'हर 80 KM पर बदलती है भाषा...' अजय देवगन ने बताया, क्यों हिंदी फिल्म बनाना है सबसे मुश्किल?
Ajay Devgn: बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन ने हाल ही में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के इवेंट में बताया कि हिंदी फिल्में बनाना रीजनल सिनेमा से अधिक चुनौतीपूर्ण क्यों है. जानें दर्शकों की बदलती पसंद और बॉक्स ऑफिस पर इसके असर के बारे में-
Ajay Devgn: बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन इन दिनों अपनी फिल्म 'दृश्यम 3' को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. अजय देवगन का मानना है कि भारत जैसे विविधता भरे देश में हिंदी फिल्म बनाना रीजनल फिल्मों की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि फिल्म निर्माता हमेशा अपने टारगेट दर्शकों की सटीक पहचान नहीं कर पाते. बुधवार को फिक्की फ्रेम्स (FICCI Frames) के एक इवेंट में बोलते हुए अजय देवगन ने कहा कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय या रीजनल सिनेमा का योगदान कम नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनका व्यक्तिगत मानना है कि हिंदी फिल्म बनाना सबसे कठिन है.
उन्होंने समझाया कि रीजनल सिनेमा में मेकर्स को अपनी जगह के दर्शकों और उनकी पसंद की अच्छी तरह समझ होती है, जबकि हिंदी फिल्मों के मामले में हर 80 से 90 किलोमीटर पर भाषा, संस्कृति और स्वाद बदल जाता है. शहरों, कस्बों और उपनगरों के दर्शकों के बीच पसंद का अंतर होने के कारण फिल्म किसी एक वर्ग को पसंद आती है और दूसरे को नहीं, जिससे बॉक्स ऑफिस पर बड़े आंकड़े हासिल करना मुश्किल हो जाता है.
सभी दर्शकों को एक साथ जोड़ना कितना मुश्किल?
अजय देवगन ने साफ किया कि इस बड़ी वैरायटी के कारण हिंदी सिनेमा के लिए एक ऐसी फिल्म बनाना बेहद जटिल है, जो सभी दर्शकों से समान रूप से जुड़ सके. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सिनेमा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां निर्माता अपने दर्शकों की सोच, मानसिकता और व्यवहार को अच्छी तरह जानते हैं. इसके विपरीत, हिंदी सिनेमा को देश के हर क्षेत्र और वर्ग के दर्शकों के अनुसार जगह बनानी पड़ती है, जो इसे सबसे कठिन काम बनाता है.
क्या अब केवल बड़े स्टार्स के नाम पर फिल्में चलती हैं?
आज उपलब्ध कंटेंट की विभिन्नता का जिक्र करते हुए अजय देवगन ने कहा कि दर्शकों की अपेक्षाएं अब पूरी तरह बदल चुकी हैं. अब दर्शक महज बड़े नामों या स्टार पावर के आधार पर फिल्में देखने के लिए तैयार नहीं होते. अजय देवगन के अनुसार, आज के दर्शकों के पास मनोरंजन के ढेरों विकल्प मौजूद हैं, इसलिए वे केवल उसी काम को पसंद करते हैं जो वास्तव में अच्छा होता है. अगर कंटेंट सही नहीं है, तो वे उसे तुरंत खारिज कर देते हैं.
कंटेंट का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर क्या असर पड़ता है?
दर्शकों के इस बदले रवैये ने फिल्म के कंटेंट और उसके बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन के रिश्ते को भी पूरी तरह बदल दिया है. अजय देवगन ने अंत में कहा कि आज बॉक्स ऑफिस पर कमाई के आंकड़े केवल तभी आते हैं, जब आपने एक अच्छी फिल्म बनाई हो. पहले के दौर में विकल्पों की कमी के कारण खराब फिल्में भी कमाई कर लेती थीं, लेकिन आज ऐसा नहीं है. यदि फिल्म अच्छी नहीं बनी है, तो वह प्रदर्शन के दूसरे ही दिन बॉक्स ऑफिस पर धड़ाम से गिर जाती है.