाना फिल्म के सबसे भावुक मोड़ को बेहद खूबसूरती से उभारता है. फर्स्ट रे फिल्म्स के बैनर तले बनी यह फिल्म 18 सितंबर को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी.

अंशुमान झा के साथ एक्सक्लूसिव सवाल-जवाब...

सवाल 1. आपकी फिल्म 'ओम का हरि' में आशा भोंसले जी का गाया आखिरी रिकॉर्डेड गाना शामिल है। इस गाने को अपनी फिल्म में पाना आपके लिए कितना बड़ा सम्मान है?

जवाब: "बहुत कम ऐसा होता है जब आपको जिंदगी में ऐसे कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिलता है जिनकी कला के प्रति एक सच्चाई से भरी हुई रुचि होती है. मैं अपनी जिंदगी के कुछ सबसे खूबसूरत पलों में से एक उन पलों को मानूंगा जो मैंने रिकॉर्डिंग स्टूडियो में आशा जी के साथ बिताएं. इसलिए नहीं कि मैं उनका फैन हूं या... जो कि मैं बहुत बड़ा फैन हूं. मतलब हम सब बड़े हुए हैं उनके गाने सुनते हुए, तो एकदम ड्रीम कम ट्रू सिचुएशन थी. एक स्वप्न पूरा हुआ कि वो हमारी फिल्म के लिए गा रही थीं. हमारी खुशनसीबी है, सम्मान से ज्यादा मैं बोलूंगा हमारी खुशनसीबी है कि उन्होंने 'ओम का हरी' के लिए गाना गाया. मैंने उनको वादा किया था कि हम एक म्यूजिक लॉन्च करेंगे और उन्होंने मुझसे कहा था मैं लाइव स्टेज पर गाऊंगी. तो यह मेरी जिंदगी का रिग्रेट सा रहेगा कि वो अब हमारे बीच नहीं हैं. लेकिन उनको सम्मानित करने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा कि हम इस गाने को पूरी इज्जत के साथ, पूरी तहजीब के साथ रिलीज करें और एक श्रद्धांजलि दें एक ऐसे कलाकार को जो वंस इन ए जनरेशन नहीं, वंस इन ए सेंचुरी नहीं, वंस इन ए मिलेनियम होता है."

सवाल 2. आशा जी के साथ इस गाने पर काम करने की शुरुआत कैसे हुई? जब उन्होंने पहली बार यह गाना सुना, तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?

जवाब: हरीश व्यास जी ने जब मुझे यह फिल्म सुनाई और हम शूट पर जाने वाले थे, तब उन्होंने बताया कि वाराणसी में बेटे और बाप के बीच जो भावनात्मक मोड़ होगा, उस गाने के लिए उन्हें एक ऐसी आवाज चाहिए जिसमें जीवन का सुर हो. जब उन्होंने कहा कि आशा जी यह गाना गाएंगी, तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ और मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. हरीश व्यास जी की म्यूजिक सेंस हमेशा से बहुत मजबूत रही है, चाहे 'अंग्रेजी में कहते हैं' हो या 'हम भी अकेले तुम भी अकेले'. इस फिल्म का एल्बम भी बेहद खूबसूरत है, जिसमें आशा जी के अलावा रघुवीर यादव, किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार और युवा संगीतकार परेश बहुगुणा ने गाने गाए हैं. आशा जी का इस एल्बम में शामिल होना 'चेरी ऑन टॉप' की तरह था. सबसे खास बात यह रही कि आशा जी ने इस गाने को सिर्फ एक बार में ही रिकॉर्ड नहीं किया, बल्कि वे तीन बार स्टूडियो आईं- पहली बार शूट से पहले, फिर शूटिंग फुटेज देखने के बाद और तीसरी बार एडिट देखने के बाद. 90 साल से अधिक की उम्र में भी उस कमाल की एनर्जी के साथ गाना रिकॉर्ड करना हम सभी के लिए एक सीख है कि जिंदगी आपके तरफ नहीं आती, बल्कि आपके भीतर से निकलती है. मेरी यह बहुत बड़ी खुशकिस्मती है कि मुझे उनके साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियो में बैठने का मौका मिला और उन कुछ घंटों में मैंने जो सीखा, वह शायद किसी स्कूल या कॉलेज में सालों में भी न सीख पाता.

सवाल 3. जब आशा जी ने यह गाना रिकॉर्ड किया था, तब का माहौल कैसा था? उस दिन रिकॉर्डिंग के दौरान की कोई ऐसी खास बात जो आप कभी नहीं भूलेंगे?

