एक गोल्डी बराड़, पीछे पूरा ग्लोबल नेटवर्क... अमेरिका भारतीय गैंगस्टर्स के खिलाफ इतनी बड़ी जंग क्यों लड़ रहा है?
गोल्डी बराड़ पर FBI ने 10 लाख डॉलर का इनाम घोषित किया है. अमेरिका भारतीय गैंगस्टर्स के नेटवर्क पर कार्रवाई कर रहा है. लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ से जुड़े गैंग का नेटवर्क कई देशों तक फैला है.
अमेरिकी न्याय अधिकारी रहे रॉबर्ट कैनेडी का मानना था कि गैंग और गैंगस्टर्स अर्थव्यवस्था और समाज की रगों में दौड़ता हुआ कैंसर हैं. इसे रोकने के लिए सिर्फ कानून नहीं, बल्कि आक्रामक युद्ध की जरूरत है. दुनिया की 80 फीसदी आबादी ऐसे देशों में रहती है, जहां गैंग और गैंगस्टर्स का अपराध तंत्र अपने हिसाब से काम करता है. सिर्फ अमेरिका में ही 30 हजार से ज्यादा गैंग हैं. उसी अमेरिका में आज एक भारतीय गैंगस्टर के खिलाफ कार्रवाई हुई है.
FBI ने गोल्डी बराड़ को टॉप टेन मोस्ट वॉन्टेड भगोड़ों की लिस्ट में शामिल किया है. उस पर करोड़ों रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया है. गैंगस्टर गोल्डी बराड़ पर FBI का ये एक्शन क्यों महत्वपूर्ण है? दुनिया भर में गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई जैसे और कितने खतरनाक गैंगस्टर्स हैं. उनका साम्राज्य कितना बड़ा है? गैंगस्टर्स की ग्लोबल इकोनॉमी कितनी बड़ी है?
जिस तरह हमारे देश में दाऊद गैंग, लॉरेंस गैंग, बम्बीहा गैंग, नीरज बवाना गैंग जैसे आपराधिक गिरोह संगठित अपराध करते हैं, तस्करी और उगाही करते हैं, उसी तरह ऐसे गैंग और गिरोह पूरी दुनिया में हैं. ये एक तरह की वैश्विक बीमारी है.
इसी बीमारी का एक नाम सतिंदरजीत सिंह है, जो गोल्डी बराड़ के नाम से कुख्यात है. अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी FBI ने कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को टॉप 10 मोस्ट वांटेड भगोड़ों की लिस्ट में शामिल किया है. उसकी गिरफ्तारी या उसके ठिकाने की सटीक जानकारी देने वाले के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर यानी साढ़े 9 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की है. गोल्डी बराड़ FBI की इस लिस्ट में जगह पाने वाला 543वां भगोड़ा बन गया है. गोल्डी बराड़ को लॉरेंस ऑर्गनाइज्ड क्राइम ग्रुप यानी लॉरेंस गैंग का उत्तरी अमेरिका का सरगना बताया गया है.
अमेरिका की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट फेडरल कोर्ट ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. उस पर RICO यानी रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशन एक्ट के तहत अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट चलाने की साजिश का आरोप है. धमकी देकर अवैध वसूली करने का आरोप है. इसके अलावा कोकीन और मेथामफेटामाइन जैसे प्रतिबंधित ड्रग्स की तस्करी और हथियारों की अवैध सप्लाई जैसे कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं. FBI का मानना है कि गोल्डी बराड़ अभी अमेरिका में ही अंडरग्राउंड है. इसलिए उसे भगोड़ा घोषित करके उसके ऊपर इनाम की घोषणा की गई है.
कौन है गोल्डी बराड़?
गोल्डी बराड़ मूल रूप से पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब का रहने वाला है. उसके पिता पंजाब पुलिस में ASI रह चुके हैं. वो सिर्फ 32 साल का है. वो 2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा चला गया था. तब से कनाडा और अमेरिका में बैठकर अपने पूरे आपराधिक सिंडिकेट को ऑपरेट करता है.
वह गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का राइट हैंड है. अब वो खुद को लॉरेंस गैंग से अलग बताता है. लेकिन FBI की रिपोर्ट में इसे लॉरेंस गैंग का अमेरिकी सरगना बताया गया है. भारत सरकार ने गोल्डी बराड़ को आतंकवादी घोषित किया हुआ है.
