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मिडटर्म चुनाव हारने के बाद ट्रंप जिस तरह के संकेत दे रहे हैं, उससे यही लगता है कि वो हारकर भी दुनिया को चैन से जीने नहीं देंगे. एक तरफ डॉनल्ड ट्रंप मान रहे हैं कि उनकी हार के लिए ईरान वॉर ही जिम्मेदार है, दूसरी तरफ उन्होंने संकेत दिए हैं कि ईरान पर खतरा कम नहीं हुआ है. अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक दिन पहले ही ईरान वॉर को हार का कारण बताया था. जब मीडिया ने इस पर ट्रंप से प्रतिक्रिया मांगी तो ट्रंप ने क्या जवाब दिया, ये आपको बहुत ध्यान से सुनना चाहिए.
ट्रंप एक तरफ मान रहे हैं कि ईरान वॉर की वजह से महंगाई बढ़ी, तेल के दाम बढ़े और वो चुनाव हार गए, लेकिन दूसरी तरफ कह रहे हैं कि दोबारा मौका मिला, तो भी ईरान पर हमले का फैसला लेंगे. मतलब ट्रंप नहीं सुधरेंगे. इसके अलावा ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार हासिल कर लिए तो भविष्य में दुनिया के मौजूदा हालात और अस्तित्व पर ही खतरा पैदा हो सकता है. यानी ट्रंप ने संकेत दे दिया है कि ईरान से परमाणु बम बनाने से जुड़ी कोई सूचना मिली तो ईरान पर फिर हमला शुरू हो सकता है. फिलहाल मिडिल ईस्ट से ईरानी परमाणु बम से जुड़ी दो खबरें आ रही हैं.
#DNAमित्रों | ट्रंप.. हारकर भी नहीं सुधरने वाले हैं! हार का गुस्सा.. ईरान पर उतारेंगे ट्रंप? #DNA #DNAWithRahulSinha #DonaldTrump #Iran @rahulsinhatv https://t.co/xG2AjtvGfR
— Zee News (@ZeeNews) November 5, 2026
एक तरफ ईरान की मस्जिदों में कट्टरपंथियों ने परमाणु बम बनाने की मांग शुरू कर दी है. दूसरी तरफ इजरायल से अमेरिका को खुफिया सूचना दी जा रही है कि ईरान ने पिकैक्स माउंटेन पर फिर से यूरेनियम संवर्धन का काम शुरू कर दिया है और इन खबरों के साथ जब दुनिया ट्रंप के बयान को जोड़कर देखती है तो ट्रंप की हार के बाद दिख रहे अच्छे दिन कुछ पलों के मेहमान नजर आते हैं. आज आपको जानना चाहिए कि ईरान की मस्जिदों से वो कौन सी मांग हो रही है, जिससे ट्रंप भड़क सकते हैं.
ईरान की मस्जिदों और धार्मिक आयोजनों में अब खुलकर यह मांग उठने लगी है कि देश को अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार बनाने चाहिए. पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने परमाणु हथियार बनाने पर फतवे के जरिए प्रतिबंध लगाया था, लेकिन अब देश में इसके खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं. अमेरिका और इजराइल के साथ जारी जंग और अमेरिकी हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद जनता और नेताओं की सोच में बड़ा बदलाव आया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होते, तो अमेरिका उन पर बमबारी करने से पहले कई बार सोचता. इस बयान ने ईरान में परमाणु बम की बहस को और हवा दी. ईरान के कई नेता और सुरक्षा अधिकारी अब अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार संधि से बाहर निकलने की मांग भी कर रहे हैं, लेकिन नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने परमाणु बम पर अपना रुख अभी स्पष्ट नहीं किया है.
मोजतबा का रुख साफ नहीं है, लेकिन ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान अब तक यही दोहराते आए हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ही सीमित रहेगा. दूसरी तरफ विशेषज्ञ राय जाहिर कर रहे हैं कि कट्टरपंथियों का दबाव बढ़ा तो ईरान की इस नीति में बदलाव हो सकता है और इसीलिए अमेरिका में नई कांग्रेस के काम संभालने से पहले ईरान पर बड़े हमले की आशंका कम नहीं हुई है. एक तरफ ट्रंप हार के लिए ईरान वॉर को जिम्मेदार बता रहे हैं, दूसरी तरफ उनका प्रशासन भारत समेत कुछ दूसरे देशों की कंपनियों को ईरान की मदद करने का आरोप लगाकर प्रतिबंधित कर रहा है.
चुनाव में हार के बाद बौखलाए ट्रंप प्रशासन ने भारत और तुर्किए की कंपनियों पर कार्रवाई की है. अमेरिका की तरफ से कहा गया कि जिन कंपनियों पर कार्रवाई की गई उन्होंने तेल कारोबार में ईरान की मदद की. यानी ईरान की मदद के आरोप में अमेरिका ने भारत और तुर्किए की कंपनियों पर एक्शन लिया है.
अमेरिका ने ईरान की मदद का आरोप लगाकर भारत के चार नागरिकों और उनसे जुड़ी 9 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं. इनमें चंडीगढ़ के कारोबारी सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शामिल हैं. इसके अलावा दो भारतीय नागरिक अश्वनी कुमार धीमान और इशविंदर सिंह हैं, जो सुनील शर्मा से जुड़ी इन कंपनियों के प्रमुख बताए गए हैं.
अमेरिका का आरोप है कि इस नेटवर्क ने गुयाना और लाओस जैसे देशों के नाम पर फर्जी जहाज रजिस्ट्रेशन और प्रमाणपत्र जारी किए. इससे ईरानी तेल ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाज अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचकर अपना कारोबार जारी रख सके. भारत के अलावा तुर्किये की फुगो ग्राउंड सर्विसेज कंपनी पर भी ईरान की प्रतिबंधित एयरलाइंस को सेवाएं देने के आरोप में कार्रवाई हुई है. फिलहाल ये अमेरिका के आरोप हैं. इस पर भारत सरकार या कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इसे ट्रंप की हार की बौखलाहट से जोड़कर देखा जा रहा है.