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इस शापित गजल ने छीन ली कई गायक की जान, 50 साल पुरानी गजल को आज भी गाने से डरते हैं सिंगर

गजल सुनना भला किसे पसंद नहीं होता है. क्या आप जानते हैं एक ऐसी खूबसूरत गजल है जिसे सुनने से कई सिंगर की जान चली गई है. आइए जानते हैं 70 के दशक के में लिखी शापित गजल की कहानी.

Written By Shilpa Singh
Published: Sep 20, 2026, 09:44 PM IST | Updated: Sep 20, 2026, 11:34 PM IST
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70 के दशक में एक ऐसी गजल लिखी गई थी, जिसे गाने वाले से लेकर लिखने वाले से जुड़े लोगों की मौत हो गई. जिसके बाद से इस गजल को शापित गजल माना जाता है. आज भी सिंगर इस गजल को गाने से डरते हैं. चलिए जानते हैं उस गजल के बारे में जिसे गुनगुनाने के ख्याल से भी बड़े-बड़े सिंगर डर जाते हैं.

अमानत अली ने गाई थी गजल 

जिस गजल को गुनगुना के ख्याल से आज भी सिंगर डर जाते हैं, उस गजल को इब्ने-इंशा ने लिखा था. पंजाब के फिलौरी में पैदा हुए शेर मोहम्मद खान को इब्ने इंशा के नाम से दुनिया जानती है. बंटवारे के दौरान वह पाकिस्तान चले गए. उन्होंने कई गजल लिखे थे. उनकी भाषा बेहद खास थी. वह उर्दू के बेहतरीन व्यंग्यकार थे. उनकी व्यंग्य उर्दू की आखिरी किताब आज भी बेहद पॉपुलर है.

कल चौदहवी की रात भी इब्न ए इंशा ने की थी रचना 

इब्न-ए-इंशा ने कई गजल के बोल लिखे हैं. जगजीत सिंह और गुलाम अली की आवाज में आपके कल चौदहवीं की रात थी गजल को कई बार सुना होगा. क्या आप जानते हैं ये खूबसूरत गजल की रचना इब्न-ए-इंशा ने ही की थी.

शापित गजल 

इब्न-ए-इंशा की शापित गजल इंशा जी उठो अब कूच करो, इस शहर में जी को लगाना क्या. वहशी को सुकूं से क्या मतलब, जोगी का नगर में ठिकाना क्या. जब उन्होंने इस गजल को चिट्ठी में लिखा था उसके बाद उनकी मौत हो गई थी. इस गजल में मोह माया अलगाव की बात की है.

अमानत अली की हुई थी मौत 

इंशा जी उठो अब कूच करो, इस शहर में जी को लगाना क्या, इस गजल को सबसे पहले साल 1974 में पटियाला घराने के उस्ताद अमानत अली खान ने पाकिस्तान टीवी पर गाया था. गजल टेलीकास्ट होने के कुछ ही महीनों बाद उस्ताद अली की मौत हो गई थी. महज 52 साल की उम्र में वह इस दुनिया से रुखसत हो गए.

असद अमानत अली की भी हुई मौत 

साल 2006 में उस्ताद अमानत अली खान के बेटे असद अमानत अली ने एक कॉन्सर्ट में पिता का गया हुआ गजल परफॉर्म किया था. कुछ महीने बाद असद भी भी अचानक मौत हो गई. जैसे उनके पिता का निधन हुआ था.

प्रोड्यूसर की मौत 

उस्ताद अमानत अली खान के 7 बच्चे थे. उनके बड़े बेटे अमजद भी ये गजल गाते थे. अब वो इस दुनिया में नहीं है. इस गजल के प्रोड्यूसर भी इस दुनिया में नहीं है. उस्ताद अमानत अली के बेटे शफाकत अमानत अली का कहना है कि वह अंधविश्वासी नहीं हैं. लेकिन परिवार के गुजारिश की है ये गजल कभी मत गाना. शफाकत ही नहीं बड़े-बड़े सिंगर इस गजल को गाने से कतराते हैं.

डिस्क्लेमर: ‘शापित गजल’ की कहानी एक प्रचलित मान्यता है. अमानत अली के परिवार ने शफकत अमानत अली से इसे न गाने की गुजारिश जरूर की थी, लेकिन गजल और कलाकारों की मौतों के बीच किसी अलौकिक संबंध का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.

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About the Author

मैं शिल्पा सिंह, पिछले 6 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हूं. मैं 4 साल से ज़ी न्यूज़ हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम कर रही हूं. ज़ी न्यूज़ में मैं एंटरटेनमेंट बीट पर भी काम कर रही हूं. मैंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंडिया न्यूज़ डिजिटल से की थी. इसके बाद वन इंडिया डिजिटल और जागरण न्यू मीडिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी काम किया है. इस दौरान मैंने एंटरटेनमेंट बीट पर लेखन के साथ-साथ सेलेब्रिटी इंटरव्यू, वीडियो स्टोरी, फिल्म रिव्यू और रिसर्च-बेस्ड कंटेंट की कवरेज की है. मैंने जामिया मिलिया इस्लामिया से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. मेरा उद्देश्य किसी भी बीट पर काम करते हुए पाठकों तक सही, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी देना है.
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