भारत के इस घोषित आतंकवादी पर अमेरिका में कई केस दर्ज हैं. अमेरिकी जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि 18 जून 2023 को कनाडा के सरे में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और अमेरिका में छिपे गोल्डी बराड़ ने ही दिया था.
इसीलिए अमेरिका की जांच एजेंसी उसे खोज रही है, लेकिन गोल्डी बराड़ अंडरग्राउंड है और अंडरग्राउंड रहकर भी अपना गैंग चला रहा है. जब अमेरिका की पुलिस उसे नहीं खोज पाई, तो उसे भगोड़ा घोषित करते हुए उसके ऊपर इनाम का ऐलान कर दिया है.
अमेरिका भारतीय गैंगस्टर्स पर क्यों कर रहा है कार्रवाई?
पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर का मानना था कि, "कानून तोड़ने वाले गिरोहों के लिए कोई सुरक्षित पनाहगाह नहीं हो सकती. चाहे वे सीमाओं के पीछे छिपें या अंधेरे कोनों में, राज्य का यह कर्तव्य है कि वह उन्हें खोज निकाले और न्याय के कटघरे में खड़ा करे." यही कारण है कि अमेरिकी एजेंसी ने गोल्डी बराड़ को खोजने में पूरी शक्ति लगा दी है.
भारतीय मूल के किसी गैंगस्टर के खिलाफ FBI की अब तक की ये सबसे बड़ी कार्रवाई है. वैसे इससे पहले भारत से जुड़े कई गैंगस्टर्स पर अमेरिका में एक्शन हो चुके हैं.
लॉरेंस के भाई अनमोल बिश्नोई को अमेरिकी पुलिस ने नवंबर 2024 में गिरफ्तार किया था. एक साल जेल में रखने के बाद नवंबर 2025 में भारत डिपोर्ट कर दिया था. जग्गू भगवानपुरिया और ढांडा गैंग के खिलाफ भी एक्शन हुआ है, लेकिन गोल्डी बराड़ को अपने शीर्ष भगोड़ों की लिस्ट में शामिल करना बड़ी बात है.
अमेरिकी न्याय विभाग और FBI ने 7 जुलाई 2026 को भारतीय क्राइम सिंडिकेट्स के खिलाफ ऑपरेशन हार्ड बॉल शुरू किया था. इनके टारगेट पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग, भगवानपुरिया और ढांडा गैंग के गुर्गे शामिल थे.
इन गैंगस्टर्स ने अमेरिका को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स रूट में बदल दिया था. अमेरिका में एक समानांतर आपराधिक साम्राज्य खड़ा कर रहे थे. ये गैंग अमेरिका में रह रहे भारतीयों को फोन कर करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगते थे. पैसे नहीं देने पर अमेरिका में उनके घरों पर फायरिंग करवाते थे या भारत में रह रहे उनके रिश्तेदारों को जान से मारने की धमकी देकर आतंकित करते थे.
इसीलिए अमेरिकी न्याय विभाग ने इसे एक 'रणनीतिक खतरा' मानते हुए 'फाइव आइज' देशों और स्पेन के साथ मिलकर पूरी तरह नेस्तनाबूद करने का फैसला किया. इन गैंग्स के खिलाफ भारतीय जांच एजेंसी भी लगातार FBI की मदद कर रही है. FBI ने उसे भगोड़े की लिस्ट में शामिल किया है लेकिन भारतीय रिकॉर्ड में वो आतंकी और कुख्यात गैंगस्टर है.
गोल्डी बराड़ पर कार्रवाई से किसे फायदा?
जब अमेरिका में भारतीय मूल के गैंगस्टर्स पर एक्शन हो रहा है, तो इसका सीधा फायदा उन गैंगस्टर्स को होगा जो इनके दुश्मन हैं.
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गैंगस्टर्स पर कार्रवाई का फायदा मेक्सिकन गैंग सिनालोआ कार्टेल को होगा. बिश्नोई-बराड़ गैंग ने कार्टेल गैंग की 500 किलो से ज्यादा कोकीन लूट ली थी.
उत्तरी अमेरिका में ड्रग्स की रीटेल बिक्री करने वाले जो स्थानीय गैंग्स हैं, उनको राहत मिलेगी, क्योंकि बिश्नोई गैंग के खौफ और जबरन वसूली से वे बहुत परेशान थे.
