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पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. इस बार उसने समंदर में खुराफात की है. उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के एक जहाज ने भारतीय नेवी के जहाज को जानबूझकर टक्कर मारने की कोशिश की, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया, भारतीय जहाज को तो कुछ नहीं हुआ, उल्टे पाकिस्तानी जहाज ही टूट-फूट गया और उसे भागना पड़ा. भारत चाहता तो उसी वक्त उसे समंदर में डुबो देता, लेकिन हमारे जवानों ने सब्र से काम लिया.
इस आर्टिकल में हम ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान की पहली टक्कर का DNA टेस्ट करेंगे. साल 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दोनों देश, तोप, मिसाइल, ड्रोन और फाइटर जेट उड़ा रहे थे, लेकिन इस बार समंदर में जहाज टकराए हैं. समंदर में भारत और पाकिस्तान के जहाजों की टक्कर हुई है. ये घटना अनजाने में नहीं हुई है. पाकिस्तान ने जानबूझकर इसे अंजाम दिया है.
15 सितंबर को एक पाकिस्तानी जहाज ने भारतीय नेवी के जहाज को टक्कर मारी. पाकिस्तानी जहाज की ये हरकत उत्तरी अरब सागर में हुई है. जानकारी के मुताबिक इस घटना में पाकिस्तानी नेवी का जहाज PNS हुनैन शामिल था. PNS हुनैन ने भारतीय नेवी के जहाज को दाहिनी तरफ से टक्कर मारने की कोशिश की थी, जिसके बाद दोनों जहाज स्टारबोर्ड साइड यानी अगले हिस्से पर टकराए थे. हालांकि इस टकराव में भारतीय नौसैनिक जहाज को कोई नुकसान नहीं हुआ, और भारत का ये जहाज अब भी अपने मिशन पर आगे बढ़ रहा है. दूसरी तरफ टक्कर मारने की कोशिश करने वाले पाकिस्तानी जहाज PNS हुनैन को ज्यादा नुकसान हुआ है, और इस जहाज को मरम्मत के लिए पाकिस्तान लौटने पर मजबूर होना पड़ा है.
जी न्यूज को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक भारतीय जहाज के कप्तान ने लगातार पाकिस्तानी जहाज को चेतावनी से भरे मैसेज भेजे थे, लेकिन पाकिस्तानी जहाज ने चेतावनियों को नकार दिया और भारतीय जहाज को टक्कर मारने की कोशिश की. पाकिस्तान की इस हरकत के बाद विदेश मंत्रालय ने दिल्ली में पाकिस्तानी हाई कमीशन के प्रतिनिधियों को तलब किया है.
विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख और समझौतों का उल्लंघन
भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी नेवी की कार्रवाई को समुद्र में आवाजाही के नियमों का उल्लंघन करार दिया है. भारत ने इस हरकत को 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते का उल्लंघन भी कहा है. इस्लामाबाद में मौजूद भारतीय दूतावास को भी पाकिस्तानी सरकार के सामने घटना पर विरोध जताने के निर्देश दे दिए गए हैं.
1991 का ऐतिहासिक समझौता क्या कहता है?
वर्ष 1991 के जिस समझौते का जिक्र भारतीय विदेश मंत्रालय ने किया है, वो दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने वाली प्रक्रिया के तहत किया गया था. इस समझौते के तहत अगर कोई भी देश किसी भी किस्म का सैन्य अभ्यास या कोई सैन्य कार्रवाई करता है, तो उसके लिए दूसरे देश को पहले से जानकारी देना जरूरी है.
टकराव में शामिल पाकिस्तानी नेवी के जहाज ने अपनी मौजूदगी से जुड़ी कोई जानकारी भारतीय नेवी को नहीं दी थी. इसीलिए ये वर्ष 1991 के समझौते का सीधा उल्लंघन करार दिया गया है. भारतीय नेवी के पूर्व अधिकारियों का तो यहां तक कहना है कि ऐसी हरकत न सिर्फ भारत-पाकिस्तान समझौते का उल्लंघन है, बल्कि ये समुद्री आवाजाही के लिए बनाए गए अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का भी उल्लंघन है.
अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियम और 'सेफ डिस्टेंस' का नियम
अब हम आपको उनसे जुड़ी जानकारी देने जा रहे हैं, ताकि आप समझ सकें कि पाकिस्तानी नेवी की कार्रवाई सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि गुनाह है.