जवाब: जैसा कि मैंने पहले बताया, आशा जी ने यह गाना एक नहीं बल्कि तीन बार रिकॉर्ड किया. सबसे पहले हरीश सर और म्यूजिक डायरेक्टर राजीव सारंग जी ने उनके घर जाकर सेशंस किए; इसके बाद उन्होंने पिछले साल अगस्त और सितंबर में रिकॉर्डिंग की, और फिर शूटिंग खत्म होने के बाद एडिट देखने पर एक बार फिर इसे रिकॉर्ड किया. मुझे याद है सितंबर के उस दिन बारिश हो रही थी, और मैं नर्वस होने के साथ-साथ काफी एक्साइटेड भी था. जब वे मुझसे मिलीं, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने मेरी फिल्म 'लकड़बग्घा' का ट्रेलर देखा है और वे इसे देखना चाहती हैं. इतने महान कलाकार के सामने बैठकर बात करना मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव था. बचपन में इलाहाबाद के चंद्रलोक थिएटर में 'जो जीता वही सिकंदर' देखकर फिल्में बनाने का सपना देखने वाले एक बच्चे से लेकर आशा जी जैसी हस्ती के साथ काम करने तक का यह सफर अद्भुत रहा है. हमने किशोर कुमार जी और मेरे नाटक 'झुमरू' के बारे में भी बात की, जिसके बारे में वे पहले से जानती थीं. इसके अलावा हमने फिल्म 'ओम का हरि' में मेरे किरदार और बाप-बेटे के रिश्तों की उस कहानी पर चर्चा की, जहां एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं. उन्हें फिल्म का विषय बहुत पसंद आया और उन्होंने कहा कि यह आज के समय में हर परिवार के लिए एक बेहद जरूरी फिल्म है. उनके प्रोत्साहन से हमें फिल्म को पूरी निष्ठा के साथ बनाने की अपार ताकत और प्रेरणा मिली.

सवाल 4. यह गाना फिल्म 'ओम का हरि' की कहानी से किस तरह जुड़ता है? क्या यह गाना खास तौर पर आशा जी की आवाज को ध्यान में रखकर बनाया गया था?

जवाब: फिल्म के निर्देशक हरीश व्यास हमेशा से इस गाने को 90 के दशक के सुरों वाला एक विंटेज टच देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने संगीत निर्देशक राजीव सारंग के साथ मिलकर इसे उसी अंदाज में कंपोज करवाया. यह गाना फिल्म की आत्मा है, जो कहानी में एक रियलाइजेशन, इंट्रोस्पेक्शन और फुल सर्कल का भाव लाता है. यह बेहद सहज लेकिन गहरा गाना है. जब ट्रेलर और फिल्म सामने आएगी, तब हर कोई यह महसूस करेगा कि आशा जी की सुरीली आवाज और उनकी खूबसूरती के बिना इस गाने की रूह को कोई और इस तरह जीवित नहीं कर सकता था.

सवाल 5. फिल्म या गाने को आशा भोंसले जी के जन्मदिन (8 सितंबर) के अवसर पर पेश करने की प्लानिंग है. इस खास दिन को चुनने के पीछे क्या विचार था?

जवाब: मेरा ऐसा अक्सर मानना है कि जिंदगी में कुछ चीजें बस हो जाती हैं, और जब आप पीछे मुड़कर देखते हैं तो एहसास होता है कि वे वैसे ही तय थीं. पिछले 6 महीनों में सेंसर सर्टिफिकेट मिलने के बाद से इस बात को लेकर जद्दोजहद चल रही थी कि फिल्म पहले ओटीटी पर आएगी या थिएटर में. अंततः हमने इसे सिनेमाघरों में रिलीज करने का फैसला लिया, लेकिन रिलीज के सही शुक्रवार को चुनने की जद्दोजहद बनी रही. जब हमने 18 सितंबर की तारीख तय की, तब सच कहूं तो हमें यह ध्यान ही नहीं था कि इसी महीने में आशा जी का जन्मदिन भी है. जब मुझे यह बात याद आई, तब हमने फैसला किया कि हमें उनका गाना इसी खास दिन ही लॉन्च करना चाहिए. यह एक ऐसे कालजयी कलाकार को उनकी जयंती पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि देने का एक माध्यम है, जिनकी आवाज हमेशा अमर रहेगी. चार्ली चैपलिन जैसे कलाकार भी कालजयी हैं, लेकिन वक्त अक्सर हर चीज को धुंधला कर देता है; वहीं संगीत की यह खासियत होती है कि वह समय की सीमाओं से परे हमेशा जीवंत रहता है. आशा जी उस पायदान की कलाकार हैं जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज से हमारी फिल्म को अमर कर दिया है. इसके लिए मैं ईश्वर और उनका दिल से शुक्रगुजार हूं, और उम्मीद करता हूं कि उनका आशीर्वाद हमेशा हम पर बना रहेगा.

सवाल 6. भारतीय संगीत में आशा जी का योगदान अतुलनीय रहा है. निर्देशक और कलाकार के तौर पर आप उनसे क्या सीख पाते हैं?