गोल्डी बराड़ लंबे समय से कनाडा में जबरन वसूली और हथियारों की सप्लाई चेन चला रहा था. वहां के स्थानीय गैंगस्टर्स अब राहत की सांस लेंगे, क्योंकि लॉरेंस गैंग के डर से वे गायब हो गए थे.
बिश्नोई-बराड़ गैंग के कमजोर होने से पाकिस्तानी ड्रग सिंडिकेट्स और खालिस्तानी आतंकियों को बड़ा फायदा पहुंच सकता है.
गैंगस्टर्स के बीच की प्रतियोगिता भी किसी कॉर्पोरेट वॉर से कम नहीं होती. लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गैंग पर अमेरिकी एजेंसियों का हर एक प्रहार उनके विरोधियों के लिए एक अवसर की तरह है. संगठित अपराध एक वैश्विक बीमारी है.
दुनिया के बड़े गैंगस्टर्स और उनका नेटवर्क
लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ की तरह दुनियाभर में एक से बढ़कर एक कुख्यात गैंगस्टर हैं, जो संगठित तौर पर अपराध कर रहे हैं. गैंगस्टर का मतलब सिर्फ हत्या, अपहरण या फिर रंगदारी मांगने वाला नहीं होता, बल्कि संगठित तौर पर अपराध करने वाले भी गैंगस्टर्स ही होते हैं.
दुनियाभर की सुरक्षा एजेंसियों की नजर में मैक्सिको के इस्माइल एल मेयो ज़ाम्बाडा सबसे कुख्यात गैंगस्टर है. ये दुनिया का सबसे कुख्यात ड्रग तस्कर माना जाता है. सिनालोआ कार्टेल गैंग यही चलाता है, जिसकी ड्रग्स लॉरेंस-बराड़ गैंग ने लूट ली थी. इसका नेटवर्क 50 से अधिक देशों में है.
दूसरे नंबर पर रूसी माफिया सेमियन मोगिलेविच है. इकोनॉमिक्स में डिग्री रखने वाले सेमियन को FBI ने दुनिया का सबसे खतरनाक माफिया डॉन घोषित किया है. यह ग्लोबल स्टॉक मार्केट फ्रॉड, गैस-तेल पाइपलाइनों पर अवैध नियंत्रण और मनी लॉन्ड्रिंग का मास्टरमाइंड है. रूस, अमेरिका, यूरोप समेत 30 से ज्यादा देशों में इसका नेटवर्क है.
इसी तरह दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी है. भारत, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र उसे ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कर चुके हैं. दाऊद का सिंडिकेट सट्टेबाजी, बॉलीवुड फाइनेंसिंग, जाली नोट, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी चलाता है. 25 से अधिक देशों में डी कंपनी का नेटवर्क है.
इसके अलावा मेक्सिको के जुआन कार्लोस वालेंज़ुएला गोंजालेज का नाम आता है. इसका नेटवर्क मिलिट्री-ग्रेड ड्रोन और IED का इस्तेमाल करने के लिए कुख्यात है. अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी DEA ने इस पर 25 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया हुआ है. 40 से अधिक देशों में कोकीन, मेथामफेटामाइन, हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग फेंटानिल की अवैध सप्लाई करता है.
कैसे चलता है गैंगस्टर्स का ग्लोबल नेटवर्क?
गैंगस्टर्स और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध गिरोहों का नेटवर्क समूची दुनिया में है. यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम और INTERPOL जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का कहना है कि अमीर-गरीब, विकसित या विकासशील, ऐसा कोई भी देश नहीं बचा है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन आपराधिक नेटवर्क से अछूता हो.
भारत के गैंगस्टर्स भी अब ग्लोबल हो चुके हैं. विशेषकर लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गैंग ने अमेरिका, कनाडा, पुर्तगाल से लेकर ब्रिटेन, इटली, रूस तक अपना नेटवर्क फैला चुके हैं. ये जो गैंगस्टर्स हैं, इनमें से कोई जेल में है तो कोई अंडरग्राउंड है. फिर भी दुनियाभर में अपना गैंग कैसे चलाते हैं, ये भी कम दिलचस्प नहीं है.
गैंगस्टर्स फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर अपनी कथित 'रॉबिनहुड' या बाहुबली वाली छवि का प्रचार करते हैं. वे विदेशों में बैठे युवाओं या स्थानीय बेरोजगार लड़कों को हथियारों और पैसों की चकाचौंध दिखाकर आकर्षित करते हैं. इससे इनका नेटवर्क बढ़ता है.
