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OSM विवाद के 4 महीने बाद CBSE को मिला नया मुखिया, जानिए कौन हैं मनदीप भंडारी? जिन्हें बनाया गया नया चेयरमैन

CBSE New Chairman News: OSM मूल्यांकन विवाद के 4 महीने बाद मनदीप भंडारी के रूप में CBSE को नया मुखिया मिल गया है. हालांकि, उनके सामने चुनौतियां कम नहीं हैं, जिनसे उन्हें जूझना होगा.

Written By Devinder Kumar
Published: Sep 25, 2026, 10:10 PM IST | Updated: Sep 25, 2026, 10:15 PM IST
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CBSE Chairman Mandeep Bhandari News: OSM मूल्यांकन विवाद के 4 महीने बाद CBSE को नया मुखिया मिल गया है. सरकार ने सीनियर आईएएस अधिकारी मनदीप भंडारी को संस्था का नया चेयरमैन नियुक्त किया है. इसके साथ ही संस्था में अब सुचारू रूप से काम शुरू हो जाएगा. आइए, जानते हैं कि मनदीप भंडारी कौन हैं, जिन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है.

CBSE में चेयरमैन की हुई नियुक्ति

केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक,  AGMUT कैडर के IAS मनदीप भंडारी को CBSE का चेयरमैन बनाया गया है. वे 2001 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. वे शिक्षा मंत्रालय के तहत इस जिम्मेदारी को संभालेंगे. इस पद पर रहते हुए उन्हें भारत सरकार के अपर सचिव के बराबर रैंक और वेतन मिलेगा.

कौन हैं CBSE के नए मुखिया?

CBSE का मुखिया बनने से पहले वे जम्मू-कश्मीर और केंद्र में कई वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर कार्य कर चुके हैं.  वे लेह और जम्मू के डिप्टी कमिश्नर भी रह चुके हैं. आईएएस बनने से पहले वे एमबीबीएस डॉक्टर थे. उन्होंने 2018 में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के निजी सचिव के रूप में कार्य किया. इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव बनाया गया.

माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के रह चुके हैं सीईओ

मनदीप भंडारी श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के भी सीईओ रह चुके हैं. वे जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य विभाग में भी अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. अब वे देश में स्कूली शिक्षा तंत्र को सुधारने के मिशन में जुटेंगे. उनकी नियुक्ति CBSE में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर शुरू हुए विवादों के बीच हुई है.

OSM प्रणाली में सुधार की चुनौती

असल में बोर्ड ने डिजिटल मूल्यांकन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2026 में कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए OSM प्रणाली शुरू की गई थी. इसमें उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके मूल्यांकनकर्ताओं को डिजिटल मूल्यांकन के लिए उपलब्ध कराया जाता था.

बाद में जब स्टूडेंट्स ने स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुंच मांगी तो उन्हें स्कैन की गई धुंधली कॉपियां मिलीं. कई कॉपियों में पन्ने गायब थे. कई उत्तर पुस्तिकाएं ऐसी मिलीं, जो स्टूडेंट्स की थी ही नहीं. इसके बाद स्टूटेंड्स और पैरेंट्स ने इस पर आपत्ति जताई. जिसके चलते यह प्रणाली विवादों में आ गई.

 

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About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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