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किताबें जलीं, मंदिर टूटे और टीचर्स की आ गई शामत... चीन का वो नेता, जिसने Cultural Revolution के नाम पर मचाया था कोहराम

चीन में 1966 से 1976 तक चली Cultural Revolution ने शिक्षा, संस्कृति और समाज को गहराई से प्रभावित किया. जानिए माओ त्सेतुंग ने यह अभियान क्यों शुरू किया और इसका चीन पर क्या असर पड़ा.

किताबें जलीं, मंदिर टूटे और टीचर्स की आ गई शामत... चीन का वो नेता, जिसने Cultural Revolution के नाम पर मचाया था कोहराम
Image Credit: क्या था Cultural Revolution का असली मकसद?

चीन के इतिहास में कुछ ऐसे दौर भी रहे हैं, जिन्हें याद करना आज भी आसान नहीं है. ऐसा ही एक दौर था Cultural Revolution, जो 1966 से 1976 तक चला. इसकी शुरुआत चीन के तत्कालीन नेता माओ त्सेतुंग ने की थी. माओ का दावा था कि चीन को पुरानी सोच और परंपराओं से निकालकर साम्यवादी विचारधारा के रास्ते पर आगे बढ़ाना जरूरी है.

हालांकि, इस अभियान का असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा. स्कूल, शिक्षक, किताबें, कला, धार्मिक स्थल और आम लोग भी इसकी चपेट में आए. बड़ी संख्या में लोगों को निशाना बनाया गया और चीन की पुरानी सांस्कृतिक विरासत को भारी नुकसान पहुंचा.

आखिर कौन था माओ त्सेतुंग?

माओ त्सेतुंग का जन्म 26 दिसंबर 1893 को चीन के हुनान प्रांत के शाओशान में एक किसान परिवार में हुआ था. उन्होंने शिक्षक बनने की ट्रेनिंग ली और बाद में बीजिंग पहुंचे. वहां उन्होंने यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में काम किया. इसी दौरान उनकी दिलचस्पी मार्क्सवादी विचारधारा में बढ़ी. साल 1921 में वह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए और हुनान में पार्टी की शाखा बनाई. उस समय चीन में सत्ता को लेकर अलग-अलग गुटों के बीच संघर्ष चल रहा था. 1927 में च्यांग काई-शेक के नेतृत्व में कम्युनिस्टों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई, जिसके बाद माओ और उनके साथी पीछे हट गए.

Long March ने कैसे बदली माओ की किस्मत?

1934 में जब राष्ट्रवादी ताकतों ने कम्युनिस्टों को घेर लिया, तब माओ ने अपने साथियों के साथ Long March शुरू की. यह करीब 6,000 मील लंबी यात्रा थी, जिसके जरिए कम्युनिस्ट चीन के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में अपना नया ठिकाना बनाने पहुंचे. जापान के खिलाफ 1937 से 1945 तक चले युद्ध के दौरान कम्युनिस्टों और राष्ट्रवादियों ने कुछ समय के लिए साथ काम किया. लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद दोनों के बीच फिर गृहयुद्ध शुरू हो गया. कम्युनिस्टों की जीत हुई और 1 अक्टूबर 1949 को माओ ने People's Republic of China की स्थापना का ऐलान किया. च्यांग काई-शेक भागकर ताइवान चला गया.

Great Leap Forward के बाद क्यों कमजोर हुई माओ की पकड़?

सत्ता में आने के बाद माओ और उनके साथियों ने चीन के समाज और अर्थव्यवस्था को नए तरीके से ढालना शुरू किया. उद्योगों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाया गया और किसानों को सामूहिक खेती के लिए संगठित किया गया. विरोध करने वालों पर सख्ती की गई.

साल 1958 में माओ ने Great Leap Forward नाम की योजना शुरू की. इसका मकसद खेती और उद्योग का उत्पादन तेजी से बढ़ाना था. लेकिन योजना उम्मीद के मुताबिक नहीं चली. कृषि उत्पादन में भारी गिरावट आई और खराब फसलों के साथ मिलकर हालात अकाल तक पहुंच गए. लाखों लोगों की मौत हुई. इस नीति को बाद में रोक दिया गया और माओ की राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई.

Cultural Revolution में शिक्षकों और संस्कृति पर क्या हुआ?

अपनी राजनीतिक पकड़ दोबारा मजबूत करने के लिए माओ ने 1966 में Cultural Revolution शुरू की. इसका लक्ष्य समाज से उन लोगों और विचारों को हटाना था, जिन्हें माओ साम्यवादी क्रांति के खिलाफ मानते थे. इस दौरान शिक्षक, बुद्धिजीवी और दूसरे लोग निशाने पर आए. पुरानी किताबों, कलाकृतियों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को भी नुकसान पहुंचा. कई जगहों पर हालात इतने बिगड़ गए कि शहरों में अराजकता जैसी स्थिति बनने लगी. सितंबर 1967 में माओ ने व्यवस्था बहाल करने के लिए सेना को भेजा.

इस पूरे दौर में करीब 15 लाख लोगों की मौत हुई. बाद के वर्षों में माओ ने अमेरिका, जापान और यूरोप से रिश्ते सुधारने की कोशिश की. 1972 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने चीन जाकर माओ से मुलाकात की. माओ का निधन 9 सितंबर 1976 को हुआ.

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About the Author

Shivam Tiwari

Shivam Tiwari

शिवम तिवारी, जी न्यूज में डिजिटल कंटेंट राइटर हैं और पत्रकारिता में करीब 2 साल से अधिक का अनुभव रखते हैं. यूपी के प्रयागराज के रहने वाले शिवम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है. खबरों की नब्ज पकड़कर उन्हें आसान और साफ भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. शिवम शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर खास फोकस रखते हैं. इनमें स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षाएं, प्रवेश परीक्षाएं, सरकारी नौकरियां, रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स, करेंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज जैसे टॉपिक्स शामिल हैं.इसके अलावा शिवम, टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स और करियर काउंसलर्स की सलाह के आधार पर कंटेंट तैयार करते हैं. ये IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT और CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर गहराई से काम करते हैं और छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराते हैं. शिवम तिवारीर से संपर्क करने के लिए आप उन्हें shivam.tiwari@india.com पर ईमेल कर सकते हैं.
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