अंतरराष्ट्रीय कानून कहता है कि समुद्र में आवाजाही के दौरान दो जहाजों के बीच कम से कम साढ़े पांच किलोमीटर का फासला रहना चाहिए. समुद्री आवाजाही की भाषा में इस फासले को सेफ डिस्टेंस कहा जाता है. अगर समुद्र में मौसम खराब है, जैसे कि अगर तूफान या तेज बरसात है तो इस सेफ डिस्टेंस का दायरा बढ़ाकर 10 किलोमीटर तक कर दिया जाता है. होर्मुज जैसे संकरे समुद्री रास्तों में ये सुरक्षित फासला तकरीबन डेढ़ से दो किलोमीटर तय किया गया है. नौसैनिक जहाजों के मामलों में सुरक्षित फासले यानी सेफ डिस्टेंस को ज्यादा तरजीह दी जाती है.
टकराव की इस घटना में भारतीय जहाज ने कानून का पूरा पालन किया है. भारतीय नेवी के कप्तान ने टक्कर के बावजूद कोई आक्रामक कदम नहीं उठाया है. दूसरी तरफ उत्तरी अरब सागर जैसे विशाल समुद्री क्षेत्र में पाकिस्तानी नेवी ने 10 किलोमीटर के सेफ डिस्टेंस का उल्लंघन किया है. इसी वजह से पाकिस्तानी नेवी की कार्रवाई को गलती नहीं गुनाह करार दिया जा रहा है. यहां आपको जानना चाहिए अगर भारत चाहता तो पाकिस्तान को वो इस गुस्ताखी की कितनी बड़ी सजा दे सकता था.
भारतीय युद्धपोतों की मारक क्षमता और भारत का संयम
उत्तरी अरब सागर में भारतीय नौसेना के डिस्ट्रॉयर तैनात हैं. एक डिस्ट्रॉयर कैटेगरी के जहाज पर तकरीबन 300 सैनिक मौजूद रहते हैं. सामान्य स्थिति में इस तैनाती में 50 अफसर और 250 नाविक शामिल होते हैं, हर डिस्ट्रॉयर कैटेगरी के जहाज पर 12 से लेकर 16 ब्रह्मोस मिसाइलें मौजूद होती हैं. हर मिनट में एक जहाज से दो ब्रह्मोस मिसाइलें दागी जा सकती हैं. ब्रह्मोस के साथ ही साथ ऐसे नौसैनिक जहाज पर 32 बराक मिसाइलें भी मौजूद होती हैं. ये ऐसी मिसाइलें होती हैं जो समुद्र के जहाज से हवा में उड़ते फाइटर जेट या फिर हेलीकॉप्टर को तबाह कर सकती हैं. इन जहाजों पर मेलारा गन भी होती है. इस गन से हर सेकंड में दो बड़े गोले दागे जा सकते हैं. यानी भारतीय नेवी के एक जहाज पर इतनी फायर पावर मौजूद थी कि वो आसानी से समुद्र में पाकिस्तानी जहाज को तबाह कर सकता था, लेकिन भारत ने शस्त्र की बजाय संयम को प्राथमिकता दी. इसी का नतीजा है कि समुद्र में एक और टकराव पैदा नहीं हुआ.
भारतीय नौसेना के सामने कहां ठहरता है पाकिस्तान?
पाकिस्तान के नौसैनिक जहाज ने जो जुर्रत की है, उसका खामियाजा सिर्फ एक जहाज को नहीं बल्कि पूरी पाकिस्तानी नौसेना को भी भुगतना पड़ सकता था. हम ऐसा क्यों कह रहे हैं, ये समझने के लिए आपको बस एक बार भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना की स्थिति देख लेनी चाहिए. आप खुद ब खुद समझ जाएंगे कि भारतीय नेवी के सामने पाकिस्तानी नौसेना कहीं नहीं ठहरती है.
