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बिहार सरकार के निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मुजफ्फरपुर जिला के नगर पंचायत माधोपुर सुस्ता में कार्यरत कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार के मुजफ्फरपुर समेत तीन ठिकानों पर घंटों रेड की. नगर पंचायत माधोपुर सुस्ता में कार्यरत कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है, जिसको लेकर मुजफ्फरपुर के माधोपुर सुस्ता के साथ पटना और सहरसा में छापेमारी की गई.
निगरानी थाना कांड संख्या 131/26 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में दर्ज इस मामले में आरोपी के पास उनकी कुल ज्ञात आय से करीब 110 प्रतिशत अधिक यानी 1 करोड़ 58 हजार 733 रुपये की अप्रत्याशित संपत्ति अर्जित किए जाने का खुलासा हुआ है, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है.
विजिलेंस जांच के दौरान यह सामने आया है कि प्राथमिक अभियुक्त सुशील कुमार, उनकी पत्नी चांदनी गुप्ता और अन्य परिजनों के नाम से कुल 6 अचल संपत्तियां पाई गई हैं, जिनका कुल बाजार मूल्य लगभग 1 करोड़ 37 लाख 71 हजार 400 रुपये है. इसके अलावा विभिन्न बैंकों में 28 लाख 54 हजार रुपये की चल संपत्ति भी पाई गई है.
विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से सर्च वारंट प्राप्त करने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना की तीन विशेष टीमों की तरफ से आरोपी के तीन प्रमुख ठिकानों में पटना, मुजफ्फरपुर और सहरसा स्थित आवास और कार्यालयों पर एक साथ तलाशी की कार्रवाई की गई है.
आरोपी कार्यपालक पदाधिकारी का पैतृक निवास सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर थाना अंतर्गत तरियामा गांव में है, जबकि उनका वर्तमान पता भूसौला, दानापुर, एम्स पटना के निकट फुलवारी शरीफ, पटना है. ब्यूरो की टीम इन सभी ठिकानों पर दस्तावेजों और साक्ष्यों को खंगालने में जुटी है.
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में तलाशी अभियान और गहन अनुसंधान का कार्य अभी भी तेजी से जारी है और तलाशी पूरी होने के बाद आय से जुड़े अन्य अवैध स्रोतों और संपत्तियों के संबंध में और खुलासे होने की संभावना है.
इनपुट: मणितोष कुमार