जवाब: एक अभिनेता के तौर पर मैं बचपन से ही मानता आया हूं कि आप चाहे किसी भी विधा के कलाकार हों, रियाज के बिना आप जीवन में सफल नहीं हो सकते. मेरे लिए सफलता की परिभाषा सिर्फ प्रसिद्धि या पैसों से तय नहीं होती, बल्कि इस बात से तय होती है कि जब आप अकेले होते हैं, तब क्या अपनी कला के साथ खुश हैं और उस पर काम कर रहे हैं? आशा जी जैसे महान कलाकार से मैंने जो सबसे बड़ी चीज सीखी है, वह है रियाज और निरंतरता. फुटेज देखने के बाद उन्हें लगा कि इस सीन के लिए यह गाना और भी खास हो सकता है. काम के प्रति ऐसी भूख हर कलाकार में होनी चाहिए. मेरी मां हमेशा कहती थीं कि काम करने और अच्छा काम करने में बहुत फर्क होता है. आशा जी जैसी उम्दा कलाकार सिर्फ काम करने से संतुष्ट नहीं होतीं, उन्हें हर बार सर्वश्रेष्ठ देना होता है. फर्क इससे नहीं पड़ता कि आप 10 साल में कितना काम करते हैं, बल्कि इससे पड़ता है कि आप अपनी सेहत, अपनी कला और उस साधन का कितना ध्यान रखते हैं जिससे आप अभिनय या संगीत के जरिए जनता का मनोरंजन करते हैं. इन सब में रियाज और अनुशासन ही वह डोर है जो हर कला को जोड़ती है, और आशा जी अभ्यास और अनुशासन की एक बेहद खूबसूरत मिसाल थीं.

सवाल 7. संगीत प्रेमियों और सिनेमा प्रशंसकों के लिए इस गाने और 'ओम का हरि' से क्या खास सुनने और महसूस करने को मिलेगा?

जवाब: आशा जी द्वारा गाया गया यह गाना बेहद खास है और इस बारे में बोलने के लिए मैं खुद को बहुत छोटा मानता हूं; इसलिए मैं दर्शकों से यही कहूंगा कि वे इसे सुनें और आशा जी को याद करें. काफी सालों बाद एक ऐसा कॉम्प्रिहेंसिव एल्बम आ रहा है जिसमें हर मूड के लिए एक गाना मौजूद है. हमारी प्रोडक्शन कंपनी 'फर्स्ट रे फिल्म्स' की हमेशा से कोशिश रही है कि हर फिल्म में साहित्य, लोक संगीत या क्लासिकल तत्व शामिल हों; जैसे हमने 'लकड़बग्घा' में रबींद्रनाथ टैगोर की रचना, 'लॉर्ड कर्जन की हवेली' में बीथोवन के क्लासिकल पीसेज और 'हम भी अकेले तुम भी अकेले' में बुल्ले शाह की शायरी का इस्तेमाल किया था. फिल्म 'ओम का हरि' में हमने कबीर दास जी के दोहों का उपयोग किया है, जिन्हें रघुवीर यादव जी ने भजन 'राम रखे' और 'झीनी झीनी' के रूप में गाया है. इसके अलावा आशा जी का 90s विंटेज फील वाला यह गाना है, युवा गायक परेक्ष बहुगुणा का एक न्यू-एज लव सॉन्ग है और किशोर दा के बेटे अमित कुमार जी की आवाज में भी एक गाना है. यह विविधताओं से भरा एक बेहतरीन एल्बम है, और निर्देशक हरीश व्यास की यह खासियत रही है कि वे हमेशा पारिवारिक, साफ-सुथरी फिल्में और बेहतरीन संगीत पेश करते हैं.

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About the Author

Alkesh Kushwaha

Alkesh Kushwaha

अल्केश कुशवाहा एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव है. वर्तमान में वे जी न्यूज हिंदी में चीफ सब-एडिटर के रूप में बॉलीवुड-वायरल सेक्शन संभाल रहे हैं. अल्केश की मुख्य विशेषज्ञता बॉलीवुड, एंटरटेनमेंट, वायरल सिनेमा ट्रेंड्स और सेलिब्रिटी एक्सक्लूसिव्स में है. साल 2012 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने वाले अल्केश ने दैनिक भास्कर, हिन्दुस्तान टाइम्स, राजस्थान पत्रिका और NDTV जैसे देश के अग्रिम मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. अल्केश ने अपने करियर में अर्जुन रामपाल, ऋचा चड्ढा और राजपाल यादव जैसी कई दिग्गज बॉलीवुड हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यूज किए हैं. फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस एनालिसिस, सेलिब्रिटी गॉसिप्स और एंटरटेनमेंट ट्रेंड्स का इन-डेप्थ डेटा एनालिसिस करना उनका मजबूत पक्ष है. वे पाठकों तक बॉलीवुड जगत की हर छोटी-बड़ी खबर सटीक, निष्पक्ष और विश्लेषणात्मक तरीके से पहुंचाते हैं. आप अल्केश कुशवाहा से सीधे alkesh.kushwaha@zeemedia.com पर संपर्क कर सकते हैं.
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