DNA : त्योहार का सीजन है. बड़े शहरों से हजारों लोग त्योहार मनाने के लिए अपने शहर लौटने की प्लानिंग कर रहे हैं. फेस्टिव सीजन में रेलवे और एयर लाइंस का पैसेंजर लोड यानी यात्रा करने की इच्छा रखनेवालों की संख्या बेहताशा बढ़ जाती है. आम दिनों के मुकाबले त्योहारी सीजन में रेल से सफर करने की मंशा रखनेवाले लोगों की संख्या 300 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. वहीं, एयरलाइंस में टिकट बुक कराने की ख्वाहिश रखनेवाले यात्रियों की संख्या 70 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.
रेलवे और एयरलाइंस की अपनी सीमाएं हैं. ये शिकायत भी होती है कि ट्रेन में रिजर्व सीट नहीं मिली और एयरलाइंस ने किराया बढ़ा दिया. इन शिकायतों के बीच पिछले कुछ सालों में यात्रियों की च्वॉइस बदली है. 500 से 1,000 किलोमीटर की यात्रा करनेवाले लोगों की पहली प्राथमिकता रोड ट्रांसपोर्ट बन गया है यानी यात्री अब 1 हजार किलोमीटर तक रेल या एयरलाइंस से जाने के बजाए बस या अपनी गाड़ी से जा रहे हैं.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, 300 से 500 किलोमीटर वाली बस यात्राओं में 68% से ज्यादा का उछाल आया है. 500 से 1,000 किलोमीटर वाली बस यात्राओं में 89% का इजाफा हुआ है. गर्मियों के दौरान, 300 किलोमीटर से कम दूरी वाले रूट्स पर बस यात्रा में 80 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई. यहां गौर करने की बात ये है कि इन्हीं रूटों पर फ्लाइट्स में यात्रियों की संख्या में कमी आई.
गर्मियों के दौरान बस से हरिद्वार, ऋषिकेश, तिरुपति, उज्जैन, गोवा, उदयपुर और नासिक जानेवाले लोगों की संख्या 100 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी.इस बदलाव को और बेहतर तरीके समझने के लिए नीति आयोग की 2025 में आई एक रिपोर्ट के आंकड़े भी आपको बताते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक यात्री परिवहन में सड़क की हिस्सेदारी करीब 78%, रेल की हिस्सेदारी 17%, एयरलाइंस की हिस्सेदारी 4% और मेट्रो की हिस्सेदारी 1% है यानी रोजाना की ट्रैवलिंग हो या छुट्टियों का सफर हाईवे लोगों के लिए लाइफलाइन बन गए हैं. बस से या कार से रोड ट्रांसपोर्ट पहली और नई पसंद बनकर सामने आया है.
सवाल ये है कि आखिर यात्रा के लिए प्राथमिकता में सड़क पहले नंबर पर कैसे पहुंच गया. क्या इसके पीछे सिर्फ ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं मिलना या प्लेन के टिकट का महंगा होना ही वजह है. तो ऐसा नहीं है. इसके पीछे है बेहतर सड़कों का निर्माण और बुनियादी ढांचे में सुधार. 2014 में 91 हजार 287 किलोमीटर नेशनल हाईवे था. मार्च 2026 में कुल 1 लाख 46 हजार 572 किलोमीटर नेशनल हाईवे बन गया. यानी 12 साल में करीब नेशनल हाईवे में 61% वृद्धि हुई. 2014 में 4 और उससे ज्यादा लेने वाले नेशनल हाईवे 18 हजार 371 किलोमीटर थे.
मार्च 2026 में आंकड़ा ढ़ाई गुना ज्यादा बढ़कर 45 हजार 516 किलोमीटर हो गया. 2014 में हाई स्पीड कॉरीडोर 93 किलोमीटर था. मार्च 2026 में ये 39 गुना बढ़कर 3 हजार 644 किलोमीटर हो गया. भारतमाला जैसे नए प्रोजेक्ट्स के तहत करीब 23 हजार किलोमीटर का रोड कॉरिडोर बना है. मित्रो ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं. आज अगर 100-200 किलोमीटर का सफर करते हैं तो जमीन पर हुए बुनियादी बदलाव का अनुभव कर सकते हैं.