भारतीय नौसेना के पास दो विमानवाहक पोत हैं, जबकि पाकिस्तान के पास एक भी नहीं है. अगर डिस्ट्रॉयर यानी हमला करने वाले युद्धपोतों की बात करें तो भारत के पास 13 डिस्ट्रॉयर हैं. यहां भी पाकिस्तान की झोली खाली है. अब नजर पनडुब्बियों पर डाल लेते हैं. भारत के पास 20 से 23 पनडुब्बियां हैं, जबकि पाकिस्तान के पास सिर्फ 10 से 15 पनडुब्बियां हैं. भारतीय नौसेना में तकरीबन 75 हजार अफसर और नाविक तैनात हैं. पाकिस्तानी नौसेना में ये तादाद लगभग 30 हजार है. सबसे बड़ी बात ये है कि भारतीय सेना उस ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है जो जंग के मैदान में अपना दमखम साबित कर चुकी है. दूसरी तरफ पाकिस्तानी नौसेना चीन में बनी मिसाइलों पर निर्भर है. चीन की मिसाइलें किस तरह फेल साबित हुई हैं, ये ऑपरेशन सिंदूर और हाल ही में यमन के टकराव के दौरान सामने आ चुका है.
2011 में भी पाकिस्तान ने की थी ऐसी ही नापाक हरकत
हम आपको बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब समुद्र में पाकिस्तान ने बेवजह उकसावे भरी कार्रवाई को अंजाम दिया है. पाकिस्तान पहले भी ऐसी नापाक हरकतों को अंजाम दे चुका है.
वर्ष 2011 में भारतीय नेवी का जहाज INS गोदावरी अदन की खाड़ी में तैनात था. इसी दौरान पाकिस्तानी नेवी का जहाज PNS बाबर अचानक भारतीय जहाज के नजदीक आ गया था. पाकिस्तान के बाबर नाम के जहाज ने भारतीय नेवी के जहाज को टक्कर मारी थी. इस टक्कर की वजह से INS गोदावरी का हेलीकॉप्टर को सुरक्षित रखने वाला ढांचा खराब हो गया था.
इतिहास के इस अध्याय ने आपको पाकिस्तान की फितरत और नीयत से परिचित करा दिया होगा. पाकिस्तान की इन्हीं करतूतों को देखकर एक लाइन याद आ जाती है जो एक बार गलती करे उसे नासमझ कहते हैं, जो दो बार गलती करे उसे मूर्ख कहते हैं... और जो बार-बार जानबूझकर गुनाह करे उसे पाकिस्तान कहते हैं.
चाणक्य नीति और ग्रे जोन सिग्नैलिंग का खेल
अर्थशास्त्र में आचार्य चाणक्य ने तूष्णीं युद्ध के सिद्धांत यानी साइलेंट वॉरफेयर के बारे में बताया है. ये सिद्धांत कहता है शत्रु का सबसे घातक हथियार चालाकी या फिर प्रहार नहीं है. शत्रु का लक्ष्य सामने खड़े राष्ट्र को उकसाना होता है. वो लगातार ऐसी ओछी हरकतें करता है जिससे आक्रोश बढ़े, तनाव बढ़े और उससे जंग छिड़े.. युद्ध छेड़ा जा सके.
पाकिस्तान और उसका फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी यही कर रहा है. सैन्य भाषा में इस रणनीति को GRAY ZONE SIGNALLING कहा जाता है. सबसे पहले आपको GRAY ZONE SIGNALLING नाम की इस रणनीति की परिभाषा समझनी चाहिए.
इस थ्योरी को सबसे पहले नोबेल पुरस्कार विजेता थॉमस शेलिंग ने सामने रखा था. GRAY ZONE SIGNALLING ऐसी स्थिति को कहा जाता है जब दुश्मन ऐसी कार्रवाई करता है जो ऊपर से देखने में एक इत्तेफाक या गलती लगती है, लेकिन असल में वो आक्रामक कार्रवाई होती है. इस किस्म की कार्रवाई का मकसद सामने वाले देश को हमला करने के लिए उकसाना होता है, ताकि दुनिया की नजर में उस देश को हमलावर करार दिया जा सके. सबसे बड़ी बात ये है कि इस किस्म की छद्म कार्रवाई के जरिए संयुक्त राष्ट्र के अनुच्छेद 51 से भी बचा जा सकता है. ये अनुच्छेद कहता है कि अगर कोई कार्रवाई गलती से या किसी इत्तेफाक की वजह से हुई है, तो उसके बदले में युद्ध या बड़ी सैन्य कार्रवाई नहीं की जा सकती है.
