Asian Games: कुमकुम मोहोद की तरह तीरंदाजी में बनाना है करियर? देश की टॉप आर्चरी एकेडमिक्स, एडमिशन और फीस की पूरी डिटेल
Career in Archery: एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाली तीरंदाज कुमकुम मोहोद की तरह आप भी कैसे तीरंदाजी में करियर बना सकते हैं, आइए देश की टॉप आर्चरी एकेडमिक्स, ट्रेनिंग, एडमिशन फीस और पूरी डिटेल्स जानते हैं.
Career in Archery: भारत की 17 वर्षीय बेटी कुमकुम मोहोद ने एशियन गेम्स 2026 में तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है. महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा के रोमांचक फाइनल मुकाबले में दक्षिण कोरिया की दिग्गज तीरंदाज ओह येजिन को कुमकुम ने शूट-ऑफ में पछाड़कर स्वर्णिम सफलता हासिल की. एशियन गेम्स के इतिहास में ये पहला मौका है जब महिला व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी में भारत को गोल्ड मेडल मिला है. इसके साथ ही इन खेलों में कुमकुम ने डबल गोल्ड अपने नाम कर लिया है.
इस साल एशियन गेम्स में भारतीय तीरंदाजों का ये 5वां गोल्ड मेडल रहा. शुरुआती सेट में पिछड़ने के बाद कुमकुम ने शानदार वापसी की और तीसरे सेट में लगातार तीन 'परफेक्ट 10' लगाकर मैच का रुख बदल दिया. अगर आप भी कुमकुम मोहोद की तरह तीरंदाजी सीखकर देश का नाम रोशन करना चाहते हैं, तो आइए स्पोर्ट्स एक्सपर्ट्स महावीर सिंह रावत द्वारा आर्चरी में करियर बनाने से संबंधित कुछ खास बातों के बारे में जानते हैं. कैसे तीरंदाजी में करियर बनाने के लिए क्या उम्र होनी चाहिए? क्या तीरंदाजी एक बेहतर खेल हो सकता है, देश की टॉप आर्चरी एकेडमी कौन-कौन सी हैं, वहां एडमिशन की प्रक्रिया क्या है और ट्रेनिंग की फीस कितनी लगती है? इन सभी के बारे में जानते हैं.
किस उम्र में तीरंदाजी में करियर शुरू कर सकते हैं?
स्पोर्ट्स एक्सपर्ट्स महावीर सिंह रावत के अनुसार 'तीरंदाजी में करियर शुरू करने के लिए वैसे तो कोई सख्त उम्र तय नहीं है, लेकिन ये एक ऐसा गेम है जो आपकी मसल्स को स्ट्रेच करता है और उसमें थोड़ी ज्यादा ताकत अपर बॉडी की लगती है. इसलिए 9 से 10 साल की उम्र को इसकी ट्रेनिंग शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है.'
हालांकि, तीरंदाजी को सही तरीके से सीखने के लिए एक प्रोफेशनल ट्रेनर की मार्गदर्शन बेहद जरूरी होती है. अलग-अलग एंगल्स और दूरी पर स्थित टारगेट पर सटीक निशाना कैसे लगाना है, ये एक अनुभवी ट्रेनर ही सही तरीके से सिखा सकता है. वही आपको सही धनुष के चयन से लेकर सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल तक की सही जानकारी देते हैं. इसके साथ ही, इस खेल में निरंतर अभ्यास सबसे अहम है. आप जितना ज्यादा अभ्यास करेंगे, आपका निशाना उतना ही बेहतर होता जाएगा.
क्या तीरंदाजी खेल में स्वाभाविक प्रतिभा ज्यादा काम आती है?
क्या तीरंदाज में सही ट्रेनिंग और अनुशासन जरूरी?