पहले दिल्ली से देहरादून का सफर 6 घंटे में पूरा होता था. अब सिर्फ ढ़ाई घंटे में ये दूरी तय हो जाती है. इसलिए कम दूरी की यात्रा के लिए सड़क पहली पसंद बन रही है. सड़क से यात्रा सिर्फ समय की बचत नहीं है. कई मामलों में पैसों की बचत भी है. एक केस स्टडी के जरिए यात्रा के अर्थशास्त्र को भी समझते हैं और जानते हैं कि कैसे कम दूरी की यात्रा के लिए सड़क सबसे किफायती साधन बन गई है समझिए आपको अगर 600 किलोमीटर की यात्रा करनी है.

अगर आप ट्रेन में स्लीपर क्लास की टिकट लेकर यात्रा करते हैं तो आपको 400 से 800 रुपए तक खर्च करना होगा. ये सबसे सस्ता साधन है. लेकिन इसमें रिजर्वेशन मिलना मुश्किल है. खासतौर पर फेस्टिव सीजन में अगर आप लग्जरी बस से सफर करते हैं तो 1200 से 3000 रुपए तक का खर्च आएगा. अकेले यात्रा करनेवालों के लिए ये बेहतर विकल्प है.
सामान्य फ्लाइट से 600 किलोमीटर के लिए आपको 4 हजार से 10 हजार रुपए तक खर्च करना पड़ेगा. इसमें समय बचेगा. लेकिन पैसा ज्यादा खर्च होगा लेकिन यही सफर कार से 4 लोग मिलकर करते हैं तो प्रति व्यक्ति 1200 रुपए तक का खर्च होगा. ये किफायती होने के साथ ही सुविधाजनक भी है. रिजर्वेशन का झंझट नहीं है. फेस्टिव सीजन में अगर आप परिवार के साथ कार से यात्रा करते हैं तो हवाई यात्रा की तुलना में खर्च प्रति व्यक्ति 80 प्रतिशत तक कम होता है.
फेस्टिव सीजन में लग्जरी बस से यात्रा भी लगभग 60 प्रतिशत सस्ती पड़ती है. अकेले व्यक्ति के लिए कार का सफर थर्ड एसी से महंगा पड़ सकता है. लेकिन परिवार या मित्रो के साथ यात्रा करनी हो तो सड़क का सफर सबसे सस्ता है. इस बदलाव ने सिर्फ रोड ट्रांसपोर्ट को नया विकल्प ही नहीं बनाया है कई दूसरे सेक्टर्स को भी बड़ा लाभ पहुंचाया है.
बेहतर हाईवे की वजह से छोटी छुट्टियों में लोग तीर्थ स्थलों, हिल स्टेशनों पर पहुंच रहे हैं, इससे घरेलू पर्यटन को बढ़ावा मिला है. 2024 में घरेलू पर्यटकों की संख्या करीब 3 अरब दर्ज की गई. वित्त वर्ष 2023-24 में देश की GDP में पर्यटन का योगदान करीब 16 लाख करोड़ रुपए रहा. बढ़ते पर्यटन ने देश में करीब 9 करोड़ नए रोजगार का सृजन किया.
2025 में घरेलू पर्यटकों ने करीब 20 लाख करोड़ रुपए खर्च किए. सड़क अब सिर्फ ट्रांसपोर्ट का जरिया नहीं ग्रोथ का इंजन भी बन गई है. सड़क यात्री परिवहन के लिए नई लाइफलाइन बनी है। साथ ही पर्यटन जैसे कई सेक्टर्स के लिए संजीवनी भी बनी है.