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देश के 7 बड़े रेल कॉरिडोर होंगे फोर-लेन, 11 हजार किमी ट्रैक बढ़ाने की तैयारी; जानिए क्या-क्या होगा फायदा?

भारतीय रेलवे देश के 7 सबसे व्यस्त हाई डेंसिटी रेल कॉरिडोर को फोर-लेन यानी चार ट्रैक में बदलने की तैयारी कर रहा है. करीब 11,000 किलोमीटर लंबे इन रूट पर दो ट्रैक आने और दो जाने वाली ट्रेनों के लिए होंगे.

देश के 7 बड़े रेल कॉरिडोर होंगे फोर-लेन, 11 हजार किमी ट्रैक बढ़ाने की तैयारी; जानिए क्या-क्या होगा फायदा?

DNA: भारतीय रेल के बारे में कहा जाता है कि ये सिर्फ परिवहन का साधन नहीं है बल्कि भारत की आत्मा है जो पूरे देश को जोड़ती है. रेल की पटरियां करोड़ों सपनों की राह हैं. अब रेल की इन्हीं पटरियों के कायाकल्प की तैयारी की जा रही है. रेलवे देश के 7 सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर को फोर लेन में बदलने की तैयारी में लग गया है यानी 4 लेन की रोड के बाद 4 लेन पर ट्रेन भी चलेगी। एक रूट पर 4 पटरियां बिछी होंगी. 2 पटरियां आने के लिए और 2 पटरियां जाने के लिए. अभी देश के अधिकतर रूट पर आवाजाही में सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि ट्रेनों की संख्या अधिक है. लेकिन, पटरियां कम. इससे छुटकारा पाने के लिए सरकार ने ये फैसला किया है.

रेलवे के इस मास्टर प्लान से क्या-क्या फायदे होंगे, ये जानने से पहले आपको पता होना चाहिए कि किन रूट्स पर पटरियां फोर लेन की जा रही हैं.

इसके तहत करीब 11,000 किलोमीटर लंबे सात हाई डेंसिटी रेल रूट को चार ट्रैक में बदलने की योजना है. इन रूट पर दो ट्रैक आने वाली और दो ट्रैक जाने वाली ट्रेनों के लिए होंगे. इस योजना का उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाना, यात्रा का समय कम करना और यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों की आवाजाही को भी आसान बनाना है. फिलहाल, देश के कई व्यस्त रेल रूट पर ट्रेनों की संख्या अधिक होने और सीमित ट्रैक के कारण परिचालन में परेशानी आती है.

किन रेल रूट को फोर-लेन किया जाएगा?

रेलवे की योजना में देश के सात प्रमुख हाई डेंसिटी कॉरिडोर शामिल हैं. इनमें प्रमुख रूप से ये रूट हैं:

  • दिल्ली-हावड़ा
  • हावड़ा-चेन्नई
  • चेन्नई-मुंबई
  • मुंबई-दिल्ली
  • दिल्ली-चेन्नई
  • मुंबई-हावड़ा
  • दिल्ली-गुवाहाटी

देश के बड़े शहरों को जोड़ने वाले इन रूट्स को फोर लेन में बदलने से पैसेंजर ट्रेन के साथ-साथ मालगाड़ियों को भी अधिक संख्या में और तेज रफ्तार से चलाया जा सकेगा. अगर ज्यादा ट्रैक होंगे तो पटरियों पर बोझ कम होगा, अधिक ट्रेनें चलेंगी और आपकी यात्रा तेजी से होगी. आपको ये भी जानना चाहिए कि ये रूट कितना लंबा है और इन्हें ही क्यों इस काम के लिए चुना गया है.

इन 7 रूट के जरिए देश के चार प्रमुख महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता के साथ पूर्वोत्तर के प्रमुख शहर गुवाहाटी को भी जोड़ा जाएगा. इन कॉरिडोर के विस्तार का फायदा इनके रास्ते में आने वाले कई राज्यों को भी मिलेगा. इस योजना पर काम पहले से चल रहा है. जिन हिस्सों में चार ट्रैक तैयार हो चुके हैं. उन्हें योजना में अलग श्रेणी में रखा गया है. कुछ हिस्सों को मंजूरी मिल चुकी है या वहां काम चल रहा है, जबकि कुछ हिस्सों की डिटेल परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जा रही है. DPR तैयार होने के बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर इन हिस्सों में भी काम शुरू किया जाएगा.

