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बॉलीवुड एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन ने बार-बार खुद को एक ग्लोबल आइकन के रूप में साबित किया है. 'मिस वर्ल्ड' बनने के अलावा उन्होंने कई अन्य मौकों में भी वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है. जहां ज्यादातर लोग फैशन और एक्टिंग जैसी चीजों में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को अपनाने की कोशिश करते हैं. वहीं, ऐश्वर्या ने अपनी भारतीय पहचान को पूरी तरह से बनाए रखा. उन्होंने पश्चिमी तौर-तरीकों में ढलने या खुद को बदलने की कोशिश किए बिना ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई.
क्या आपको डेविड लेटरमैन के साथ उनका वायरल इंटरव्यू याद है? जब लेटरमैन ने उनसे भारत में बालिग बच्चों के अपने माता-पिता के साथ रहने के बारे में सवाल पूछा, तो ऐश्वर्या ने बहुत बढ़िया जवाब दिया. लेटरमैन ने पूछा था, 'वैसे, क्या आप अपने माता-पिता के साथ रहती हैं? क्या यह सच है?' इस पर ऐश्वर्या ने बड़ी समझदारी से जवाब देती हैं, 'अपने माता-पिता के साथ रहना बिल्कुल ठीक है. भारत में तो यह बहुत आम बात है कि हमें अपने माता-पिता के साथ डिनर करने के लिए उनसे कोई अपॉइंटमेंट नहीं लेना पड़ता.'

दिलचस्प बात यह है कि 1994 में ऐश्वर्या का 'मिस वर्ल्ड' जीतना, सिर्फ एक ब्यूटी पेजेंट जीतने से कहीं बढ़कर था. इसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय महिलाओं को देखने के नजरिए में एक बड़ा बदलाव ला दिया. उनकी समझदारी, संयम और साफ जवाबों ने भारतीय महिलाओं के बारे में बनी पुरानी रूढ़िवादी धारणाओं को चुनौती दी. असल में उनके शुरुआती मॉडलिंग करियर और लोरियल (L’Oréal) व लॉन्जिन्स (Longines) जैसे बड़े दुनियाभर के ब्रांडों के साथ उनके जुड़ाव ने वैश्विक स्तर पर उनकी पहचान को और मजबूत किया.
लोरियल के साथ उनका काम आज भी उनके करियर का एक अहम हिस्सा माना जाता है. इस ब्रांड के साथ उनका लंबे समय तक जुड़ा रहना. एक ग्लोबल ब्यूटी आइकन के रूप में उनके प्रभाव, आकर्षण और लोगों के भरोसे को साबित करता है. ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि ऐश्वर्या ने दुनियाभर के लिए 'भारतीय सुंदरता' की परिभाषा ही बदल दी.
इतना ही नहीं, बॉलीवुड के शौकीन 'हम दिल दे चुके सनम' (1999), 'देवदास' (2002), 'गुरु' (2007), 'जोधा अकबर' (2008) और अन्य फिल्मों में राय के किरदारों को बखूबी जानते हैं. उन्होंने इन फिल्मों में काफी मजबूत महिला किरदारों को निभाकर काफी तारीफ बटोरी. जब कान्स फिल्म फेस्टिवल में 'देवदास' का प्रीमियर हुआ, तो राय के अभिनय और रेड कार्पेट पर उनकी मौजूदगी ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा. यह एक ऐसा पल था जब इंटरनेशनल मंच पर भारतीय सिनेमा और भारतीय महिलाओं को ग्लैमरस, सक्षम और क्रिएटिविटी रूप से अहम माना गया. उन्होंने सुनहरे बॉर्डर वाली नीता लुल्ला की चटक पीले रंग की साड़ी पहनी थी, जिसके साथ ट्रेडिशन कुंदन के ज्वेलरी थी. ट्रेडिशनल लुक में उनका अवतार बेमिसाल था.

एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय ने बॉलीवुड तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इंटरनेशनल फिल्मों में भी अपनी पहचान बनाई. एक्ट्रेस ने 'ब्राइड एंड प्रेजुडिस' (2004), 'द मिस्ट्रेस ऑफ स्पाइसेज' (2005) और 'द पिंक पैंथर 2' (2009) जैसी फिल्मों में काम करके दुनियाभर के दर्शकों तक भारतीय कलाकारों की पहुंच बनाई. हालांकि, उनका मकसद सिर्फ हॉलीवुड में जगह बनाना नहीं था, बल्कि इंटरनेशनल सिनेमा में भारतीय प्रतिभा को पहचान दिलाना भी था.
इसके बाद साल 2004 में ऐश्वर्या राय को मैडम तुसाद के वैक्स म्यूजियम में जगह मिली. ऐसा सम्मान पाने वाली एक्टर्स दूसरी बॉलीवुड स्टार बनीं. ये उनकी बढ़ती पॉपुलैरिटी का ही एक उदहारण था. इसके अलावा मशहूर खिलौना कंपनी मैटल ने 'बॉलीवुड बार्बी' नाम से गुड़ियों की एक खास रेंज भी लॉन्च की थी. इन गुड़ियों का लुक ऐश्वर्या राय से प्रेरित था.
वह भारत का पहला ऐसा जाना-पहचाना चेहरा बनीं, जो ओपरा विनफ्रे के साथ इंटरव्यू में बैठी. फिर स्टीव मार्टिन के साथ स्क्रीन शेयर की. जबकि दूसरी ओर संजय लीला भंसाली की फिल्म में एक आदर्श भारतीय बहू के रूप में नजर आईं. आज भी एक्ट्रेस कान्स फिल्म फेस्टिवल में अपने हर नए लुक के जरिए लोगों का ध्यान खींच लेती हैं.
आज भी ऐश्वर्या राय की गिनती उनमें होती है, जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों और उनके अधिकारों पर अपनी बात रखती हैं. नवंबर 2024 में उन्होंने दुबई में हुए ग्लोबल विमेंस फोरम में महिलाओं को सशक्त बनाने और मुश्किल हालात में मजबूती से खड़े रहने जैसे विषयों पर अहम स्पीच दी थी.
दिलचस्प बात यह है कि ऐश्वर्या का सफर उस दौर से जुड़ा है, जब 1990 और 2000 के दशक में भारत की अपनी पहचान भी बदल रही थी. तब दुनिया में भारतीय महिलाओं को एक खास पारंपरिक छवि में देखा जाता था. लेकिन धीरे-धीरे महिलाएं को लेकर इस सोच से बाहर निकलकर अपनी अलग पहचान बनाने लगीं. ऐसे वक्त में एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय ने सिर्फ अपनी खूबसूरती से नहीं बल्कि आत्मविश्वास और सफलता का प्रतीक बनकर पहचानी जाने लगीं. उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान ने भारतीय महिलाओं को दुनिया के सामने एक नए अंदाज में पेश किया.