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Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti 2026: भारत के राजनीतिक गलियारे और इतिहास के पन्नों से लेकर जब बात दृढ़ इच्छाशक्ति और अखंडता की होती है, तो सबसे पहले सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम आता है. उनके सम्मान में गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया गया है, जो न केवल देश में, बल्कि पूरी दुनिया में सबसे ऊंची प्रतिमा के रूप में जानी जाती है. हर साल 31 अक्टूबर को भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाई जाती है, जिसे राष्ट्रीय एकता दिवस के तौर पर जाना जाता है.
देश भर में उनकी 182 मीटर ऊंची प्रतिमा यानी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की खास चर्चा हो रही है. लौह पुरुष ने अपने जीवनकाल में ऐसे ऐतिहासिक कार्य किए हैं कि आज भी पूरा देश उन्हें नमन करता है. आइए जानते हैं कि सरदार वल्लभभाई पटेल को देश का 'लौह पुरुष' क्यों कहा जाता है, उन्हें ये उपमा क्यों दिया और कैसे उन्होंने असंभव दिखने वाले भारत के एकीकरण को संभव बनाया.
इतिहास रचने वाले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के लिए उस वक्त सबसे बड़ी चुनौती रही, जब भारत आजाद हुआ था. 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के साथ ब्रिटिश हुकूमत ने भारत के टुकड़े तो किए लेकिन साथ की साथ देश के सामने एक और गंभीर संकट खड़ा कर दिया. 565 से अधिक रियासतें और रजवाड़ों के सामने पाकिस्तान और भारत में से एक को चुनना रहा, तब सरदार पटेल ने मजबूत फैसला लिया.
देश की आजादी के समय भारत में 565 से अधिक रियासतें और रजवाड़े थे, जिन्हें तीन ऑप्शन दिए गए- भारत में शामिल हो जाएं, आजाद रह सकते हैं या पाकिस्तान का हिस्सा बन जाएं. हालांकि, उस वक्त उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी समझदारी दिखाई और कठोर फैसला लिया जिसके चलते आज भारत एक बड़ा देश है. ऐसा नहीं होता तो भारत को छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटा हुआ देखना पड़ता.
भले ही ये सुनने में आसान लगे, लेकिन उन रियासतों का भारत में विलय करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था. कुछ रियासतें स्वतंत्र रहना चाहती थीं, तो कुछ पाकिस्तान के साथ जाने की तैयारी में थीं. ऐसे में सरदार पटेल ने अपनी कूटनीति और अटूट संकल्प शक्ति से इस असंभव दिखने वाले काम को संभव कर दिखाया. उन्होंने साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपनाने के साथ-साथ सैन्य कार्रवाई का सख्त कदम तक उठाया.
सरदार पटेल को लौह पुरुष कहने के पीछे की वजह उनके जीवन से जुड़े कई किस्सों से है. एक बार बचपन में खेलते समय उन्हें चोट लग गई थी और एक फोड़ा बन गया था, जिसे ठीक करने से डॉक्टर भी हिचकिचा रहे थे. ऐसे में उन्होंने खुद ही गर्म सलाख से उस फोड़े को दागकर ठीक कर लिया था. उनमें गजब की सहनशक्ति और दर्द से लड़ने का जो जज्बा बचपन में था, वही आगे चलकर उनकी पहचान बना.
रियासतों को भारत में शामिल करने की प्रक्रिया के दौरान जब हैदराबाद के नवाब ने हदें पार करते हुए स्वतंत्र रहने का जिद्द पकड़ा और सैन्य ताकत दिखाने की कोशिश की, तब पटेल ने पहले संयम बरता और फिर निजाम को कड़ी चेतावनी देते हुए ऑपरेशन पोलो के जरिए उस रियासत को भारत में सफलतापूर्वक मिला लिया.