टेलीग्राम, व्हाट्सएप, सिग्नल, थ्रीमा जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए ये अपने इंटरनेशनल नेटवर्क को चलाते हैं. बात करने के लिए ये सीधे मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि इंटरनेट और हर बार बदलने वाले यूरोपीय या अमेरिकी वर्चुअल फोन नंबरों का इस्तेमाल करके इंटरनेट कॉलिंग करते हैं.
ये सिंडिकेट किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी की तरह काम करते हैं, जहां हर काम के लिए अलग-अलग विभाग बंटे होते हैं. मतलब, शीर्ष पर बैठा सरगना, जैसे लॉरेंस बिश्नोई, अपने एक या दो खास करीबियों, जैसे गोल्डी बराड़ या रोहित गोदारा को निर्देश देता है. ये करीबी आगे 'मिडलमैन' को काम सौंपते हैं और वो ग्राउंड पर क्राइम करने वाले को निर्देश देता है.
विदेशों में बैठे शूटरों को पेमेंट करने के लिए या फिर ड्रग्स-हथियारों को खरीदने के लिए कानूनी बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया जाता. हवाला के जरिए पैसों का लेन-देन होता है. अब तो क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है.
मतलब, आधुनिक तकनीक, कॉर्पोरेट स्टाइल की कार्यप्रणाली और पैसों के अवैध हेरफेर ने इसे बहुत आसान बना दिया है.
संगठित अपराध करने वाले ये गैंगस्टर कई बार दूसरे देशों के लोकल गैंग को जोड़कर भी अपने आपराधिक गिरोह का विस्तार करते हैं. यही कारण है कि एक-एक गैंग का 50 से 80 देशों तक में नेटवर्क हो जाता है. और फिर ये अरबों का अपना साम्राज्य खड़ा कर लेते हैं.
गैंगस्टर्स की ग्लोबल इकोनॉमी कितनी बड़ी है?
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अलग-अलग आकलन के मुताबिक, संगठित अपराध का विश्व बाजार यानी ग्लोबल मार्केट लगभग 870 बिलियन से लेकर 2 ट्रिलियन डॉलर सालाना का है. मतलब करीब 84 लाख करोड़ से लेकर 192 लाख करोड़ रुपये के बराबर. सोचिए, ये दुनिया की कुल GDP का डेढ़ प्रतिशत से भी अधिक है. अगर इस आपराधिक साम्राज्य को एक देश मान लिया जाए, तो यह आर्थिक ताकत के मामले में कनाडा या इटली की कुल GDP के बराबर खड़ा होगा.
दुनिया की कोई भी कंपनी सालाना 2 ट्रिलियन डॉलर की कमाई नहीं करती है. विश्व स्तर पर सालाना सबसे ज्यादा कमाई करने वाली कंपनी अमेजन भी सालाना 717 बिलियन डॉलर ही कमा पाती है. मतलब बड़ी-बड़ी कंपनियां इतना नहीं कमा पाती हैं, जितनी कमाई गैंगस्टर करते हैं.
इनके एक-एक गैंग में लाखों गुर्गे काम करते हैं. दुनिया के सिर्फ तीन बड़े सिंडिकेट्स को मिलाकर ही 5 लाख से अधिक लोग इससे जुड़े हुए हैं. दुनियाभर में इनके खिलाफ एक से बढ़कर एक सख्त कानून हैं, लेकिन इन पर बहुत फर्क नहीं पड़ता.
ये गैंग्स अपनी कमाई का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा शेल कंपनियों, रियल एस्टेट और अब क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मुख्य बैंकिंग सिस्टम में सफेद करने में कामयाब हो जाते हैं. दुनिया भर की तमाम आधुनिक पुलिस और जांच एजेंसियां मिलकर भी इस अवैध कमाई का एक प्रतिशत हिस्सा भी फ्रीज या जब्त नहीं कर पाती हैं. यही कारण है कि इनका विस्तार बड़े स्तर पर हुआ है.
लेकिन गैंग्स और गैंगस्टर पैसे को छिपाने में कितने भी माहिर क्यों न हों, खुद को बचाने के लिए कितना भी छिप जाएं, कानून को इनके खिलाफ युद्ध स्तर पर एक्शन जारी रखना चाहिए.