मुनीर की सत्ता की भूख और 1958 का तख्तापलट मॉडल
मुनीर जिस रणनीति पर चल रहा है, वो आप समझ गए होंगे. अब बड़ा सवाल ये है कि आखिर भारत को उकसाने या भड़काने के पीछे मुनीर का मकसद क्या है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मुनीर की फौज को भारी नुकसान पहुंचा था. फिर अचानक मुनीर दोबारा छद्म रूप से आक्रामक रवैया क्यों अपनाने की कोशिश कर रहा है. अब हम आपके सामने इन सवालों के जवाब दो भागों में बताने जा रहे हैं, जिसमें पहला भाग खुद फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से जुड़ा है.
ये हम सबको मालूम है कि ऑपरेशन सिंदूर में मात खाने के बावजूद पाकिस्तान में मुनीर का कद बढ़ाया गया था. आसिम मुनीर को थलसेना अध्यक्ष से प्रमोशन देकर फील्ड मार्शल बना दिया गया था. अगर पाकिस्तान दोबारा किसी युद्ध जैसी स्थिति में पहुंचता है तो मुनीर की पावर बढ़ना तय है. ऐसी स्थिति में आपातकाल की घोषणा करके मुनीर पूरे पाकिस्तान का कंट्रोल अपने हाथों में ले सकता है.
ये कोई कपोल-कल्पना या फिर एंटी-पाकिस्तान एजेंडा नहीं है. पाकिस्तान के इतिहास में ही एक ऐसी मिसाल मौजूद है, जो बताती है कि जब किसी सैन्य अधिकारी की ताकत हद से ज्यादा बढ़ जाती है तो पाकिस्तान में तख्तापलट होता है.
वर्ष 1958 में पाकिस्तान राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था. उस वक्त पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा ने मार्शल लॉ लागू कर दिया था, और अयूब खान को फील्ड मार्शल के समकालीन पद पर बैठा दिया था. 7 अक्टूबर को इस्कंदर मिर्जा ने ये फैसला लिया था, और 20 दिन बाद यानी 27 अक्टूबर को अयूब खान ने इस्कंदर मिर्जा को ही कुर्सी से हटा दिया था. मिर्जा के निर्वासन के बाद अयूब खान ने खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया था. इसी अयूब खान ने वर्ष 1965 में भारत के खिलाफ युद्ध भी शुरू किया था.
अंदरूनी तबाही से ध्यान भटकाने का पाकिस्तानी पैंतरा
आज 61 साल बाद आसिम मुनीर उसी फॉर्मूले को अपनाने की फिराक में है, जिस पर अयूब खान चला था. यानी पहले आपातकाल जैसे हालात पैदा करो और फिर सत्ता की सर्वोच्च कुर्सी को हासिल करो. मुनीर के कद के साथ ही साथ उकसावे भरी कार्रवाई के पीछे एक और बड़ा कारण है. ये कारण है पाकिस्तान के अंदरूनी हालात, जो तेजी से बिगड़ रहे हैं.
पाकिस्तान में महंगाई दर 11 प्रतिशत के पार जा चुकी है. अगर बेरोजगारी की बात करें तो ये आंकड़ा तकरीबन 7 प्रतिशत है जो पिछले दो दशक में सबसे ज्यादा है. पिछले एक साल के अंदर पाकिस्तान में बागियों के 3,145 हमले दर्ज किए जा चुके हैं. इन्हीं हालात की वजह से पाकिस्तानी जनता के अंदर नाराजगी बढ़ रही है. युद्ध और छद्म राष्ट्रवाद वो प्रोपेगैंडा माने जाते हैं जो जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटका देते हैं.
शस्त्र और संयम: भारत की अटूट नीति
यही है मुनीर के प्लान का पूरा सार. वो युद्ध जैसे हालात पैदा करके कुर्सी और अंदरूनी कलह दोनों से निपटना चाहता है, लेकिन मुनीर एक मूल बात समझ नहीं पाया है. भारत की धरती पर शस्त्र और संयम दोनों सिद्धांत मौजूद हैं. जब जरूरत पड़ती है तो गुनहगारों को सजा देने के लिए ऑपरेशन सिंदूर किया जाता है, और जब जरूरी होता है तो पाकिस्तान की चालबाजियों को नाकाम करने के लिए संयम को अपनाया जाता है. उत्तरी अरब सागर में हुए टकराव के दौरान भारत इसी नीति पर चला है.