Government Employee Part Time Job Rules: 'सखी साइयां तो खूब ही कमात है महंगाई डायन खाए जात है...' ये गाना तो आपने भी सुना होगा जिसे मशहूर गाना अभिनेता और गायक रघुवीर यादव ने बहुत ही खूबसूरती के साथ शब्दों की माला बनाकर पिरोपा है और असल जिंदगी में ज्यादातर आम जनता के लिए एक तरह का सच भी है. बढ़ती महंगाई ने कईयों की रीढ़ी की हड्डी टेड़ी कर दी है. अब गुजारा सिर्फ दो रोटी तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से लेकर अन्य खर्चों के कारण हर महीने के आखिरी में मिलने वाली सैलरी कई बार काफी नहीं लगती है. ये ही कारण है कि चाहे कोई प्राइवेट नौकरी कर रहा हो या फिर सरकारी, उनके मन में अक्सर ये सवाल रहता है कि वो किस तरह अधिक कमाई कर सकते हैं.
भारत में अक्सर सरकारी नौकरी को सबसे सुरक्षित और बेहतर माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सरकारी कर्मचारी भी कई बार महंगाई के दबाव में ये सोचते हैं कि क्या वो पार्ट-टाइम काम कर सकते हैं? क्या कानूनी तौर पर सरकारी नौकरी होने के बावजूद कोई कर्मचारी पार्ट-टाइम नौकरी कर सकता है? अगर आपके मन में भी ऐसा कोई सवाल है, तो आइए विस्तार से जानते हैं कि नियम इस बारे में क्या कहते हैं?
नहीं, कोई भी सरकारी स्कूल का शिक्षक पैसे लेकर या प्राइवेट कोचिंग सेंटर चलाकर कमाई नहीं कर सकता है. कानूनन इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध है. RTE Act, 2009 की धारा 28 और CCS (आचरण) नियम, 1964 और नियम 15 के तहत किसी भी सरकारी टीचर के लिए प्राइवेट ट्यूशन और व्यावसायिक शिक्षण पर सख्त रोक है.
अक्सर हम सोचते हैं कि ऑफिस आवर्स के बाद हम जो भी करें, उस पर किसी की रोक नहीं हो सकती. सीधे शब्दों में कहें तो हमें लगता है कि ऑफिस के बाद अपने समय का इस्तेमाल करने की पूरी आजादी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कानून में कुछ ऐसे नियम हैं जो इस आजादी पर भी सीमाएं तय करते हैं? खासतौर पर सरकारी कर्मचारियों के लिए बने नियम कहते हैं कि ऑफिस के बाद किसी कंपनी के लिए फ्रीलांस काम करना हो या कोई बिजनेस शुरू करना हो, उसके लिए आधिकारिक मंजूरी लेना अनिवार्य है.

कोई भी सरकारी कर्मचारी बिना विभाग की पूर्व अनुमति के यूट्यूब चैनल से कमाई या बिजनेस बेनिफिट नहीं ले सकता है. इससे संबंधित केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम में लिखा हुआ है. सेंट्रल कंडक्ट रूल्स के नियम 15 के तहत किसी भी प्राइवेट तौर पर उत्पादित मीडिया प्रोग्राम या वीडियो मैगजीन में भाग लेने और किसी भी कार्य के बदले फीस या मानदेय लेने के लिए सरकार की पूर्व अनुमति लेना जरूरी है. यूट्यूब से मिलने वाला विज्ञापन राजस्व और स्पॉन्सरशिप इसी दायरे में आती है.

इसके अलावा नियम 8 में कहा गया है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी सरकार की मंजूरी के बिना किसी समाचार पत्र, पत्रिका या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का स्वामित्व, संपादन या प्रबंधन नहीं कर सकता. एक नियमित यूट्यूब चैनल भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सार्वजनिक मंच के रूप में ही देखा जाता है. इसके अलावा नियम 9 के अनुसार कर्मचारी अपने वीडियो या चैनल पर ऐसा कोई बयान नहीं दे सकता जो केंद्र या राज्य सरकार की किसी नीति की आलोचना करता हो या सरकार के साथ संबंधों को प्रभावित करता हो.
अतिरिक्त कमाई के लिए अगर आप भी अपनी सरकारी नौकरी के साथ कोई और काम करना चाहते हैं, तो इसके लिए सबसे पहले ये जरूर देख लें कि आप जहां काम कर रहे हैं, उस विभाग में अतिरिक्त कमाई के लिए पार्ट-टाइम नौकरी या किसी अन्य काम को करने की अनुमति मिल सकती है या नहीं. बिना अनुमति के काम करने से बचना चाहिए, क्योंकि नियमों का उल्लंघन करना भविष्य में भारी पड़ सकता है और सख्त कार्रवाई भी हो सकती है.
