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UPSC 100 Years Foundation Day PM Modi Speech: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के आज, 1 अक्टूबर को 100 साल पूरे हो चुके हैं. इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 'मंथन' शताब्दी समारोह को संबोधित किया. इस खास उपलक्ष्य में पीएम मोदी ने एक विशेष स्मारक सिक्का, डाक टिकट और आयोग के 100 सालों के इतिहास पर आधारित एक स्पेशल बुक का विमोचन किया. संघ लोक सेवा आयोग के इस शताब्दी समारोह में देशभर के राज्य लोक सेवा आयोगों (State PSCs) के अध्यक्ष, सदस्य और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए.
इस शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने देश को संबोधित करते हुए भविष्य की भर्ती प्रक्रिया और UPSC एग्जाम साइकल पर जोर दिया. उन्होंने भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं पर बात करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में यूपीएससी को अपनी परीक्षा और चयन प्रक्रिया को और अधिक समयबद्ध और तेज बनाना होगा, जिससे युवाओं का कीमती समय बचे.
साथ ही उन्होंने पारदर्शिता और जन-विश्वास को लेकर कहा कि बदलती तकनीक के बीच भी परीक्षा की ट्रांसपेरेंसी, निष्पक्षता और अभ्यर्थियों के भरोसे से कोई समझौता नहीं होना चाहिए.
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि 100 साल की ये यात्रा सिर्फ अतीत का जश्न मनाने के लिए नहीं है, बल्कि 'विकसित भारत 2047' के सपनों को साकार करने के लिए एक तकनीक-संचालित और कुशल प्रशासनिक ढांचा तैयार करने का अवसर है.
100 years of UPSC is a proud milestone. For a century, it has played an important role in administration and serving people. https://t.co/8mLKPv4jXU
— Narendra Modi (@narendramodi) October 1, 2026
पीएम मोदी ने भर्ती को लेकर आयोग से कहा कि वो जब सिविल सर्विस की भर्ती करते हैं तब उन्हें सिर्फ इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि उम्मीदवार सर्विस की परीक्षा के बारे में कितना जानता है, बल्कि वो सिविल सर्विस में क्यों और किस उद्देश्य आ रहा है, ये जरूर जान लीजिए. पीएम ने कहा कि भविष्य में उन युवाओं को रखा जाना चाहिए जो ऑफिस से नहीं पब्लिक सर्विस से आकृषित होते हैं.
उन्होंने बताया कि वो जब ट्रेनिंग सेंटर्स में युवाओं से मिलते हैं तो अक्सर उनसे कहते हैं कि अपने पास एक नोट रखें, जिसमें वो ये जरूर लिखकर रखें कि वो सिविल सर्विस में क्यों आए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि यूपीएससी को 100 साल पूरे हो गए हैं और 1992 में सिर्फ 3 प्रतिशत महिलाएं थी जो इसमें शामिल होती थीं. वहीं, अब इस परीक्षा का लाभ शहरों तक नहीं बल्कि गांव और कस्बों के युवा भी उठा रहे हैं. पुरुष और महिलाओं दोनों उम्मीदवार पहले की तुलना में अधिक शामिल हो रहे हैं. पहले जहां सिर्फ 3 प्रतिशत महिलाएं शामिल होती थीं, अब 30 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं सिविल सर्विस से जुड़ चुकी हैं. जाकर हैरानी हो सकती है मगर ये सच है कि यूपीएससी के इतिहास में चार महिलाएं चेयरपर्सन के पद पर रही हैं जिनमें से 3 महिलाएं साल 2014 के बाद बनी हैं.
पीएम मोदी ने आयोग से ये भी कहा कि वो एग्जामिनेशन साइकिल को भी कम करने का सोच सकते हैं. हालांकि, उन्होंने ये भी जानकारी दी कि इन 100 सालों में आयोग की ओर से 100 दिनों को कम किया जा चुका है. उम्मीद है कि आगे इसके बारे में विचार किया जा सकता है.