स्पोर्ट्स एक्सपर्ट्स महावीर सिंह रावत का कहना है कि 'तीरंदाजी, कोई सहज या स्वाभाविक रूप से चुना जाने वाला खेल नहीं है. इसमें बस आपकी लगन और रुचि होनी चाहिए. सबसे जरूरी बात ये है कि आपके आस-पास खेलने का माहौल कैसा है. अक्सर देखा गया है कि तीरंदाजी में ज्यादातर खिलाड़ी छत्तीसगढ़ या झारखंड जैसे राज्यों से आते हैं, क्योंकि वहां इसका एक पारंपरिक इतिहास रहा है और ट्रेनिंग संबंधी सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं. वहां युवाओं ने तीरंदाजी के जरिए तरक्की करते देखा है। क्रिकेट या फुटबॉल जैसे खेलों के लिए तो जगह-जगह अकादमियां और प्रोत्साहन मिल जाता है, जिन्हें माता-पिता भी खिलाना चाहते हैं, लेकिन तीरंदाजी ऐसा खेल नहीं है जिसके लिए बचपन से घर में बढ़ावा मिले.'
भारत की टॉप आर्चरी अकादमी कौन सी हैं?
टाटा तीरंदाजी अकादमी:- झारखंड के जमशेदपुर में स्थित 'टाटा तीरंदाजी अकादमी' को वैश्विक स्तर पर तीरंदाजी को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर के चैंपियंस तैयार करने में अपनी खास भूमिका के कारण ही इस अकादमी को 'भारतीय तीरंदाजी की नर्सरी' भी कहा जाता है. विश्व प्रसिद्ध भारतीय तीरंदाज दीपिका कुमारी और डोला बनर्जी जैसे दिग्गजों ने इसी अकादमी से तीरंदाजी के गुर सीखे हैं.
संजीव सिंह आर्चरी संस्थान:- उत्तर प्रदेश के देवरिया में स्थित संजीव सिंह आर्चरी इंस्टीट्यूट को दुनिया की पहली एकीकृत ग्रामीण तीरंदाजी अकादमी के तौर पर जाना जाता है. ये संस्थान, द्रोणाचार्य और अर्जुन पुरस्कार विजेता संजीव सिंह द्वारा निर्देशित है. बात करें अन्य खासियत की तो यहां पर ओलंपिक स्तर के इनडोर और आउटडोर रेंज उपलब्ध हैं. इसके अलावा स्पोर्ट्स साइंस लैब समेत 100 बिस्तरों वाला हॉस्टल भी है.
द्रोणाचार्य आर्चरी अकादमी:- गुरुग्राम में स्थित द्रोणाचार्य आर्चरी अकादमी को दिल्ली-NCR क्षेत्र का सबसे टॉप तीरंदाजी अकाडमी कहा जाता है. इसे अंतरराष्ट्रीय कोच कपिल कौशिक के मार्गदर्शन में चलाया जाता है. यहां से ऋषभ यादव जैसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में मेडल हासिल किया था.
एकलव्य तीरंदाजी अकादमी:- झारखंड में स्थित एकलव्य तीरंदाजी अकादमी का संचालन स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) द्वारा किया जाता है. इसका मकसद ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की प्रतिभाओं की खोज करना है. यहां रक उन बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है जो गरीब परिवारों से आते हैं. शिक्षा के अलावा रहने और आधुनिक उपकरण की व्यवस्था भी बिल्कुल मुफ्त होती है.
दृष्टि तीरंदाजी अकादमी:- महाराष्ट्र के सतारा में स्थित दृष्टि तीरंदाजी अकादमी भी तीरंदाजी संस्थानों में टॉप मानी जाती है. यहां से देश को सबसे युवा सीनियर वर्ल्ड चैंपियन अदिति स्वामी और ओजस देवतले जैसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने विश्व स्तर पर जीत हासिल की है.
तीरंदाज कुमकुम मोहोद ने किस अकादमी से की ट्रेनिंग?