11 हजार किलोमीटर लंबा होगा फोर-लेन रेल नेटवर्क

देश के सात हाई डेंसिटी रेल रूट की कुल लंबाई करीब 11,000 किलोमीटर है. काम पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के करीब 69,000 किलोमीटर लंबे नेटवर्क में से लगभग 11,000 किलोमीटर हिस्सा चार ट्रैक वाला हो जाएगा. फिलहाल, करीब 150 किलोमीटर रेल नेटवर्क ही चार ट्रैक वाला है. ऐसे में प्रस्तावित योजना के बाद इसमें लगभग 70 गुना बढ़ोतरी होगी. इन हाई डेंसिटी रूट की खास बात यह है कि ये भारतीय रेलवे के कुल नेटवर्क का केवल करीब 16 प्रतिशत हिस्सा हैं. लेकिन, इन पर रेलवे का लगभग 41 प्रतिशत ट्रैफिक गुजरता है. यही वजह है कि इन रूट को प्राथमिकता के आधार पर चार ट्रैक में बदलने की तैयारी की जा रही है.

ट्रेनों की लेटलतीफी और भीड़ से मिलेगी राहत

मौजूदा समय में ज्यादातर रेल रूट पर एक्सप्रेस, लोकल और मालगाड़ियां एक ही ट्रैक नेटवर्क का इस्तेमाल करती हैं. व्यस्त रूट पर कई बार एक ट्रेन को दूसरी तेज ट्रेन को रास्ता देने के लिए रोकना पड़ता है. चार ट्रैक होने के बाद ऐसी स्थिति में काफी कमी आने की उम्मीद है. फोर-लेन रेल नेटवर्क के कई फायदे होंगे. ज्यादा ट्रैक उपलब्ध होने से ट्रेनों की लेटलतीफी कम की जा सकेगी और हाईस्पीड, एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा.

इसके अलावा व्यस्त रूट पर ट्रैक की कमी के कारण फिलहाल सीमित संख्या में ट्रेनें चलाई जाती हैं. इसी वजह से कई बार यात्रियों को कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता और ट्रेनों में भीड़ बढ़ जाती है. एडिशनल ट्रैक बनने के बाद रेलवे इन रूट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ा सकेगा. एक अध्ययन के मुताबिक, हर अतिरिक्त ट्रैक ट्रेन संचालन की क्षमता को लगभग दोगुना कर सकता है. इससे भविष्य में नई वंदे भारत, अमृत भारत और दूसरी एक्सप्रेस ट्रेनों को चलाने की क्षमता भी बढ़ सकती है.

मालगाड़ियों की रफ्तार और कारोबार को भी फायदा

फोर-लेन रेल नेटवर्क का फायदा सिर्फ यात्री ट्रेनों को नहीं मिलेगा. मालगाड़ियों की संख्या और उनकी रफ्तार बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अनुभव से पता चलता है कि अलग ट्रैक उपलब्ध होने पर मालगाड़ियों की रफ्तार करीब 25 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है. मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ने से सामान कम समय में एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सकेगा. इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और देश में कारोबार को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है, ज्यादा यात्री रेल से यात्रा करेंगे तो सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी.

दूसरे देशों में भी है फोर-ट्रैक रेल नेटवर्क

दुनिया के कई देशों में पहले से ही बड़े हिस्से में चार ट्रैक वाला रेल नेटवर्क मौजूद है. अमेरिका के नॉर्थ-ईस्ट कॉरिडोर में करीब 700 किलोमीटर हिस्सा चार ट्रैक वाला है. ब्रिटेन में करीब 500 किलोमीटर रेल लाइन फोर-ट्रैक है. जापान में टोक्यो और दूसरे प्रमुख शहरों के आसपास करीब 600 किलोमीटर रूट पर चार ट्रैक मौजूद हैं. जापान के कुछ हिस्सों में छह ट्रैक तक हैं. जर्मनी में भी करीब 400 किलोमीटर रेल नेटवर्क चार ट्रैक वाला है. चीन में भी फोर-ट्रैक रेल नेटवर्क मौजूद है. हालांकि, इसकी सटीक लंबाई की जानकारी उपलब्ध नहीं है.

भारत अब करीब 11,000 किलोमीटर लंबे सात प्रमुख रेल कॉरिडोर को चार ट्रैक वाला बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. अगर यह योजना तय समय के अनुसार पूरी होती है, तो इससे देश के सबसे व्यस्त रेल रूट पर ट्रेनों की क्षमता, रफ्तार और कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

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About the Author

Gaurav Singh

Gaurav Singh

जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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