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आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) के निदेशक प्रोफेसर शिरीष बी. केदारे इन दिनों सुर्खियों में हैं. दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को हुई मौत के बाद संस्थान में छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. इसी बीच सोशल मीडिया पर उनके इस्तीफे की चर्चाएं भी सामने आईं.
हालांकि, IIT बॉम्बे ने स्पष्ट किया है कि प्रोफेसर शिरीष केदारे ने इस्तीफा नहीं दिया है. संस्थान का कहना है कि मामले की जांच जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी.
शैक्षणिक सफर कैसा रहा?
प्रोफेसर शिरीष बी. केदारे IIT बॉम्बे के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग के वरिष्ठ प्रोफेसर हैं और इसी संस्थान के पूर्व छात्र भी रहे हैं. उन्होंने वर्ष 1985 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और 1992 में पीएचडी IIT बॉम्बे से पूरी की. पिछले कई दशकों से उनका शोध कार्य ऊर्जा, पर्यावरण और सतत विकास (Sustainable Development) जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित रहा है. वे देश के प्रमुख ऊर्जा विशेषज्ञों में गिने जाते हैं.
किन क्षेत्रों में किया शोध?
शिरीष केदारे का शोध मुख्य रूप से सौर ऊर्जा, थर्मल एनर्जी स्टोरेज, नवीकरणीय ऊर्जा तकनीक, ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और भारतीय उद्योगों में कार्बन उत्सर्जन कम करने वाली तकनीकों पर आधारित रहा है. उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में कई शोध पत्र प्रकाशित किए हैं. उनके नाम कई पेटेंट दर्ज हैं और उन्होंने अनेक पीएचडी शोधार्थियों तथा स्नातकोत्तर छात्रों का मार्गदर्शन भी किया है. इसके अलावा वे विभिन्न रिसर्च, कंसल्टेंसी और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट परियोजनाओं से भी जुड़े रहे हैं.
डायरेक्टर कब बने?
प्रोफेसर शिरीष बी. केदारे ने 6 मई 2024 को IIT बॉम्बे के निदेशक का पदभार संभाला था. उन्होंने इस पद पर प्रोफेसर सुभाषिस चौधरी का स्थान लिया. इससे पहले वे नवंबर 2019 से संस्थान के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन ऑयल, गैस एंड एनर्जी के प्रोफेसर-इन-चार्ज रहे. इसके अलावा वे IIT मद्रास के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य और शिक्षा मंत्रालय के तहत IIT परिषद के नामित सदस्य भी रह चुके हैं.
विवाद कैसे शुरू हुआ?
पूरा विवाद दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद शुरू हुआ. IIT बॉम्बे ने शुरुआती बयान में कहा था कि परीक्षा के दौरान साहिल के पास मोबाइल फोन मिला था और उन्होंने कथित तौर पर प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड किया था. संस्थान ने यह भी कहा था कि छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी तथा फैकल्टी और विभागाध्यक्ष ने उसे भरोसा दिलाया था कि इस घटना का उसके शैक्षणिक भविष्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा. बाद में IIT बॉम्बे ने अपने शुरुआती बयान पर खेद जताते हुए कहा कि घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जांच अभी संबंधित एजेंसियां कर रही हैं.
छात्रों की मांग क्या है?
साहिल वाकोडे की मौत के बाद छात्रों ने संस्थान के रवैये पर सवाल उठाए और स्वतंत्र जांच की मांग की. विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं और शिकायत निवारण व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग उठाई. उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संस्थान को पारदर्शी और संवेदनशील व्यवस्था विकसित करनी चाहिए.
18 सूत्रीय मांगपत्र में क्या है?
छात्रों और प्रशासन के बीच हुई बैठक में 18 सूत्रीय मांगपत्र पर चर्चा हुई, जिस पर निदेशक ने हस्ताक्षर किए. इसमें साहिल वाकोडे की मौत की स्वतंत्र जांच, ओपन हाउस मीटिंग, संस्थान की ओर से माफी, बेहतर मानसिक स्वास्थ्य एवं काउंसलिंग सेवाएं, फैकल्टी सेंसिटाइजेशन, अनुशासनात्मक प्रक्रिया में बदलाव, छात्रों की अधिक भागीदारी और 24 घंटे मनोचिकित्सक उपलब्ध कराने जैसी मांगें शामिल हैं. छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई न करने और सुधारों के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने की भी मांग की है. मांगपत्र में यह भी उल्लेख है कि यदि एक महीने के भीतर सहमत सुधार लागू नहीं किए गए तो निदेशक के इस्तीफे की मांग जारी रहेगी.
अब सभी की नजर दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर है. पहला, साहिल वाकोडे की मौत की जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और दूसरा, संस्थान 18 सूत्रीय मांगपत्र में शामिल सुधारों को किस तरह लागू करता है. IIT बॉम्बे ने कहा है कि वह छात्रों के साथ संवाद जारी रखेगा और उनकी चिंताओं पर चर्चा के लिए ओपन हाउस का आयोजन भी करेगा. वहीं, निदेशक शिरीष बी. केदारे के इस्तीफे को लेकर चल रही अटकलों पर संस्थान ने फिलहाल स्पष्ट किया है कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है और इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.