एशियन गेम्स 2026 में महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में भारत के लिए तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीतने वाली 17 साल की कुमकुम मोहोद ने राधे आर्चरी अकादमी से ट्रेनिंग की है. ये तीरंदाज अकाडमी महाराष्ट्र के अमरावती में स्थित है. गोल्ड मेडलिस्ट कुमकुम मोहोद को अकादमी में कोच प्रफुल्ल डांगे द्वारा ट्रेनिंग दी जाती थी.
आर्चरी एकेडमिक में एडमिशन से कैसे मिल सकता है?
- ओपन सेलेक्शन ट्रायल्स:- ज्यादातर सरकारी और टॉप अकादमियों की ओर से हर साल राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर 'ओपन सेलेक्शन ट्रायल्स' का आयोजन किया जाता है. इन ट्रायल्स की सूचना आर्चरी एसोसिएशन की आधिकारिक वेबसाइटों और प्रमुख समाचार पत्रों में जारी की जाती है.
- फिजिकल फिटनेस और बेसिक टेस्ट:- आर्चरी सिर्फ निशाना लगाने का खेल नहीं है, बल्कि इसके लिए शारीरिक शक्ति और मानसिक एकाग्रता बहुत जरूरी है. इसलिए ट्रायल्स के दौरान खिलाड़ियों के हाथों और कंधों की ताकत, आई-हैंड को-ऑर्डिनेशन, फ्लेक्सिबिलिटी और सहनशक्ति का टेस्ट लिया जाता है.
- बेसिक आर्चरी एप्टीट्यूड टेस्ट:- नए खिलाड़ियों में ये देखा जाता है कि उनके अंदर फोकस करने और कोच की बात समझने की कितनी क्षमता है. वहीं, एडवांस स्तर के खिलाड़ियों के चयन के लिए टारगेट बोर्ड पर उनके पिछले प्रदर्शन या लाइव शूटिंग स्कोर को आधार बनाया जाता है.
- मेडिकल टेस्ट और आयु प्रमाण पत्र:- चयन होने पर आयु प्रमाण पत्र और मेडिकल फिटनेस रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य होता है. आमतौर पर सरकारी खेल योजनाओं और अकादमियों में 8 से 16 वर्ष की आयु के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है.
तीरंदाजी अकादमियों की फीस कितनी है?
तीरंदाजी अकादमियों की फीस इस बात पर निर्भर करती है कि आप किसी सरकारी संस्थान में एडमिशन ले रहे हैं या प्राइवेट एकेडमी में. इसके अलावा ट्रेनिंग के स्तर, हॉस्टल और उपकरणों के हिसाब से भी खर्च अलग-अलग होता है. आमतौर पर सरकारी और स्कॉलरशिप आधारित अकादमियों, जैसे- स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) से आर्चरी सीखने के लिए कोई मुख्य फीस नहीं देनी पड़ती, सिर्फ एक मामूली रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जाता है.
SAI के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE) में सेलेक्शन ट्रायल्स के जरिए चुने गए खिलाड़ियों को ट्रेनिंग, हॉस्टल, पौष्टिक आहार, स्पोर्ट्स किट और आधुनिक धनुष जैसी कई सुविधाएं पूरी तरह मुफ्त दी जाती हैं.
वहीं, टाटा आर्चरी एकेडमी या टॉप प्राइवेट अकादमियां में अगर कोई खिलाड़ी स्कॉलरशिप के तहत ऑल इंडिया टैलेंट ट्रायल्स के माध्यम से चुना जाता है तो वो मुफ्त में तीरंदाजी सीख सकता है. रहने, खानेपीने से लेकर कोचिंग और इंटरनेशनल लेवल के धनुष का खर्च अकेडमी उठाती है, जबकि पेड और प्राइवेट मोड में बिना स्कॉलरशिप के 20,000 रुपये से 1,00,000 प्रति साल तक की फीस चुकानी होती है.
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