हूती विद्रोही एक तरफ हथियार बनाने में AI तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उन्होंने दुनिया की सबसे आधुनिक मानी जाने वाली एयर डिफेंस तकनीक को चकमा देकर दुनिया को हैरान कर दिया है. एक दिन पहले सऊदी अरब ने यमन में हूती के कब्जे वाले इलाकों पर बड़ा हमला किया. सऊदी अरब ने सना के बाहरी इलाके में मौजूद फ्यूल डिपो अल-सबाहा पर आसमान से बम बरसाए, जिसके फौरन बाद हूती ने सऊदी अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली तेल कंपनी अरामको के हेडक्वार्टर को निशाना बनाया. पांच-पांच लेयर की सुरक्षा वाले इस सऊदी संस्थान को हूती ने कैसे निशाना बनाया, यह पूरी दुनिया के लिए एक अबूझ पहेली बन चुका है. आज हम अमेरिकी डिफेंस सिस्टम को भेदने वाले हूती के इसी वॉर प्लान को डिकोड करेंगे.
सऊदी समर्थित यमन की सेना ने दावा किया है कि 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' के तहत हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर 1,700 से ज्यादा हमले किए गए. यमन की सेना ने इन हमलों में 900 से ज्यादा हूती विद्रोहियों को ढेर करने और 287 से अधिक सैन्य वाहनों व उपकरणों को नष्ट करने का दावा किया है. इन हमलों में लड़ाकू विमानों, ड्रोन, तोपों और रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल हुआ.
तेल ठिकानों के अलावा हूती के कमांड सेंटर, निगरानी चौकियां, हथियारों और गोला-बारूद के भंडार भी तबाह किए गए, जिससे हूती विद्रोहियों को जाने वाली रसद की सप्लाई रुक गई. सऊदी सेना ने सबसे बड़ा हमला अल-सबाहा में 2 लाख लीटर क्षमता वाले फ्यूल डिपो पर किया, जहां धमाके के बाद आसमान में आग का भयानक गुबार उठा. इसके अलावा होदेइदा प्रांत के रास ईसा बंदरगाह पर भी बमबारी की गई.
सऊदी अरब की इस कार्रवाई के जवाब में हूतियों ने आसमान से ड्रोन और मिसाइलें बरसाईं. सबसे बड़ा झटका तब लगा जब हूती मिसाइलें सऊदी की दिग्गज तेल कंपनी अरामको के एडमिनिस्ट्रेटिव हेडक्वार्टर तक जा पहुंचीं. हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने दावा किया कि उन्होंने धहरान में अरामको के प्रतिष्ठान, किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और रियाद स्थित अरामको तेल रिफाइनरी को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज़ मिसाइलों और ड्रोनों से हमला बोला है.
धहरान में जिस जगह हमला हुआ, वह किंग अब्दुल अज़ीज़ एयर बेस के पास है और सऊदी का बेहद संवेदनशील इलाका है. इसकी सुरक्षा के लिए मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस तैनात है:
इतनी सुरक्षा के बावजूद हूतियों ने सऊदी एयर डिफेंस को मात देने के लिए 'मिक्स्ड पेलोड स्ट्रेटजी' अपनाई. सबसे पहले उन्होंने कम रडार क्रॉस-सेक्शन वाले सैकड़ों सस्ते ड्रोन आगे भेज दिए. जब डिफेंस सिस्टम के रडार और इंटरसेप्टर्स इन ड्रोनों को ट्रैक करने और महंगे इंटरसेप्टर दागने में उलझ गए, तब पीछे से तेज रफ्तार क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं. सिस्टम ओवरलोड होने और इंटरसेप्टर्स की कमी का फायदा उठाते हुए नीचे उड़ान भरने वाली ईरानी क्रूज़ मिसाइलें और दिशा बदलने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें रडार को चकमा देकर अरामको की इमारत तक पहुंच गईं. 30 बिलियन डॉलर (करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये) खर्च करने के बावजूद सऊदी का सुरक्षा तंत्र इसे पूरी तरह रोक नहीं पाया.
इस हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है. ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर से बढ़कर 106 डॉलर और अमेरिकी क्रूड 92 डॉलर से बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया. हालांकि, अरामको का उत्पादन पूरी तरह ठप न होने से फिलहाल बड़ा संकट टला है, लेकिन तनाव बढ़ने पर तेल के दाम 120-130 डॉलर तक जाने की आशंका है, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में ईंधन और महंगाई का संकट गहरा सकता है. इस बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि हूती जानबूझकर तेल की कीमतें बढ़ाकर अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं.
उधर मिडिल ईस्ट में एक और बड़ा घटनाक्रम हुआ है. फ्लाईदुबई की फ्लाइट को हाइजैक करने की साजिश के बाद इजरायल ने अपने एयरस्पेस में उन देशों के पायलटों की एंट्री पर रोक लगा दी है, जिनसे उसके राजनयिक संबंध नहीं हैं. फ्रांस की एयर फ्रांस ने इसे लागू करते हुए पाकिस्तान, सऊदी अरब, ओमान, ईरान, कतर समेत 31 देशों के पायलटों को इजरायली हवाई क्षेत्र में न भेजने का फैसला किया है. हालांकि, कतर की मीडिया भले ही इसे धार्मिक रंग दे रही हो, लेकिन बैन सूची में क्यूबा, वेनेजुएला और उत्तर कोरिया जैसे गैर-मुस्लिम देश भी शामिल हैं, वहीं यूएई, मिस्र, बहरीन और जॉर्डन जैसे 20 मुस्लिम देशों के पायलटों पर कोई रोक नहीं है.